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'सिर फोड़ा, 60 टांके आए फिर भी जेल नहीं गया!' स्वतंत्र भारद्वाज का सच

'सिर फोड़ा, 60 टांके आए फिर भी नहीं गया जेल!' स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर राहुल गांधी का दखल। 'सियासत' शो में मनीष कुमार का खास विश्लेषण।


Siyasat: एक वायरल पॉडकास्ट में खुद को हिंदूवादी एक्टिविस्ट बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के कथित हमले और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े दावों ने राजधानी की कानून-व्यवस्था और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पीड़ित परिवार की बेटी नीशू आज़ाद द्वारा अपने पिता संजय आज़ाद के लिए लगातार न्याय की मांग की जा रही है, जिसे अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा समर्थन मिलना शुरू हो गया है।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक विश्लेषण शो 'सियासत' में पत्रकार मनीष कुमार ने इस वायरल वीडियो, पुलिसिया कार्रवाई और इसके सियासी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की।

क्या है वायरल पॉडकास्ट का मामला?
वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर नीशू आज़ाद के पिता संजय आज़ाद पर हुए हमले का जिक्र करते हुए बेखौफ अंदाज में कहता सुनाई देता है कि उसने सिर फोड़ा था, जिसमें 60 टांके लगे और धारा 307 (हाफ मर्डर) जैसी स्थिति बनी, लेकिन वह जेल नहीं गया और अगले ही दिन बाहर घूम रहा था।

पॉडकास्ट में वह अपने राजनीतिक रसूख का दावा करते हुए कपिल मिश्रा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक का नाम 'बड़े भाई' के तौर पर लेता दिखता है। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद उसने सफाई दी कि वह तंजिया (Sarcastic) लहजे में बोल रहा था और उसने यह कदम केवल आत्मरक्षा (Self-Defense) में उठाया था।

दिल्ली पुलिस और राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल
स्वतंत्र भारद्वाज के इस बयान के बाद यह सवाल गहरा गया है कि क्या राजधानी में राजनीतिक पहुंच और रसूख के चलते गंभीर मामलों में भी आरोपियों को खुली छूट मिल जाती है:

दिल्ली पुलिस की भूमिका: जब पीड़ित पक्ष द्वारा गंभीर चोटों और हमले की शिकायत दर्ज कराई गई थी, तो आरोपी को जेल क्यों नहीं भेजा गया और क्या किसी राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई में ढिलाई बरती गई?

पुलिस का पक्ष: दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं, मामले में जांच जारी है और पूछताछ के बाद नियमानुसार चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

राहुल गांधी का समर्थन और छात्र संगठनों का विरोध
इस मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी तूल पकड़ लिया है:

राहुल गांधी का दखल: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़ित बेटी नीशू आज़ाद से बात कर उसे भरोसा दिलाया है कि वे इस कानूनी और न्याय की लड़ाई में उसके साथ पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे।

सड़कों पर प्रदर्शन: छात्र कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इस मामले को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर धरना दिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (DCP) से आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की।

निष्कर्ष
शो 'सियासत' में उठाया गया मूल सवाल यही है कि अगर कोई आरोपी सार्वजनिक मंच पर खड़े होकर कानूनी धाराओं का उपहास उड़ाता है और सत्ता के शीर्ष नेताओं के नाम पर छूट मिलने का दावा करता है, तो यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह जाता बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था और कानून के राज की साख की परीक्षा बन जाता है।


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