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अमेरिका-ईरान जंग से भड़का कच्चा तेल, भारत को अमेरिका की 100% टैरिफ की धमकी

'द फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार का बड़ा विश्लेषण; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी से हड़कंप, रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा।


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Siyasat: पश्चिम एशिया में जारी भीषण भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सीधी जंग छिड़ गई है। इस नए युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी का जोरदार उछाल आया है और दाम 85 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचे हैं। जून 2026 में दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर समझौता एक महीना भी नहीं टिक सका। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर वर्चस्व की इस जंग में भारत के सामने दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है। एक तरफ कच्चे तेल की आपूर्ति ठप होने का संकट है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने रूस से भारत के कच्चा तेल खरीदने पर 100% टैरिफ लगाने की सीधी धमकी दे डाली है। आज 'सियासत' में बात इसी गंभीर मुद्दे को आपके सामने पेश 'द फ़ेडरल देश' पर मनीष कुमार की रिपोर्ट।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ठप, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट
अमेरिका द्वारा ईरान के ठिकानों पर की जा रही बमबारी और ईरान द्वारा खाड़ी में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किए जा रहे पलटवार के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो चुकी है। इस रूट से न तो कच्चा तेल गुजर पा रहा है और न ही एलएनजी (LNG) व एलपीजी (LPG) की सप्लाय हो पा रही है। इस बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर फतिह बिरोल ने बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर यह नाकेबंदी कुछ हफ्ते और जारी रही, तो पूरी दुनिया में अभूतपूर्व आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा। इसकी एक झलक फरवरी में भी दिख चुकी है जब तेल 120 डॉलर के पार चला गया था। बिरोल के मुताबिक, इसका सबसे गंभीर असर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

रूसी तेल पर अमेरिकी चक्रव्यूह में फंसा भारत
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जिस रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है, अब उस पर भी अमेरिका ने घेराबंदी तेज कर दी है। अमेरिकी संसद में एक ऐसा बिल पेश किया गया है, जिसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों का समर्थन हासिल है। इस बिल के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों से अमेरिका में आने वाले सामान (Goods) पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी है। अमेरिका का तर्क है कि वह इसके जरिए यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की तेल से होने वाली कमाई को रोकना चाहता है। लेकिन इसकी सीधी और भारी मार भारत पर पड़ने जा रही है।

भारतीय एक्सपोर्टर्स और अर्थव्यवस्था को लगेगा बड़ा झटका
आंकड़ों पर नजर डालें तो जून 2026 में भारत ने रूस से हर दिन रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है, जो भारत के कुल तेल आयात का 52.4% यानी आधे से भी ज्यादा है। मई के मुकाबले जून में रूसी तेल के आयात में 40 फीसदी का भारी उछाल आया था। ऐसे में यदि अमेरिका 100% टैरिफ का नियम लागू करता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान दोगुने महंगे हो जाएंगे। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, जहां भारत सालाना करीब 86 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करता है। टैक्स दोगुना होने से वहां भारतीय सामानों की डिमांड घटेगी, जिससे देश में एक्सपोर्टर्स प्रभावित होंगे, रोजगार संकट पैदा होगा और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हो सकता है।

ट्रम्प प्रशासन की दोहरी नीति और कूटनीतिक परीक्षा
इस पूरे मामले में अमेरिका भारत के साथ लगातार आंख मिचोली का खेल खेलता आ रहा है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन रूसी तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ पूर्व में उसने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भारत को पिछले दरवाजे से छूट भी दे रखी थी क्योंकि अमेरिका जानता है कि भारतीय रिफाइनरियों के जरिए रूसी तेल का वैश्विक बाजार में पहुंचना पूरी दुनिया के हित में है। लेकिन अब बदले हुए युद्ध के हालातों में अमेरिका का यह सख्त रुख भारतीय कूटनीति और अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा लेने जा रहा है।


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