राजधानी में कब सुरक्षित होंगी बेटियां? सितंबर में 5 मामलों के बाद भड़का आक्रोश, CM के इस्तीफे की मांग
दिल्ली में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर संसद भवन और प्रेस क्लब के पास महिलाओं ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन सौंपने राष्ट्रपति भवन जा रहीं प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर से गर्मा गया है। दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और यौन उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर संसद भवन के सामने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास कई महिला संगठनों और नागरिकों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन की चुप्पी पर कड़ा आक्रोश जताया। 'द फेडरल देश' के प्रमुख शो 'सियासत' में राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और इस ताजा जन-आक्रोश पर एक विस्तृत रिपोर्ट और विश्लेषण पेश किया गया है।
राष्ट्रपति भवन मार्च की कोशिश, पुलिस ने लिया हिरासत में
प्रदर्शनकारी महिलाएं और अधिकार कार्यकर्ता संसद भवन के करीब प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पर जमा हुईं। वे हाथों में बैनर लेकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नारेबाज़ी कर रही थीं। प्रदर्शनकारियों की योजना राष्ट्रपति भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की थी, ताकि वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर उन्हें दिल्ली की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और महिलाओं की असुरक्षा को लेकर एक ज्ञापन सौंप सकें।
हालांकि, मार्च शुरू होते ही दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। जब महिलाओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर ले गई। हिरासत में लिए जाने के दौरान भी महिलाओं का विरोध कम नहीं हुआ और वे पुलिस की गाड़ियों के भीतर से भी आवाज़ उठाती रहीं।
केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला
शो 'सियासत' में इस विरोध प्रदर्शन के राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को रेखांकित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि राजधानी में महिलाएं आज भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि अकेले सितंबर महीने में ही नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न और यौन हिंसा की कम से कम पांच गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
"आखिर कब तक बेटियां शिकार होती रहेंगी?"
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और राज्य प्रशासन से सीधे और तीखे सवाल पूछे:
सितंबर में सामने आईं यौन उत्पीड़न की 5 घटनाओं पर प्रशासन ने अब तक क्या सख्त कदम उठाए हैं?
दिल्ली की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को बेटियों के लिए सुरक्षित बनाने का ठोस रोडमैप क्या है?
अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
'सियासत' की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा का मामला सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि एक बड़ा प्रशासनिक संकट बनता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि भले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया हो, लेकिन बेटियों के हक और सुरक्षा के लिए यह आवाज़ रुकने वाली नहीं है।

