
तमिलनाडु में CM विजय का बड़ा एक्शन; 717 शराब की दुकानें स्थायी बंद
TVK सरकार ने तोड़ा 'टासमैक' का सिंडिकेट; सालाना ₹3,600 करोड़ का घोटाला रोकने का दावा। स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास की दुकानें बंद; हाई कोर्ट ने सराहा।
CM Vijay on TASMAC: तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की सरकार ने राज्य के सरकारी शराब खुदरा नेटवर्क 'टासमैक' के खिलाफ एक बड़ा और बेहद आक्रामक सुधार अभियान शुरू कर दिया है। शुक्रवार, 5 जून को सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूरे राज्य में 717 शराब की दुकानों को स्थायी रूप से बंद करने की पुष्टि कर दी है। तमिलनाडु वेत्रि कड़गम सरकार के गठन के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी और पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई है।
शराब की दुकानों को बंद करने के साथ ही, विजय प्रशासन ने 'टासमैक' के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार पर बड़ा वित्तीय क्रैकडाउन किया है। मुख्यमंत्री ने हर महीने लगभग 102 करोड़ रुपये (5 वर्षों में 1,600 करोड़ रुपये) के 'पार्टी फंड' डाइवर्जन और लीकेज को रोकने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि शराब से होने वाली राजस्व की एक-एक पाई पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए।
सालाना ₹3,600 करोड़ के 'कमीशन और बोतल डिपॉजिट घोटाले' का पर्दाफाश
मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क मंत्री के. विग्नेश ने मीडिया के सामने 'टासमैक' के भीतर चल रहे दो बड़े घोटालों का पूरा ब्यौरा पेश किया, जिसे सरकार ने आधिकारिक आदेश जारी कर पूरी तरह बंद कर दिया है:
खरीद घोटाला: सालों से शराब की खरीद के दौरान प्रति शराब केस 90 रुपये, प्रति बीयर कार्टन 40 रुपये और प्रति वाइन कार्टन 20 रुपये का कमीशन अवैध रूप से राजनीतिक रसूख वाले लोगों को डायवर्ट किया जा रहा था। सालाना करीब 88 लाख शराब के मामलों की खरीद में यह खेल चल रहा था, जिसे मुख्यमंत्री विजय ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
बोतल बिक्री घोटाला: मंत्री ने बताया कि पिछले 4 सालों से ग्राहकों से प्रति बोतल 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे थे। साल 2021-22 में रोजाना करीब 1 करोड़ बोतलें बेची जाती थीं, यानी हर दिन 10 करोड़ रुपये, हर महीने 300 करोड़ रुपये और सालाना 3,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त अवैध वसूली कर सिंडिकेट को जा रही थी, जबकि कर्मचारियों को इसका बेहद छोटा हिस्सा मिलता था।
सरकार ने एलान किया है कि जून के अंत तक एमआरपी (MRP) से एक भी रुपया अधिक वसूलने की प्रथा को राज्य से पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, तमाम चर्चाओं के विपरीत सरकार ने टासमैक के निजीकरण की किसी भी योजना से साफ इनकार किया है।
स्कूलों और मंदिरों के पास से हटीं दुकानें; मद्रास हाई कोर्ट ने फैसले को सराहा
बंद की गई 717 दुकानें कुल 4,765 आउटलेट्स का लगभग 15 प्रतिशत हैं। इन दुकानों को विशेष रूप से स्कूलों, धार्मिक स्थलों और बस टर्मिनस के 500 मीटर के दायरे से हटाया गया है।
क्षेत्रीय और जोन-वार बंद की गई दुकानें:
धार्मिक और शैक्षणिक स्थल: मंदिरों व चर्चों के पास से 276 दुकानें, शिक्षण संस्थानों के पास से 186 दुकानें और परिवहन केंद्रों के आसपास से 255 दुकानें बंद की गईं.
क्षेत्रीय आंकड़े: दुकानों को बंद करने के मामले में मदुरै 290 बंदियों के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद कोयंबटूर (179), तिरुचि (84), चेन्नई (82) और सलेम (82) का नंबर आता है.
इस बड़े फैसले के कारण सरकार को सालाना 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा, लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने राजस्व की भरपाई के लिए दुकानों को दोबारा खोलने या शराब की कीमतें बढ़ाने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। विपक्ष ने भले ही इस कदम को वित्तीय रूप से लापरवाही भरा बताया हो, लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार के इस कदम को एक "बेहद अच्छा फैसला" बताते हुए इसकी सराहना की है।
बायोमेट्रिक और ID चेक अनिवार्य; 21+ की उम्र सीमा पर कड़ाई
इस क्रांतिकारी सुधार के तहत अब काउंटर पर शराब खरीदने वालों के लिए 21 वर्ष से अधिक की सख्त उम्र सीमा लागू कर दी गई है। अब हर काउंटर पर बायोमेट्रिक और आईडी चेक अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई कर्मचारी कम उम्र के व्यक्ति को शराब बेचते हुए या तय कीमत से अधिक पैसे वसूलते हुए पकड़ा गया, तो उसे सीधे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। सीएम विजय ने इसे राजस्व के बजाय लोक कल्याण का कदम बताते हुए एक नशामुक्त तमिलनाडु बनाने का संकल्प दोहराया है.
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