
अन्नामलाई का नया आंदोलन; 'विजय की लोकप्रियता के आगे टिकना मुश्किल'
सीनियर पत्रकार रंगाराज का कहना है कि अन्नामलाई की शुरुआत कन्फ्यूजिंग लगती है और इस बात को लेकर स्पष्टता की कमी है कि तमिलनाडु में उनका असल राजनीतिक रुख क्या होगा।
Annamalai's New Political Journey: तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई द्वारा हाल ही में भाजपा से इस्तीफा देकर नए राजनीतिक मोर्चे के एलान के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई के इस नए कदम का तमिलनाडु की जमीन पर बेहद सीमित असर देखने को मिलेगा.
वरिष्ठ पत्रकार रंगराज ने 'द फेडरल' से खास बातचीत में इस नए घटनाक्रम का विश्लेषण करते हुए बताया कि राज्य में बदलाव चाहने वाले और विशेष रूप से 40 साल से कम उम्र के युवा वोटर्स के एक बहुत बड़े हिस्से पर अभिनेता से मुख्यमंत्री बने जोसफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कड़गम' (TVK) पहले ही कब्जा जमा चुकी है. ऐसे में अन्नामलाई के लिए नए मोर्चे के जरिए युवाओं के बीच जगह बनाना एक बेहद कठिन चुनौती होगी.
क्या बीजेपी के ही इशारे पर स्वतंत्र राह पर निकले अन्नामलाई? राजनीति के भीतर चल रही यह थ्योरी
पत्रकार रंगराज के मुताबिक, सियासी गलियारों में एक दिलचस्प थ्योरी पर भी चर्चा हो रही है कि कहीं अन्नामलाई का यह कदम पूरी तरह स्वतंत्र न होकर खुद बीजेपी की ही एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा तो नहीं है?
वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश: माना जा रहा है कि बीजेपी अपनी मौजूदा विचारधारा के साथ दो दशकों से अधिक समय से तमिलनाडु में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है. ऐसे में संभव है कि बीजेपी ने खुद अन्नामलाई को एक अलग मंच बनाने के लिए प्रोत्साहित किया हो, ताकि वे उन युवा मतदाताओं को आकर्षित कर सकें जिन्हें पार्टी सीधे तौर पर नहीं जोड़ पा रही थी.
TVK को कमजोर करने का प्लान: इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अन्नामलाई के जरिए युवाओं को रिझाकर जोसफ विजय की TVK के मजबूत होते वोट बैंक में सेंध लगाना हो सकता है.
विचारधारा का भ्रम: हालांकि, अन्नामलाई के इस नए मोर्चे में अभी वैचारिक स्पष्टता की भारी कमी दिख रही है. यदि वे बीजेपी की लाइन पर चलते हैं तो उन्हें नुकसान होगा, और यदि वे द्रविड़ियन फ्रेमवर्क अपनाते हैं तो उस स्पेस में पहले से ही कई मजबूत दल मौजूद हैं.
18 महीने से चल रहा था हाईकमान से विवाद; AIADMK से गठबंधन के चलते कैंपेन में भी थे सुस्त
अन्नामलाई ने दावा किया है कि वे पिछले 18 महीनों से बीजेपी छोड़ने पर विचार कर रहे थे. इस पर रोशनी डालते हुए रंगराज ने बताया कि जब अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्ट कहा था कि बीजेपी को DMK या AIADMK के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए और अपने दम पर सत्ता में आने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखना चाहिए.
इसके विपरीत, केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए AIADMK के साथ अल्पकालिक (Short-term) गठबंधन को प्राथमिकता दी. इसी वजह से अन्नामलाई आलाकमान की रणनीति के खिलाफ थे. साल 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी वे पहले जैसे ऊर्जावान नजर नहीं आ रहे थे और कई महत्वपूर्ण बैठकों से गायब रहे, क्योंकि वे सार्वजनिक मंचों से एडप्पादी के. पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे.
वोट शेयर का बढ़ा हुआ आंकड़ा महज एक 'मिथक'
अन्नामलाई के कार्यकाल में बीजेपी का वोट शेयर डबल डिजिट पार करने के दावों को पत्रकार रंगराज ने पूरी तरह एक 'मिथक' करार दिया है. उनके विश्लेषण के अनुसार, AIADMK के साथ रहते हुए बीजेपी ने बेहद कम सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि बाद में उसने तीन से चार गुना अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे.
अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों द्वारा भी 'कमल' के सिंबल पर चुनाव लड़ने के कारण ही कुल वोट शेयर बड़ा दिखाई दे रहा है. यदि सहयोगी दलों के वोटों को हटा दिया जाए, तो बीजेपी का वास्तविक वोट शेयर आज भी केवल 9 प्रतिशत के आसपास ही ठहरता है. साफ है कि हालिया विधानसभा चुनाव ने तमिलनाडु में बीजेपी की जमीनी सीमाओं को पूरी तरह उजागर कर दिया है और अब अन्नामलाई के सामने अपने नए संगठन के अस्तित्व को स्थायी बनाए रखने की एक बड़ी लड़ाई सामने है.
(ऊपर दिया गया कंटेंट एक फाइन-ट्यून्ड AI मॉडल का इस्तेमाल करके वीडियो से ट्रांसक्राइब किया गया है। एक्यूरेसी, क्वालिटी और एडिटोरियल इंटीग्रिटी पक्का करने के लिए, हम ह्यूमन-इन-द-लूप (HITL) प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं। AI शुरुआती ड्राफ्ट बनाने में मदद करता है, जबकि हमारी अनुभवी एडिटोरियल टीम पब्लिकेशन से पहले कंटेंट को ध्यान से रिव्यू, एडिट और बेहतर बनाती है। द फेडरल में, हम भरोसेमंद और इनसाइटफुल जर्नलिज़्म देने के लिए AI की एफिशिएंसी को ह्यूमन एडिटर्स की एक्सपर्टीज़ के साथ मिलाते हैं।)
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