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सियासत: लड़की पर FIR से घिरी सरकार, राहुल का तंज और चंदा चोरी हंगामा

द फ़ेडरल देश के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने रुचिका सिंह FIR विवाद, GenZ आंदोलन पर राहुल गांधी के बयान और संसद में पप्पू यादव के चंदा चोरी प्रदर्शन का विश्लेषण किया।


Siyasat: लगातार तीन बार से लोकसभा चुनाव जीतकर देश की सत्ता पर 12 सालों से काबिज नरेंद्र मोदी सरकार क्या महज 25 साल की एक युवती के सोशल मीडिया पोस्ट से इतनी डरी हुई है कि उसके पीछे दो-दो राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियां लगा दी गई हैं? डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम, अभिव्यक्ति की आजादी बनाम संवैधानिक पदों की गरिमा, राहुल गांधी के तीखे हमले और संसद में 'दान पेटी' लेकर पहुँचे विपक्ष के अनोखे प्रदर्शन का तीखा विश्लेषण पेश किया है।


1. 25 साल की रुचिका सिंह पर शिकंजा: डर या संवैधानिक गरिमा की रक्षा?
'सियासत' के इस एपिसोड में एंकर मनीष कुमार ने जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले हुए छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े विवाद का कच्चा-चिट्ठा खोला। नोएडा की रहने वाली 25 वर्षीय रुचिका सिंह पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

कार्रवाई की पूरी क्रोनोलॉजी:
नोएडा में Zero FIR
: गाजियाबाद की अधिवक्ता स्मृति सिंह चंदेल की शिकायत पर नोएडा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया है।

दिल्ली पुलिस की सख्ती: दिल्ली पुलिस ने भी अलग से जांच शुरू करते हुए 'X' (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पत्र लिखकर संबंधित कंटेंट हटाने और यूजर की जानकारी मांगी है।

शो में सवाल उठाया गया कि क्या 25 साल की एक नासमझ युवती की अभद्र भाषा के लिए उस पर ऐसी चौतरफा कानूनी कार्रवाई की जरूरत थी, या फिर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि GenZ (युवा पीढ़ी) का कोई भी छात्र फिर से सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की हिमाकत न करे?

2. 'लाडली बहना' के नारों के बीच बेटी पर FIR: क्या विरोध दबाने की कोशिश?
'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने सरकार की कथनी और करनी के विरोधाभास पर तीखे सवाल दागे। एक तरफ चुनाव जीतने के लिए 'लाडली बहना', 'लाड़की बहिन' और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे नारों का ढोल पीटा जाता है, तो दूसरी तरफ अपने हक, पेपर लीक और रोजगार में कमी के खिलाफ आवाज उठाने वाली बेटियों को अदालतों और पुलिस के पचड़ों में घसीटा जा रहा है।

सभ्य समाज में अभद्र भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन क्या एक नासमझी की सजा इतनी बड़ी होगी कि किसी युवती का करियर और जीवन अदालत की चौखट पर जाते-जाते बिखर जाए?

3. राहुल गांधी की हुंकार: "GenZ को धमकी देकर चुप नहीं करा सकते पीएम मोदी-अमित शाह"
इस मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी दी है।

राहुल गांधी ने लिखा:

"पीएम मोदी और अमित शाह - आप Gen Z को धमकी देकर उनकी आवाज को चुप नहीं कर सकते हैं। पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं, अब आप उनके खिलाफ FIR दर्ज कर रहे हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद कर रहे हैं? आप भारत का अतीत हैं, भारत के भविष्य के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं, उसे लेकर सावधान रहिए।"

दूसरी ओर, बीजेपी समर्थकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करना नहीं हो सकता।

4. संसद परिसर में अनोखा ड्रामा: साधु बने पप्पू यादव, 'चंदा चोरी' पर दान पेटी लेकर भागे!
'सियासत' के अंतिम हिस्से में संसद भवन से आई उस रोचक और आक्रामक तस्वीर का विश्लेषण किया गया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। गृहमंत्री अमित शाह के सदन में न आने और राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के खिलाफ निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के भेष में हाथ में 'दान पेटी' लेकर बैठ गए।

राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने उस दान पेटी में सांकेतिक रूप से पैसे डाले, जिसके बाद पप्पू यादव उस दान पेटी को लेकर भागने लगे यह दर्शाते हुए कि राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की गई है। इस अनोखे प्रदर्शन से साफ है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी' के मुद्दे को किसी भी कीमत पर जिंदा रखना चाहती हैं।


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