'मंगल मिलन' से मकर द्वार तक हंगामा: कैसे पलटी संसद में मानसून सत्र की बाजी?
'द फ़ेडरल देश' के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार का विश्लेषण। जानिए रांची छात्र प्रदर्शन, हेमंत सोरेन सरकार के फैसले और संसद के मकर द्वार पर हुए हंगामे का पूरा सच।
Siyasat: "अमित शाह सदन में आओ!" इस आक्रामक नारे के साथ पूरे मानसून सत्र के दौरान जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर इंडिया (INDIA) गठबंधन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर पूरी तरह हावी नजर आ रहा है। 'द फ़ेडरल देश' के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार का बड़ा सवाल यही है कि क्या झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इंडिया ब्लॉक और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आक्रामक रुख की हवा निकाल दी है? क्या इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल 'झारखंड मुक्ति मोर्चा' और उसके मुखिया हेमंत सोरेन ने अपनी सरकार के फैसलों के चलते मानसून सत्र के खत्म होते-होते इंडिया ब्लॉक के हाथ में आई बाजी को गंवा दिया है?
यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कल तक जो बीजेपी और एनडीए के सांसद अमित शाह के बयान देने की विपक्ष की मांग को लेकर बैकफुट पर नजर आ रहे थे और संसद में उनकी गैरहाजिरी पर कैमरे पर बात करने से भी कतरा रहे थे, वे अचानक फ्रंट फुट पर आकर खेलने लगे हैं। एनडीए सांसद अब झारखंड पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज को लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके झारखंड न जाने पर सवाल उठा रहे हैं और रांची में हुए दमन को लेकर राहुल गांधी से ही जवाब मांग रहे हैं।
बालयोगी भवन के 'मंगल मिलन' से संसद के मकर द्वार तक हंगामा
संसद भवन के बालयोगी भवन में एनडीए सांसदों की 'मंगल मिलन' बैठक हुई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत सभी सांसदों ने हाथों में तिरंगा लेकर 'वंदे मातरम' के नारे लगाए। राष्ट्रवाद के जरिए तमाम मुद्दों को ढकने की कला में माहिर बीजेपी-मोदी सरकार का यह रूप देखने को मिला।
बैठक खत्म होते ही एनडीए सांसद झारखंड में छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार की कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संसद के मकर द्वार तक पहुंच गए।
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत यह थी:
हेमंत सोरेन का नाम नदारद: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के मुखिया हैं और कांग्रेस केवल सरकार में शामिल है, लेकिन बीजेपी सांसदों की जुबान पर हेमंत सोरेन का नाम तक नहीं था।
केवल राहुल गांधी निशाने पर: क्या मंत्री, क्या सांसद—सभी राहुल गांधी से ही जवाब की मांग कर रहे थे, मानो झारखंड के मुख्यमंत्री राहुल गांधी हों और वहां कांग्रेस की सरकार हो।
एनडीए सांसदों ने जमकर नारेबाजी की:
"देखो राहुल गांधी शर्म करो, झारखंड में जहां कांग्रेस पार्टी सरकार में है, वहां पे जाकर के जो युवाओं की बर्बरता पूर्वक पिटाई हुई है राहुल गांधी वहां क्यों नहीं जाते? वास्तव में राहुल गांधी भगोड़ा हैं... अमित शाह जी देंगे जवाब, राहुल गांधी भागना मत!"
मकर द्वार पर इंडिया ब्लॉक के सांसद भी अमित शाह के सदन में आकर जवाब देने और राम मंदिर में चंदा चोरी के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। दोनों धड़े आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा वहां से गुजरीं, तो बीजेपी सांसदों ने उनके सामने भी नारेबाजी की। इस पर प्रियंका गांधी ने चुटकी लेते हुए कहा:
"अब सत्ताधारी दलों के सांसदों को भी प्रदर्शन करना पड़ रहा है। अभी पहली बार मैंने देखा है कि सरकार के एमपी प्रदर्शन कर रहे हैं, तो इतना तो हमने मजबूर कर लिया इनको।"
राहुल गांधी का रुख और हेमंत सोरेन सरकार की नाकामी
बीजेपी राहुल गांधी के रांची न जाने पर सवाल उठा रही है। हालांकि, राहुल गांधी जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले हुए छात्रों के प्रदर्शन में भी शारीरिक रूप से शामिल नहीं हुए थे, लेकिन उन्होंने समर्थन दिया था। ठीक उसी तरह, 10 अगस्त को रांची में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा:
"झारखंड के छात्रों के लिए मेरा मैसेज क्लियर है- हम शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं... तो जब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहा है तब उस पर कोई हिंसा करना, सरासर गलत है।"
ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि राहुल गांधी को घेरने का मौका बीजेपी को किसने दिया?
इसका जवाब है हेमंत सोरेन। 10 अगस्त से पहले हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों के साथ तीन दौर की बातचीत की, लेकिन वे छात्रों को प्रदर्शन खत्म करने के लिए मना नहीं सके:
सीबीआई जांच से इनकार: सरकार ने परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को अस्वीकार कर दिया।
परीक्षाएं रद्द करने पर असहमति: छात्रों ने 13 परीक्षाएं रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सरकार केवल तीन परीक्षाएं रद्द करने पर ही सहमत हुई।
'सियासत' टेक
जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई बर्बरता के बाद राहुल गांधी पीएम हाउस पर धरने पर बैठे, पैलेट गन के शिकार घायलों और सोशल मीडिया पर टारगेट हुए छात्रों से मिले, और प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में पीएम मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत से लेकर गौतम अडानी तक पर बरसे। उन्होंने अडानी की आमदनी 10 साल में 30 गुना बढ़ने और संस्थाओं में वाइस चांसलर्स व प्रचारकों को बैठाकर सोच पर कंट्रोल करने का आरोप लगाया था, जिससे बीजेपी बेचैन थी।
लेकिन हेमंत सोरेन की एक गलती के कारण, जिस विपक्ष के सवालों (पेपर लीक, पुलिस बर्बरता, चंदा चोरी) से बचने के लिए पीएम मोदी और अमित शाह पूरे मानसून सत्र में सदन में नहीं आ रहे थे, उसी विपक्ष को अब सत्ता पक्ष के सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
संसद सत्र में केवल दो दिन बचे हैं। बीजेपी जो अब तक बैकफुट पर थी, वह उल्टा हमलावर हो गई है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन इस आक्रामकता का क्या काट निकालते हैं। हालांकि, जिस तरह से राहुल गांधी जन-जी (Gen-Z) के बीच जाकर उनके मुद्दे उठा रहे हैं, उन्हें फिलहाल रोक पाना मोदी सरकार के लिए असंभव नजर आ रहा है।
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