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'सियासत': PM मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर घमासान, चिदंबरम का पलटवार

लाल किले से PM मोदी का 'दिमागी नक्सल' वाला बयान। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के बाद चिदंबरम के पलटवार और किरेन रिजिजू की सफाई से छिड़ा सियासी संग्राम।


Siyasat: देश के 80वें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल के दौरान 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', 'अर्बन नक्सल' और 'आंदोलनजीवी' जैसे शब्दों के बाद अब प्रधानमंत्री ने एक नया शब्द गढ़ा है 'दिमागी नक्सल'।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने विश्लेषण किया कि कैसे जंतर-मंतर पर छात्रों के ऐतिहासिक आंदोलन, पुलिस बर्बरता और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के ठीक बाद आए इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है।

लाल किले से PM मोदी का बयान: "हथियारी गए, अब दिमागी नक्सल से खतरा"
लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद का तो खात्मा हो चुका है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सल' देश के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

अराजकता फैलाने का आरोप: पीएम ने कहा कि ये 'दिमागी नक्सल' मौकों की तलाश में हैं और समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव चल रहे हैं।

आइसोलेट करने की अपील: उन्होंने आह्वान किया कि देश की युवा पीढ़ी को विकसित भारत की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इन 'दिमागी नक्सलियों' को पहचानना और समाज से अलग-अलग (Isolate) करना जरूरी है।

"मुझे दिमाग़ी नक्सल होने पर गर्व है": चिदंबरम के बयान पर उबली BJP
प्रधानमंत्री के बयान के 24 घंटे के भीतर ही इस पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं:

पी चिदंबरम का पलटवार: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मुझे दिमाग़ी नक्सल होने पर गर्व है।"

संसदीय कार्य मंत्री का जवाब: किरेन रिजिजू ने चिदंबरम के बयान को बेहद नुकसानदेह बताया और 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा देते हुए कहा कि जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, धारा 370 के पक्षधर हैं, अलगाववादियों के साथ खड़े हैं और 'चिकन नेक' को काटकर पूर्वोत्तर को भारत से अलग करना चाहते हैं, वही दिमागी नक्सल हैं।

पूर्व DGP बृजलाल की परिभाषा: भाजपा के राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि ये लोग जंगलों में हथियार लेकर नहीं चलते, बल्कि शहरों में प्रोफेसर, लेखक, एनजीओ संचालक और बुद्धिजीवी बनकर युवाओं में हिंसात्मक विचार भरते हैं।

देवेंद्र फडणवीस और चिराग पासवान का हमला: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में अराजकता फैलाने वाले और भारत को सुपरपावर बनने से रोकने वाले ही दिमागी नक्सली हैं।

कांग्रेस और CJP का तीखा सवाल: "क्या हक मांगने वाले युवा नक्सल हैं?"
विपक्ष और छात्र संगठनों ने इस बयान को युवाओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का अपमान करार दिया है:

जयराम रमेश और राजीव शुक्ला की आपत्ति: कांग्रेस नेताओं ने याद दिलाया कि जब सरकार ने 'अर्बन नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था, तब गृह मंत्रालय ने खुद संसद में माना था कि इस नाम की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। अब पढ़े-लिखे लोगों और सवाल पूछने वाले युवाओं को 'दिमागी नक्सल' कहा जा रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का सवाल: जंतर-मंतर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले CJP के सौरव दास ने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछा कि जब देश के पढ़े-लिखे युवा अपनी चरमराती शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और घटते रोजगार पर सवाल करते हैं, तो उन्हें खुले तौर पर 'नक्सली' कैसे कहा जा सकता है?

जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
'सियासत' में विश्लेषण करते हुए मनीष कुमार ने रेखांकित किया कि इस नए शब्द के पीछे जंतर-मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन ही मुख्य वजह माना जा रहा है।

पुलिस की बर्बरता: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक और रोजगार को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था और लाठीचार्ज किया था।

शिक्षा मंत्री की छुट्टी: छात्रों के भारी आक्रोश और विरोध के आगे झुकते हुए मोदी सरकार को 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बड़े राजनीतिक झटके से ध्यान भटकाने और नया नैरेटिव सेट करने के लिए ही लाल किले से 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

लाल किले से एआई और मुफ्त कोचिंग का वादा
प्रधानमंत्री ने भाषण में 1 वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ट्रेनिंग देने और ऑनलाइन मुफ्त कोचिंग की घोषणा भी की। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने स्कूली शिक्षा को मजबूत करने के बजाय कोचिंग व्यवस्था पर निर्भरता को बढ़ावा दे दिया है। इसके अलावा, भारत में AI इनोवेशन के लिए 5 साल में केवल 10,300 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो वैश्विक स्तर पर बेहद कम है।


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