विजय ने दिल्ली में मोदी से की मुलाक़ात, तमिलनाडु की अहम माँगें उठाईं
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विजय ने दिल्ली में मोदी से की मुलाक़ात, तमिलनाडु की अहम माँगें उठाईं

विजय ने कर्नाटक के मेकेदातु बांध परियोजना का विरोध करते हुए एक ज्ञापन सौंपा; साथ ही, उन्होंने राज्य के कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज़थु' को सर्वोच्च दर्जा देने और तमिलनाडु के मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।


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CM Joseph Vijay Meet PM Modi: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बुधवार 27 मई को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। 10 मई को पदभार संभालने के कुछ हफ़्तों बाद यह उनकी दिल्ली की पहली अहम यात्रा थी। इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही थीं। यह बैठक उम्मीद के विपरीत केवल 10 मिनट तक ही चल सकी। जबकि जानकारों को कम से कम 30 से 40 मिनट की विस्तृत चर्चा की उम्मीद थी। इस संक्षिप्त बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने पीएम को एक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें तमिलनाडु के लिए अधिक वित्तीय सहायता और विकास परियोजनाओं के लिए त्वरित मंजूरी की मांग की गई है। दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार निरंजन ने कहा कि बैठक इतनी जल्दी खत्म होने के पीछे का कारण अभी साफ नहीं है। पीएम मोदी की हालिया अन्य मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकें काफी लंबी रही थीं। अब इस छोटी बैठक को लेकर केंद्र और राज्य के बीच संभावित तनाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं।


बैठक की अवधि पर उठ रहे बड़े सवाल
वरिष्ठ पत्रकार थारसु श्याम ने कहा कि औपचारिक शिष्टाचार में ही 20 मिनट लग जाते हैं। उन्होंने माना कि यह बैठक सीएम विजय के पक्ष में नहीं रही होगी। ऐसा लगता है कि पीएम के साथ कोई सार्थक चर्चा नहीं हो पाई है। विजय ने शपथ लेने के 17 दिन बाद दिल्ली आने का फैसला लिया था। 2017 में पलानीस्वामी ने 6 दिन और 2021 में स्टालिन ने 42 दिन बाद पीएम से भेंट की थी। यह तुलना बताती है कि विजय की यात्रा की टाइमिंग भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वैचारिक मतभेद और सियासी समीकरण
चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने भाजपा को अपना वैचारिक प्रतिद्वंद्वी बताया था। उन्होंने भाजपा की हिंदुत्व राजनीति और डीएमके के साथ कथित समझदारी की कड़ी आलोचना की थी। विजय के कैबिनेट में कई कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी ने केंद्र के साथ समीकरणों को और जटिल बना दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बैठक सीएम विजय के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा थी। अब देखना होगा कि वह राज्य की मांग और अपनी विचारधारा के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। यह बैठक तमिलनाडु के हक और केंद्र की नीतियों के बीच का एक नया टेस्ट है।

मेमोरेंडम के पांच अहम बिंदु
सीएम विजय ने पीएम को जो ज्ञापन सौंपा है, उसमें पांच प्रमुख बातें शामिल हैं:

नीदरलैंड से ऐतिहासिक अनाईमंगलम तांबा प्लेटों की वापसी के लिए पीएम का आभार जताया।

राज्य गीत 'तमिल थाई वाज़ुथु' को सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानजनक स्थान देने की मांग की।

डीआरडीओ के सहयोग से राज्य में एयरबोर्न सिस्टम सेंटर और विमान डिजाइन केंद्र बनाने का आग्रह किया।

कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की है।

श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी पर चिंता जताकर तत्काल हस्तक्षेप मांगा है।

पुरानी तस्वीरों की चर्चा
यह पहली बार नहीं था जब ये दोनों नेता एक-दूसरे से मिले थे। अप्रैल 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी गुजरात के सीएम थे। उस समय उन्होंने कोयंबटूर में एक अभिनेता के तौर पर विजय से मुलाकात की थी। उन तस्वीरों के दोबारा वायरल होने से लोगों को उनके बदले हुए राजनीतिक कद का अहसास हो रहा है।

आगे की महत्वपूर्ण मुलाकातें
दिल्ली दौरे के दौरान सीएम विजय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी भेंट करेंगे। इसके अलावा उनकी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलने की भी योजना है। साथ ही वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी भेंट करेंगे। यह दौरा आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। तमिलनाडु की जनता की नजरें अब केंद्र से मिलने वाले उन फंड्स पर टिकी हैं, जिनका जिक्र ज्ञापन में हुआ है।


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