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परिसीमन बिल पर फिर छिड़ा घमासान, मानसून सत्र में सरकार बनाम विपक्ष

'सियासत' में मनीष कुमार का विश्लेषण: मानसून सत्र में परिसीमन और वन नेशन वन इलेक्शन बिल ला सकती है सरकार; जयराम रमेश ने बहुमत को बताया 'कलंकित दो तिहाई'।


Siyasat: देश की राजनीति में आगामी 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाला संसद का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार होने वाला है. इस सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक अभूतपूर्व और तीखा राजनीतिक बारूद फटने की पूरी संभावना है. डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के बेहद लोकप्रिय शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने इस पूरे मामले की परतें खोलते हुए विश्लेषण किया है.


एंकर मनीष कुमार के अनुसार, सत्र की शुरुआत से ठीक पहले दोनों ही खेमों ने अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने के लिए दिल्ली में महामंथन शुरू कर दिया है. एक तरफ जहां सोनिया गांधी की अध्यक्षता में 'कांग्रेस पार्लियामेंट स्ट्रेटजी कमेटी' की बड़ी बैठक हुई, वहीं दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एनडीए (NDA) के मंत्रियों के समूह ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं. 'सियासत' शो में यह साफ तौर पर रेखांकित किया गया कि इस बार का सत्र केवल विधायी कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए नैरेटिव सेट करने का एक बड़ा मंच बनने जा रहा है.

1. 'चोटिल' मोदी सरकार का पलटवार: 'कलंकित' दो तिहाई बहुमत की रार
'द फेडरल देश' के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने फ्लैशबैक में जाते हुए बताया कि संसद के इस सत्र की सबसे बड़ी लड़ाई परिसीमन और महिला आरक्षण संसोधन विधेयक को लेकर होने वाली है. इसी साल अप्रैल के महीने में मोदी सरकार को लोकसभा में तब भारी मुंह की खानी पड़ी थी, जब वह दो तिहाई बहुमत न होने के कारण इन दोनों बड़े विधेयकों को पारित नहीं करा पाई थी. किसी भी पूर्ण बहुमत वाली सरकार के लिए विशेष सत्र बुलाकर बिल का गिर जाना एक बेहद असहज स्थिति थी.

लेकिन पिछले कुछ महीनों में देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव नतीजों ने पूरी राजनीतिक बिसात को बदल कर रख दिया है. पश्चिम बंगाल से 15 साल पुरानी ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार का पूरी तरह सफाया हो चुका है. इसके अलावा, महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद टूटकर एकनाथ शिंदे के साथ शामिल हो चुके हैं. तमिलनाडु में भी डीएमके का साथ छोड़ कांग्रेस अब विजय की पार्टी (TVK) के साथ सरकार का हिस्सा बन चुकी है. विपक्ष के इसी बिखराव के बाद सरकार के हौसले बुलंद हैं और वह मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक, महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और 'वन नेशन वन इलेक्शन' बिल को दोबारा पास कराने की पूरी तैयारी में है.

जयराम रमेश का तीखा हमला: चालाकी से जुटाया जा रहा बहुमत
'सियासत' शो में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के उस तीखे हमले का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार की इस रणनीति पर सीधे गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया:

"गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन विधेयक को दोबारा लाने की कोशिश में जुटे हैं. 17 अप्रैल के झटके के बाद उन्होंने चालाकी से दो-तीन विपक्षी पार्टियों को तोड़ा है. विपक्षी दलों को तोड़कर लोकसभा में दो तिहाई बहुमत जुटाने का यह प्रयास पूरी तरह से 'कलंकित दो तिहाई बहुमत' होगा. यह सीधे तौर पर हमारे पवित्र संविधान का घोर अपमान है."

जयराम रमेश ने दावा किया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे खुद सभी विपक्षी नेताओं के साथ सीधे संपर्क में हैं. उन्होंने कहा कि फ्लोर पर सरकार को यह अनैतिक बहुमत किसी भी कीमत पर हासिल नहीं करने दिया जाएगा. कांग्रेस की मांग है कि सरकार को भौगोलिक और तकनीकी पेचों के बजाय मौजूदा 543 सीटों पर ही तुरंत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए. अगर सरकार ऐसा करती है, तो कांग्रेस बिना किसी शर्त के उसका पूरा समर्थन करेगी.

2. राम मंदिर चंदा चोरी और नीट पेपर लीक: विपक्ष का ब्रह्मास्त्र
'द फेडरल देश' की इस रिपोर्ट के अनुसार, भले ही सरकार विपक्षी पार्टियों को तोड़कर खुद को मजबूत दिखा रही हो, लेकिन विपक्ष के पास भी सरकार को बैकफुट पर धकेलने के लिए कई बड़े और राष्ट्रीय मुद्दे हैं. सोनिया गांधी की बैठक में यह तय हुआ है कि इन मुद्दों पर सरकार को सदन के भीतर और बाहर पूरी तरह से घेरा जाएगा.

राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: कांग्रेस इसे हिंदुओं की आस्था के साथ अब तक का सबसे बड़ा विश्वासघात करार दे रही है. विपक्ष का कहना है कि जिस मुद्दे के दम पर भाजपा सत्ता के शीर्ष पर पहुंची, वहां चढ़ावे की चोरी होना बेहद शर्मनाक है.

नीट (NEET) पेपर लीक और सीबीएसई गड़बड़ी: विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है. इसी मांग को लेकर लद्दाख के सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले आमरण अनशन पर बैठे हैं. मानसून सत्र के पहले ही दिन ये लोग जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक बड़ा मार्च निकालने जा रहे हैं, जिससे दिल्ली में सुरक्षा और सियासी तनाव बढ़ना तय है.

E20 पेट्रोल की जबरन नीति: देश के लगभग 3 करोड़ वाहन मालिकों पर जबरन 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल थोपे जाने का मुद्दा भी इस सत्र में गूंजेगा. गाड़ियों की घटती माइलेज और इंजनों में आ रही खराबी को लेकर विपक्ष मध्यम वर्ग के आर्थिक दर्द को हवा देगा.

इन बड़े बिलों पर होगा आर-पार का टकराव
एंकर मनीष कुमार ने शो 'सियासत' में विश्लेषण करते हुए बताया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा लाए जाने वाले सभी प्रमुख विधेयकों का कड़ा विरोध करने की रणनीति बना चुके हैं. इनमें मुख्य रूप से तीन विधेयक शामिल हैं, जिन पर दोनों सदनों में भारी गतिरोध देखने को मिल सकता है:

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक: विपक्ष इसे शिक्षा व्यवस्था के केंद्रीयकरण और संस्थाओं पर कब्जे का प्रयास मान रहा है.

एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक: गैर-सरकारी संगठनों और फंडिंग के नियमों से जुड़े इस बिल का विपक्ष पुरजोर विरोध करेगा.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन विधेयक: गरीबों के राशन और खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस कानून में बदलाव को विपक्ष जनविरोधी बता रहा है.

डीएमके (DMK) के रुख पर टिकी सबकी नजरें
20 जुलाई को संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक होने वाली है. इस बैठक में साझा रणनीति तैयार की जाएगी, लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी डीएमके (DMK) के रुख पर टिका हुआ है.

संसद के भीतर सरकार के मंसूपों पर पानी फेरने के लिए कांग्रेस को डीएमके के मतों की सबसे ज्यादा जरूरत है. लेकिन डीएमके ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं खोले हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाला यह मानसून सत्र हाल के वर्षों का सबसे ज्यादा हंगामेदार और टकराव वाला सत्र साबित हो सकता है.


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