
UDF कैबिनेट पर अंधविश्वास का साया: किसी भी मंत्री ने नहीं चुनी 13 की कार
केरल की नई यूडीएफ (UDF) सरकार में मंत्रियों ने अंधविश्वास के चलते 13 नंबर की आधिकारिक गाड़ी लेने से किया इनकार, जबकि पिछली एलडीएफ सरकार में मंत्रियों ने इस अन्धविश्वास को दी थी चुनौती।
Kerala Government And Superstition: केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सत्ता में वापसी के साथ ही मंत्रियों के बीच '13 नंबर' की गाड़ी का पुराना खौफ एक बार फिर लौट आया है। राज्य में सोमवार (18 मई) को नई यूडीएफ कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह के बाद जब मंत्रियों को सरकारी गाड़ियां आवंटित की जा रही थीं, तो किसी भी मंत्री ने '13 नंबर' की आधिकारिक कार लेने की हिम्मत नहीं दिखाई। केरल को देश के सबसे प्रगतिशील और साक्षर राज्यों में गिना जाता है, लेकिन इसके बावजूद नई सरकार के मंत्रियों पर अंधविश्वास और डर इस कदर हावी दिखा कि पर्यटन विभाग के प्रस्ताव के बाद भी यह गाड़ी खाली रह गई।
नेताओं द्वारा गाड़ी न चुने जाने के बाद पर्यटन विभाग ने इस वाहन को फिलहाल अलग खड़ा कर दिया है।
मंत्रियों ने चुनी अपनी पसंद की गाड़ियां, 13 नंबर को सबने किया दरकिनार
शपथ ग्रहण के बाद जब मंत्रियों से उनके आधिकारिक वाहनों के नंबर चुनने के लिए कहा गया, तो सभी ने चुपचाप 13 नंबर को छोड़ दिया। इसके बजाय मंत्रियों ने अपनी पसंद के अन्य नंबर मांगे:
शिबू बेबी जॉन: इन्होंने अपनी गाड़ी के लिए खास तौर पर 51 नंबर की मांग की।
ओजे जनीश: इन्होंने 10 नंबर की कार को अपनी पसंद बताया।
रमेश चेन्निथला: वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने 9 नंबर की गाड़ी चुनी।
यह पहली बार नहीं है जब यूडीएफ के मंत्रियों में 13 नंबर का यह खौफ देखा गया है। इससे पहले साल 2011 से 2016 के बीच रही ओम्मन चांडी सरकार के दौरान भी किसी भी मंत्री ने 13 नंबर की सरकारी कार का इस्तेमाल नहीं किया था।
जब वामपंथी मंत्रियों ने अंधविश्वास को दी थी चुनौती
यूडीएफ मंत्रियों के इस डर के विपरीत, केरल की पिछली वामपंथी (LDF) सरकारों में मंत्रियों ने इस रूढ़िवादी सोच को खुलकर चुनौती दी थी।
थॉमस आइजैक का साहसिक कदम: साल 2016 में पिनाराई विजयन की पहली सरकार (2016-2021) के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने खुद आगे बढ़कर 13 नंबर की गाड़ी ली थी। दरअसल, तब भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने कम्युनिस्ट नेताओं पर तंज कसा था कि 'भगवान के नाम पर शपथ न लेने वाले तर्कवादी नेता 13 नंबर की गाड़ी छूने से डर रहे हैं।' इस चुनौती को स्वीकार करते हुए आइजैक ने न सिर्फ 13 नंबर की गाड़ी चुनी, बल्कि वह 'मनमोहन बंगले' में भी रहे, जिसे राजनीति में अपशकुन माना जाता था।
एमए बेबी और पी प्रसाद: इससे पहले 2006 में वीएस अच्युतानंदन सरकार के शिक्षा मंत्री एमए बेबी ने भी 13 नंबर की कार चलाई थी। वहीं, हालिया पिनाराई विजयन सरकार 2.0 (2021-2026) में पूर्व कृषि मंत्री पी प्रसाद इस गाड़ी का इस्तेमाल करने वाले आखिरी मंत्री थे।
भारतीय नहीं, पश्चिमी सभ्यता का अंधविश्वास है '13 नंबर'
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय या हिंदू परंपराओं में 13 नंबर को कभी भी अशुभ या अपशकुन नहीं माना गया है। 13 नंबर को अशुभ मानने की धारणा पूरी तरह से पश्चिमी अंधविश्वास (जिसे Triskaidekaphobia कहा जाता है) से आई है। यह मान्यता ईसाई और नॉर्स पौराणिक कथाओं से जुड़ी है, जो वैश्विक मीडिया और पश्चिमी सांस्कृतिक प्रभाव के कारण बहुत बाद में भारत पहुंची और अब भारतीय राजनेताओं के सिर चढ़कर बोल रही है।
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