अमेरिका ने पास किया रूस प्रतिबंध बिल, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा
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अमेरिका ने पास किया रूस प्रतिबंध बिल, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस-ईरान प्रतिबंधों से जुड़ा बिल पास कर दिया है, जो राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है। भारत के लिए खतरा इसलिए अहम है क्योंकि वह रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता है और अमेरिका उसका प्रमुख निर्यात बाजार है।


अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक अहम विधेयक पास कर दिया है। इस कानून के जरिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की ताकत मिल जाएगी, जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। कानून में रूस से सीधे आने वाले सामान पर 500 फीसदी तक शुल्क बढ़ाने का प्रावधान भी है।

शुरुआत कहां से हुई?
इस पूरे मामले की शुरुआत रूस-यूक्रेन युद्ध और रूस की ऊर्जा बिक्री पर अमेरिकी दबाव से हुई। अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल और गैस की कमाई उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक आधार देती है। इसी वजह से वॉशिंगटन अब सिर्फ रूस पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उन देशों पर भी दबाव बढ़ा रहा है जो रूसी ऊर्जा खरीद रहे हैं।

इसी उद्देश्य से अमेरिकी सीनेट में Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 लाया गया। यह बिल दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है और इसमें रूस के ऊर्जा तथा रक्षा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंधों के साथ-साथ उसकी तथाकथित 'शैडो फ्लीट' पर कार्रवाई का प्रावधान भी है। यह वे जहाज हैं जिनके जरिए रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचते हुए तेल की आवाजाही जारी रखने का आरोप है।

सीनेट से हरी झंडी
अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने इस बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दी। 7 अगस्त को हुए मतदान में बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े। इसके बाद असली नजर प्रतिनिधि सभा पर थी, क्योंकि कानून बनने के लिए वहां से भी मंजूरी जरूरी थी।

फिर क्या हुआ?
16 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने आखिरकार बिल को 262-159 वोटों से पारित कर दिया। इसके पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने वोट किया।

भारत पर सीधा असर क्या होगा?
भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग एक-तिहाई था।

अगर अमेरिका भारत पर ऊंचा टैरिफ लगाता है, तो इसका पहला बड़ा असर अमेरिका को निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा होगा और इससे कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और दूसरे निर्यात क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

दूसरा असर भारत की ऊर्जा नीति पर पड़ सकता है। अगर रूस से सस्ता तेल खरीदने पर अमेरिकी दबाव बढ़ता है, तो भारत को रूस से तेल खरीदने और दूसरे स्रोतों से महंगा तेल लेने के बीच संतुलन बनाना होगा। इसका असर रिफाइनिंग लागत, आयात बिल और व्यापक तौर पर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अब आगे क्या?
अब अगला चरण राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर का है। इसके बाद कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत अमेरिकी प्रशासन यह तय कर सकता है कि किन देशों पर और कितनी दर से टैरिफ लगाया जाए। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि वॉशिंगटन इस शक्ति का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता है या दोनों देशों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है।

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