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सियासत: अमित शाह के इस्तीफे की मांग, चंदा चोरी और हॉकी जर्सी पर घमासान

द फ़ेडरल देश के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने छात्रों पर पुलिस बर्बरता, राहुल गांधी द्वारा अमित शाह का इस्तीफा मांगने और हॉकी टीम की जर्सी के भगवाकरण पर बड़ा विश्लेषण किया है।


Siyasat: संसद के मानसून सत्र में घमासान चरम पर पहुँच चुका है। पेपर लीक और 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिसिया बर्बरता को लेकर राहुल गांधी और विपक्ष ने सीधे देश के गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने छात्रों पर लाठीचार्ज, संसद के भीतर-बाहर चल रहे गतिरोध और अब भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के 'भगवाकरण' को लेकर छिड़े नए विवाद का तीखा राजनीतिक विश्लेषण पेश किया है।

1. राहुल गांधी का अमित शाह पर सीधा प्रहार: "या तो गुनहगार हैं या नाकाबिल"

'सियासत' के इस विशेष बुलेटिन में एंकर मनीष कुमार ने राहुल गांधी के उस आक्रामक रुख को रेखांकित किया, जिसने सत्ता पक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। पेपर लीक और छात्रों पर दिल्ली पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा चलाए गए पैलेट गन व लाठीचार्ज पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में अमित शाह का इस्तीफा माँगा।

राहुल गांधी ने गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:

"हमने भी सरकारें चलाई हैं। जब छात्रों पर गोली, पैलेट गन या लाठी चलाने की बात आती है, तो अंतिम फैसला (The Last Call) गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का ही होता है। अब यहाँ सिर्फ दो ही स्थितियाँ संभव हैं पहली, या तो अमित शाह ने खुद युवाओं को पीटने और पैलेट गन चलाने का आदेश दिया, जिससे वे सीधे गुनहगार बनते हैं। दूसरी, या फिर उन्हें खबर ही नहीं थी कि उनकी पुलिस क्या कर रही है, जो उन्हें एक पूरी तरह नाकाबिल गृह मंत्री साबित करता है। दोनों ही सूरतों में उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक हक नहीं है।"

शो में दिखाया गया कि कैसे इस मुद्दे पर संसद भवन के भीतर लगातार हंगामा हो रहा है और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर जवाब न देने पर विपक्ष हमलावर है।

2. खड़गे का 'कमरे में छुपने' वाला बयान और जेपी नड्डा से तीखी बहस

राज्यसभा में भी इस मुद्दे की तपिश देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बंद कमरे में छुपकर बहुत दिनों तक जवाबदेही से नहीं बचा जा सकता। खड़गे ने सवाल दागा:

सादे कपड़ों में छात्रों पर लाठियां बरसाने वाले लोग कौन थे?

दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ किसके इशारे पर बर्बरता कर रही थी?

क्या रात के 12 बजे इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालने से देश के छात्रों के जख्म भर जाएंगे?

इस दौरान सदन के नेता जेपी नड्डा और खड़गे के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नड्डा ने खड़गे के शब्दों को असंसदीय बताते हुए कार्रवाई से निकालने की मांग की, जबकि विपक्ष अमित शाह की व्यक्तिगत उपस्थिति पर अड़ा रहा।

3. TMC सांसद का बीजेपी पर पलटवार: "मुलायम सिंह पर आरोप तो अमित शाह पर क्यों नहीं?"

'सियासत' में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद का वो बयान भी प्रमुखता से शामिल किया गया, जिसने बीजेपी के दोहरे मापदंडों की पोल खोल दी।

कीर्ति आजाद ने 1990 के दशक की राजनीति की याद दिलाते हुए कहा कि बीजेपी दशकों से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव पर राम भक्तों पर गोली चलाने का आरोप लगाती आ रही है। अगर किसी राज्य या केंद्र में हुई पुलिस कार्रवाई का जिम्मेदार उस वक्त का मुख्यमंत्री या गृह मंत्री होता है, तो आज जब दिल्ली में निर्दोष छात्रों पर लाठियां और पैलेट गन चली हैं, तो उसकी जिम्मेदारी अमित शाह से क्यों नहीं तय होनी चाहिए?

4. संसद परिसर में 'दान पेटी' रखकर प्रदर्शन: सपा ने उठाया 'चंदा चोरी' का मुद्दा

संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सांसदों ने घेरा बनाकर बीच में 'दान पेटी' रख दी और सरकार के खिलाफ "चंदा चोरी" के नारे लगाए।

समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने न सिर्फ युवाओं और किसानों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के नाम पर भी "चंदा चोरी" की मानसिकता दिखाई है। सपा ने साफ किया कि जब तक सदन में चंदा चोरी और भ्रष्टाचार पर खुली चर्चा की अनुमति नहीं मिलती, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।

5. नीली से 'भगवा' हुई हॉकी टीम की जर्सी: 'मेन इन ब्लू' पर नया विवाद

'सियासत' के अंतिम हिस्से में भारतीय खेल जगत में शुरू हुई सियासत का पर्दाफाश किया गया। दशकों से 'मेन इन ब्लू' के नाम से मशहूर भारतीय हॉकी टीम की आधिकारिक जर्सी का रंग बदलकर ऑरेंज/भगवा कर दिया गया है।

प्रियंका गांधी का हमला: प्रियंका गांधी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आरएसएस का देश की आजादी में कोई योगदान नहीं था और अब संस्थाओं से लेकर खेल टीमों तक का भगवाकरण करने की कोशिश हो रही है।

पूर्व कप्तान की आपत्ति: भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेंद्र रासकिन्हा ने इस फैसले पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा— "भारतीय हॉकी की पहचान हमेशा नीली जर्सी रही है। प्रशंसक अपनी टीम को नीली जर्सी में ही देखना चाहते हैं। इस ऑरेंज जर्सी के पीछे क्या तर्क है?"

हालांकि हॉकी इंडिया ने सफाई दी है कि नीले टर्फ मैदान पर खिलाड़ियों की दृश्यता बेहतर करने के लिए यह बदलाव किया गया है, लेकिन 'सियासत' ने सवाल उठाया कि क्या वंदे भारत ट्रेनों के बाद अब राष्ट्रीय खेल टीमों की पहचान बदलना सस्ती सियासत का हिस्सा नहीं है?

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