IPL फाइनल अहमदाबाद शिफ्ट, RCB फैंस में BCCI के खिलाफ गुस्सा
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IPL फाइनल अहमदाबाद शिफ्ट, RCB फैंस में BCCI के खिलाफ गुस्सा

IPL 2026 फाइनल बेंगलुरु से अहमदाबाद शिफ्ट होने पर विवाद बढ़ गया है। जोसेफ हूवर ने BCCI पर RCB और कर्नाटक के साथ अन्याय का आरोप लगाया।


आईपीएल 2026 के फाइनल को बेंगलुरु से अहमदाबाद शिफ्ट करने के फैसले ने भारतीय क्रिकेट में नई बहस छेड़ दी है। वरिष्ठ क्रिकेट लेखक जोसेफ हूवर ने इस फैसले को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के प्रशंसकों और कर्नाटक क्रिकेट के साथ “गंभीर अन्याय” बताया है। उनका कहना है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मनमाने और अनुचित तरीके से फैसला लिया और टिकट विवाद का बहाना बनाकर अपनी मंशा छिपाने की कोशिश की।

विवाद तब शुरू हुआ जब आईपीएल 2025 की विजेता टीम RCB को परंपरा के अनुसार फाइनल की मेजबानी का अधिकार मिलने के बावजूद BCCI ने आईपीएल 2026 का फाइनल बेंगलुरु से हटाकर अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कराने का फैसला कर लिया। “अगर अहमदाबाद में फाइनल कराना था तो खुलकर कहते”। जोसेफ हूवर ने कहा कि अगर BCCI शुरुआत से ही अहमदाबाद में फाइनल कराना चाहता था, तो उसे सीधे तौर पर यह घोषणा करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) द्वारा अतिरिक्त टिकट मांगने का बहाना बनाना पूरी तरह गलत है।

उनके अनुसार, KSCA कर्नाटक के लोगों की संस्था है और वहां की जनता ने ही उसे बनाया है। उन्होंने कहा कि BCCI के अधिकारी यह कह रहे हैं कि चिन्नास्वामी स्टेडियम अतिरिक्त टिकट मांगों के कारण फाइनल की मेजबानी नहीं कर सकता, यह पूरी तरह “बकवास” है।हूवर ने आरोप लगाया कि BCCI के पास पूरी ताकत है और वह जो चाहे कर सकता है, इसलिए उसे बहाने बनाने के बजाय साफ-साफ कहना चाहिए था कि वह फाइनल अहमदाबाद में ही कराना चाहता है।

“बेंगलुरु को प्लेऑफ मैच भी नहीं मिला”

उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि बेंगलुरु को सिर्फ फाइनल ही नहीं बल्कि एक भी प्लेऑफ मुकाबला नहीं दिया गया। हूवर ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों बड़े क्रिकेट केंद्रों—जैसे ईडन गार्डन्स, वानखेड़े और चेपॉक—को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि धर्मशाला और न्यू चंडीगढ़ जैसे नए केंद्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम की क्षमता 1.30 लाख दर्शकों की होने का मतलब यह नहीं कि आईपीएल विजेता टीम के अधिकार छीन लिए जाएं। उन्होंने कहा कि RCB ने आईपीएल जीता था, इसलिए फाइनल कहां होगा, इसका फैसला उनकी प्राथमिकता के अनुसार होना चाहिए था।

टिकट विवाद पर उठाए सवाल

BCCI का कहना था कि KSCA ने अतिरिक्त 10,000 टिकटों की मांग की थी। इस पर हूवर ने कहा कि चिन्नास्वामी स्टेडियम की कुल क्षमता करीब 32,000 है, जिसमें से लगभग 2,000 टिकट फ्रेंचाइजी स्पॉन्सर्स को चले जाते हैं। यानी वास्तविक रूप से लगभग 30,000 टिकट बचते हैं। BCCI नियमों के अनुसार KSCA को 15 प्रतिशत टिकट मिलते हैं, जो करीब 4,500 होते हैं। ऐसे में यदि यह कहा जाए कि KSCA ने 10,000 अतिरिक्त टिकट मांगे, तो इसका मतलब होगा कि संघ 14,500 टिकट अपने पास रखना चाहता था, जो पूरी तरह अव्यावहारिक है।उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बयान देते समय BCCI अधिकारियों को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

“यह कर्नाटक और RCB फैंस के साथ अन्याय”

जोसेफ हूवर ने कहा कि BCCI ने सार्वजनिक रूप से KSCA को दोषी ठहराकर उसे असहज स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) इस तरह व्यवहार करते? उनका कहना था कि वहां संस्थाएं अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करती हैं और फैसले मनमर्जी से नहीं बदलतीं।

राजनीति और क्रिकेट का बढ़ता मेल

कर्नाटक के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को पास दिए जाने के विवाद पर हूवर ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। पिछले 18 वर्षों से चिन्नास्वामी स्टेडियम में आईपीएल मैचों के दौरान विधायकों और मंत्रियों को पास दिए जाते रहे हैं।उन्होंने कहा कि हर विधायक और एमएलसी को एक पास और मंत्रियों को दो पास मिलना हमेशा से परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में अचानक इसे मुद्दा बनाना राजनीतिक प्रतीत होता है। हूवर ने कहा कि भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस—सभी दल इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं, इसलिए अब केवल राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है।

अहमदाबाद को लगातार प्राथमिकता पर सवाल

आईपीएल 2026 का फाइनल अहमदाबाद में होने के साथ नरेंद्र मोदी स्टेडियम पिछले पांच वर्षों में चौथी बार आईपीएल फाइनल की मेजबानी करेगा। इस पर हूवर ने कहा कि जब तक मौजूदा लोग सत्ता में हैं, वे अपनी पसंद के अनुसार फैसले लेते रहेंगे।उन्होंने कहा कि क्रिकेट चुनावों और प्रशासन में शक्ति संतुलन किसके हाथ में है, यह सभी जानते हैं। ऐसे में कोई भी संघ खुलकर विरोध करने की स्थिति में नहीं है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब अहमदाबाद को लगातार बड़े मुकाबले दिए जा रहे हैं, तो मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे पारंपरिक क्रिकेट केंद्रों का क्या होगा?

“क्रिकेट प्रशासन में वोट बैंक की राजनीति”

हूवर ने KSCA को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जस्टिस लोढ़ा समिति सुधारों के दौरान यह सुझाव दिया गया था कि केवल क्रिकेट क्लबों को मतदान का अधिकार मिले। लेकिन KSCA अधिकारियों ने सत्ता बनाए रखने के लिए खेल केंद्रों और अन्य समूहों को भी वोटिंग अधिकार दे दिए ताकि उनका वोट बैंक मजबूत रहे।

अब वही समूह टिकट और पास की मांग करते हैं। हूवर के अनुसार, अगर केवल वास्तविक क्रिकेट क्लबों को वोटिंग अधिकार दिए गए होते, तो यह समस्या शायद पैदा ही नहीं होती।उन्होंने कहा कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर अनिल कुंबले और जवागल श्रीनाथ ने स्थिति सुधारने की कोशिश की थी, लेकिन इस संस्कृति से परेशान होकर वे भी अलग हो गए।

“BCCI को पारदर्शी होना चाहिए”

हूवर ने सुझाव दिया कि BCCI को यह नियम लागू करना चाहिए कि केवल क्रिकेट क्लबों को ही वोटिंग अधिकार मिलें, जैसा कि तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन में है।उनका मानना है कि इससे गैर-क्रिकेट समूहों को टिकट बांटने का दबाव कम होगा और क्रिकेट प्रशासन अधिक पेशेवर बनेगा।अंत में उन्होंने कहा कि आईपीएल भले ही दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर टी20 लीगों में से एक हो, लेकिन BCCI को अपने फैसलों में पारदर्शिता रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर BCCI हर साल फाइनल अहमदाबाद में ही कराना चाहता है, तो उसे खुलकर यह बात कहनी चाहिए, दूसरों को दोष नहीं देना चाहिए।”

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