x

सियासत: अखिलेश की नाराजगी? INDIA ब्लॉक की बैठक से क्यों बनाई दूरी

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले INDIA ब्लॉक में सीट शेयरिंग पर तनातनी। अखिलेश यादव ने बैठक से बनाई दूरी, सपा-कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग।


Siyasat: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान खुलकर सतह पर आ गई है। 30 सितंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक से समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने दूरी बना ली है। वहीं, यूपी कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव में 150 से अधिक सीटों पर दावेदारी ठोकने के बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक शो 'सियासत' में वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार ने सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग विवाद, दोनों दलों के नेताओं की तल्ख बयानबाजी और बिहार चुनाव के नतीजों से सबक न लेने की विपक्षी रणनीति पर विस्तृत विश्लेषण पेश किया।

1. INDIA ब्लॉक की बैठक से अखिलेश की दूरी: सियासी दबाव या व्यस्तता?
दिल्ली में आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक का मुख्य एजेंडा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और चुनाव आयोग में मतदाता सूची संशोधन (SIR) विवाद को लेकर लामबंदी करना था। इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिलेश यादव के व्यक्तिगत रूप से शामिल न होने पर राजनीतिक हलकों में सवाल उठ खड़े हुए। हालांकि, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सफाई देते हुए कहा कि अखिलेश यादव से कांग्रेस अध्यक्ष और उनकी व्यक्तिगत बातचीत हुई है और राज्यसभा नामांकन की व्यस्तताओं के चलते वे उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस की सीट शेयरिंग दबाव की रणनीति का जवाब मान रहे हैं।

2. राजेंद्र पाल गौतम का 150+ सीटों वाला दावा और 2 विधायकों का गणित
विवाद की मुख्य वजह यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का वह बयान बना जिसमें उन्होंने कहा कि अक्टूबर में सीट शेयरिंग पर बातचीत पूरी कर ली जाएगी और कांग्रेस 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है और गठबंधन में 'बराबर की हिस्सेदारी' चाहती है।

सपा की आपत्ति: राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि जिस कांग्रेस के पास मौजूदा विधानसभा में केवल 2 विधायक हैं और जो पिछले 37 वर्षों से राज्य की सत्ता से बाहर है, वह 150+ सीटों की मांग किस आधार पर कर रही है?

2024 का स्ट्राइक रेट: 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 63 में से 37 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 17 में से 6 सीटों पर सफलता मिली थी। सपा का तर्क है कि गठबंधन का आधार जीत की संभावना होना चाहिए, न कि मनमाना संख्याबल।

3. इमरान मसूद बनाम इकरा हसन: जुबानी जंग
सीटों के दावों के साथ-साथ नेताओं की निजी बयानबाजी ने भी गठबंधन में खटास बढ़ाई है:

इमरान मसूद (कांग्रेस सांसद): सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अखिलेश यादव की सक्रियता पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के बिना कोई माहौल नहीं बन सकता। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि ममता बनर्जी जैसी जुझारू नेता के सड़क पर लड़ने के बावजूद पश्चिम बंगाल में क्या हुआ, भाजपा से लड़ने का वास्तविक माद्दा सिर्फ राहुल गांधी में है।

इकरा हसन (सपा सांसद): कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने पलटवार करते हुए इमरान मसूद के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को केवल अखिलेश यादव ही हरा सकते हैं और कांग्रेस अपने दम पर कुछ नहीं कर पाएगी।

4. भाजपा का तीखा तंज: 'सांपनाथ, नागनाथ और कालिया नाग'
विपक्षी गठबंधन की इस तनातनी पर चुटकी लेते हुए भाजपा नेताओं ने कड़ा प्रहार किया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "सपा सांपनाथ, बसपा नागनाथ और कांग्रेस कालिया नाग है। ये तीनों पार्टियां साथ मिलकर लड़ें या अलग-अलग, 2027 में तीसरी बार भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनना तय है।"

निष्कर्ष: द फ़ेडरल देश की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि ठीक एक साल पहले बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और राजद के बीच सीटों को लेकर इसी तरह की खींचतान और 'फ्रेंडली फाइट्स' देखने को मिली थीं, जिसका खामियाजा पूरे गठबंधन को भुगतना पड़ा था। अब यदि अखिलेश यादव और राहुल गांधी की व्यक्तिगत जुगलबंदी के बावजूद दोनों दल समय रहते सीट शेयरिंग का विवाद नहीं सुलझाते, तो 2027 में यूपी की राह विपक्षी दलों के लिए और अधिक कठिन हो सकती है।


Read More
Next Story