Vijay's Oath Tamil Anthem Controversy : तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के साथ ही एक बड़ा भाषाई और सांस्कृतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री जोसेफ सी विजय के रविवार (10 मई) को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्य की दशकों पुरानी परंपरा को दरकिनार कर दिया गया। समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्य गान 'तमिल थाई वाजथु' को 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' के बाद तीसरे स्थान पर बजाया गया। आमतौर पर राज्य में किसी भी सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत इसी गान से होती है और समापन राष्ट्रगान से होता है। इस बदलाव ने न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के सहयोगी दलों को भी नाराज कर दिया है। स्थिति को संभालते हुए नवनियुक्त मंत्री आधव अर्जुना ने सोशल मीडिया पर एक लंबी सफाई पेश की है। उन्होंने इस पूरी घटना के लिए राज्यपाल की टीम को जिम्मेदार ठहराया है।
राज्यपाल की टीम पर फोड़ा ठीकरा
मंत्री आधव अर्जुना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि चूंकि शपथ ग्रहण समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर कर रहे थे, इसलिए कार्यक्रम का पूरा खाका राजभवन की टीम ने ही तैयार किया था। उन्होंने बताया कि जब टीवीके (TVK) की तरफ से इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई, तो राज्यपाल की टीम ने केंद्र सरकार के एक नए सर्कुलर का हवाला दिया। इसी 'अनिवार्य' स्थिति के कारण राज्य गान को तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया। आधव ने कहा कि 'नीरारुम कदालुदुथा' गान की अपनी एक ऐतिहासिक अहमियत है और सरकार इसकी गरिमा समझती है।
परंपरा की बहाली का भरोसा
मंत्री अर्जुना ने जनता को विश्वास दिलाया है कि मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार स्थापित परंपराओं का सम्मान करती है। उन्होंने वादा किया कि भविष्य में इस नई व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आने वाले सभी सरकारी कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाजथु' को फिर से पहले स्थान पर ही बजाया जाएगा। राष्ट्रगान हमेशा की तरह कार्यक्रम के अंत में ही होगा। उन्होंने साफ किया कि नई सरकार के मन में इस स्थापित प्रथा को लेकर कोई अलग राय नहीं है और इसे फिर से पुराने स्वरूप में लाया जाएगा।
सहयोगी दलों का कड़ा रुख
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब टीवीके को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों ने भी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। सीपीआई (CPI) के राज्य सचिव एम। वीरपांडियन ने इसकी निंदा करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि तमिल पहचान और राज्य गान के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि राज्य गान को हमेशा की तरह सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। वीरपांडियन ने चेतावनी दी कि ऐसी गलती भविष्य में कभी नहीं दोहराई जानी चाहिए।
प्रमुख नेताओं ने जताई आपत्ति
वीसीके (VCK) प्रमुख थोल थिरुमावलवन और पीएमके (PMK) के संस्थापक डॉ। एस। रामदास ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में आलोचना की है। रामदास ने एक बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी आधिकारिक समारोहों में 'तमिल थाई वाजथु' को उसका उचित और सर्वोच्च स्थान मिले। वहीं थिरुमावलवन ने इसे तमिल संस्कृति पर चोट बताया। तमिल अस्मिता के इस मुद्दे पर पूरी राजनीति अब गरमा गई है और सहयोगी दलों के तेवर काफी सख्त नजर आ रहे हैं।