अजीत अगरकर का बढ़ेगा कार्यकाल, सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर लटकी तलवार
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अजीत अगरकर का बढ़ेगा कार्यकाल, सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर लटकी तलवार

अजीत अगरकर 2027 तक बने रह सकते हैं चीफ सेलेक्टर। टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद खराब फॉर्म के कारण सूर्यकुमार यादव के भविष्य पर लटकी तलवार।


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Indian Cricket : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर पर अपना भरोसा बरकरार रखने का फैसला किया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में समाप्त हो रहे उनके अनुबंध को एक साल के लिए बढ़ाकर जून 2027 तक किया जा सकता है। यह फैसला टीम इंडिया की हालिया ऐतिहासिक सफलताओं को देखते हुए लिया गया है।


अगरकर का 'गोल्डन कार्यकाल': ट्राफियों की हैट्रिक
अजीत अगरकर के नेतृत्व वाली चयन समिति के दौरान भारतीय क्रिकेट ने सुनहरे दौर का अनुभव किया है। उनके कार्यकाल में टीम इंडिया ने आईसीसी टूर्नामेंट्स में दबदबा बनाया है:

टी20 वर्ल्ड कप 2024: विजेता

चैंपियंस ट्रॉफी 2025: विजेता

टी20 वर्ल्ड कप 2026: खिताब का सफल बचाव (विजेता)

वनडे वर्ल्ड कप 2023: उपविजेता

बीसीसीआई का मानना है कि 2027 के वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम की निरंतरता बनाए रखने के लिए अगरकर का पद पर बने रहना अनिवार्य है। बोर्ड के पदाधिकारी जल्द ही आईपीएल (IPL) के दौरान उनसे मिलकर इस पर आधिकारिक मुहर लगा सकते हैं।

सूर्या की कप्तानी हिट, लेकिन फॉर्म ने बढ़ाई टेंशन
एक ओर जहाँ टीम में अगरकर का कद बढ़ा है, वहीं टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। भले ही भारत ने उनकी कप्तानी में वर्ल्ड कप जीता हो, लेकिन बतौर बल्लेबाज उनका ग्राफ तेजी से गिरा है।

चिंता का विषय:

वर्ल्ड कप 2026 में फ्लॉप शो: दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के खिलाफ केवल 18-18 रन। सेमीफाइनल में 11 रन और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में शून्य (0) पर आउट।

स्ट्राइक रेट में गिरावट: साल 2025 में उनका स्ट्राइक रेट 120 के नीचे आ गया, जो उनकी पहचान (मिस्टर 360°) के बिल्कुल विपरीत है।

मिशन 2028: उम्र और युवाओं की चुनौती
मुख्य कोच गौतम गंभीर का कार्यकाल भी 2028 तक बढ़ाया जा सकता है और सूर्या उनकी पहली पसंद हैं। हालांकि, चयन समिति लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 और ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप को लेकर लंबी योजना बना रही है।

उम्र का दबाव: 2028 तक सूर्या की उम्र 38 साल होगी।

युवाओं का दबाव: वैभव सूर्यवंशी जैसे उभरते हुए युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

इंग्लैंड और आयरलैंड का आगामी दौरा सूर्यकुमार यादव के करियर के लिए 'करो या मरो' जैसा होगा। बीसीसीआई अब केवल कप्तानी नहीं, बल्कि उनके टीम में रहने पर भी प्रदर्शन के आधार पर ही फैसला लेगा।


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