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संसद से सड़क तक नीट का मुद्दा: PM मोदी और अमित शाह से राहुल गांधी ने मांगा इस्तीफा!

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और हजारों छात्रों ने संसद भवन तक विरोध मार्च निकाला। पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस की बर्बरता के बाद यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गरमा गया है।


"किसानों-मजबूरों की एकता जिंदाबाद!" के नारों और नीट समेत तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से परेशान छात्रों के आक्रोश ने देश की राजधानी दिल्ली को हिलाकर रख दिया है। 20 जुलाई को हजारों छात्रों ने संसद भवन तक विशाल मार्च निकाला। छात्रों की मांग बिल्कुल स्पष्ट और जायज थी—सरकार पेपर लीक पर अपनी जवाबदेही तय करे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करे या उनका इस्तीफा ले।

छात्रों पर पुलिस की बर्बरता और लाठीचार्ज

छात्रों के इस शांतिपूर्ण 'संसद मार्च' को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने कड़े इंतजाम किए थे। सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में आई तस्वीरें देश को झकझोरने वाली हैं। कम उम्र के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता साफ देखी गई। कुछ पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में छात्रों पर बेदर्दी से लाठियां बरसाते नजर आए। प्रदर्शनकारियों को संसद पहुंचने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। हालांकि, इन तमाम बाधाओं के बावजूद गुस्साए छात्र संसद भवन के करीब तक पहुंचने में कामयाब रहे। इस हिंसक कार्रवाई में लगभग 100 छात्र घायल बताए जा रहे हैं।

संसद में हंगामा और विपक्ष का आक्रामक रुख

संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा हुआ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं के साथ स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और छात्रों पर हुए अत्याचार पर सदन में तुरंत चर्चा की मांग की। राहुल गांधी ने हैरानी जताते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई इस बर्बरता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक कोई माफी नहीं मांगी है।

राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम छात्रों के मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन स्पीकर साहब कहते हैं कि डिबेट के लिए उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी। देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है और लोगों को पीटा जा रहा है, यह पूरी तरह से असंवैधानिक और गैर-भारतीय है।" वहीं राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी लाठीचार्ज को लेकर सरकार की कड़े शब्दों में घेराबंदी की।

घायल छात्रों से नेताओं की मुलाकात और PM आवास पर धरना

मामला तब और गरमा गया जब घायल छात्रों का हाल जानने नेताओं का अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचे और भर्ती छात्रों से मुलाकात की।

इसके बाद दोपहर को दिल्ली की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस सांसदों के साथ 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़े और बाहर ही धरने पर बैठ गए। नेताओं ने सांकेतिक रूप से हाथों में प्लास्टिक की हथकड़ियां बांधी हुई थीं। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर हुई बर्बरता की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।

धरने को देखते ही दिल्ली पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई और पुलिस ने जबरन कांग्रेस नेताओं को हटाना शुरू कर दिया। सरकार की तरफ से पीएमओ राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को राहुल गांधी को मनाने और धरना समाप्त कराने के लिए भेजा गया। धरना स्थल पर "जब-जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है" के जोरदार नारे गूंजते रहे।

सोनम वांगचुक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लिए राहत भरी खबर आई। अदालत ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को उनकी इच्छा के अनुसार मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगो ने इस फैसले पर खुशी व्यक्त की और साफ किया कि सोनम वांगचुक का अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक संसद में पेपर लीक पर निष्पक्ष चर्चा नहीं हो जाती।

NDA की बैठक में पीएम मोदी की सफाई

चौतरफा घिरी सरकार को जवाब देने पर मजबूर होना पड़ा। एनडीए (NDA) संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने सांसदों को नीट मुद्दे पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की खबर आते ही सरकार ने सख्त कदम उठाए, 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) को सफलतापूर्वक आयोजित करवाया। हालांकि, यही भरोसा प्रधानमंत्री ने 2024 में सरकार बनने के बाद भी दिया था, जिसके बाद भी पर्चा लीक की घटनाएं नहीं रुकीं।

छात्रों के बाद अब किसानों का दिल्ली कूच

सरकार के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। एक तरफ जहां छात्र सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों ने भी मोर्चा खोल दिया है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का एक बड़ा जत्था दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने बड़े-बड़े कंक्रीट बैरिकेड्स लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की है। दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर भी सुरक्षा सख्त कर दी गई है। 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की यादें अभी भी ताज़ा हैं, और अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या मोदी सरकार एक साथ छात्रों और किसानों के इस संयुक्त आक्रोश को संभाल पाएगी?

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