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कफन ओढ़कर जमीन पर लेटे छात्र, लगे 'राम नाम सत्य है' के नारे: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिखा अनोखा प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चौथे दिन भी जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। 'द फेडरल देश' के रिपोर्टर मनीष कुमार ने ग्राउंड जीरो पर जाकर इस प्रदर्शन को कवर किया। इस दौरान कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के कार्यकर्ताओं ने एक अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।


मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और उग्र होता जा रहा है। सोमवार को लगातार चौथे दिन भी छात्र और युवा सड़कों पर डटे रहे। 'द फेडरल देश' के रिपोर्टर मनीष कुमार ने ग्राउंड जीरो पर जाकर इस पूरे प्रोटेस्ट को कवर किया। सोमवार को जंतर-मंतर पर कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने एक बेहद विचित्र और सांकेतिक प्रदर्शन किया।

सफेद चादर ओढ़कर लेटे छात्र, लगे 'राम नाम सत्य है' के नारे

जंतर-मंतर पर चौथे दिन NSUI कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन देखने लायक था। कार्यकर्ता जमीन पर सफेद चादर बिछाकर बैठ गए और फिर खुद पर भी सफेद चादर (कफन) ओढ़कर लेट गए। कफन में लेटे इन छात्रों को उनके साथियों ने गेंदे के फूलों की माला पहनाई और उनके चारों तरफ घूमकर "राम नाम सत्य है" के जोरदार नारे लगाने लगे। लोकतंत्र की दुहाई देते हुए इस तरह के अनोखे और प्रतीकात्मक शव प्रदर्शन को देखकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी भी हैरान रह गए।

'13 करोड़ वोटरों को कागजों में मार दिया गया': विनोद जाखड़

जब 'द फेडरल देश' की टीम ने इस अनोखे प्रदर्शन के पीछे की वजह पूछी, तो NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। विनोद जाखड़ ने कहा, "चुनाव आयोग ने देश भर में मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के नाम पर 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम काट दिए हैं। ऐसे लोगों को यह दिखा दिया गया है कि वे हैं ही नहीं और न ही इस देश के नागरिक हैं। एक तरह से उन्हें कागजों पर मृत घोषित कर दिया गया है। इसीलिए हम इस तरह का कफन प्रदर्शन कर रहे हैं।" विनोद जाखड़ ने साफ किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक यह प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है।पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और बस में ठूंसे गए कार्यकर्ता

प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की भारी तैनाती की गई थी। जैसे ही कफन ओढ़े छात्रों का प्रदर्शन तेज हुआ, सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि नई दिल्ली इलाके में धारा 163 लागू होने के कारण जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोई अनुमति नहीं है। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को उठाने की कोशिश की, तो NSUI कार्यकर्ताओं और पुलिस जवानों के बीच जबरदस्त गुथमगुत्था और धक्का-मुक्की देखने को मिली। सुरक्षा बल के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद लेटे हुए कार्यकर्ताओं को उठाया और बस में ठूंसकर हिरासत में ले लिया।

'वोटों की चोरी से बनी है मोदी सरकार': गुरमेहर कौर

पुलिसिया कार्रवाई और हिरासत में लिए जाने के बीच NSUI की प्रमुख कार्यकर्ता गुरमेहर कौर का भी बड़ा बयान सामने आया। द फेडरल देश से बात करते हुए गुरमेहर कौर ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा— "केंद्र की मोदी सरकार वोटों की चोरी से बनी है, इसलिए हम इस सरकार को नहीं मानते।" गुरमेहर कौर के इस तीखे बयान ने आंदोलन के राजनीतिक पारे को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

चौथे दिन भी गरमाया रहा माहौल

जंतर-मंतर पर पिछले चार दिनों से लगातार चल रहे इस घमासान ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इससे पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्वराज इंडिया और वरिष्ठ वकीलों ने भी यहां पहुंचकर CEC के इस्तीफे की मांग की थी। लेकिन सोमवार को NSUI के इस कफन प्रदर्शन, पुलिस के साथ हुई गुथमगुत्था और गुरमेहर कौर के तीखे बयानों ने इस पूरे मुद्दे को देशव्यापी बहस में बदल दिया है।

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