उद्धव गुट के 6 बागी सांसद बनाएंगे अलग गुट संजय जाधव होंगे नए नेता!
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उद्धव गुट के 6 बागी सांसद बनाएंगे अलग गुट संजय जाधव होंगे नए नेता!

शिवसेना उबाठा के 9 में से 6 सांसदों के बैठक में न आने से बगावत साफ हो गई है। संजय जाधव नए संसदीय दल के नेता बन सकते हैं। सांसदों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


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Shivsena UBT Crisis: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर आ रही है, जिसने उद्धव ठाकरे के 'मातोश्री' साम्राज्य की बुनियाद हिला दी है। शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसद अब संसद में उद्धव का साथ पूरी तरह छोड़कर अपना एक बिल्कुल नया और स्वतंत्र 'संसदीय गुट' बनाने जा रहे हैं। दिल्ली के पावर कॉरिडोर में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, परभणी के कद्दावर सांसद संजय जाधव को इस नए गुट का कमान सौंपकर लोकसभा में नया नेता बनाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने इन बागियों से फोन पर सीक्रेट डील फाइनल की है, जिसमें सांसदों का दर्द छलक उठा कि 'साल भर से मातोश्री में हमारी उपेक्षा हो रही थी, हमारी सुनने वाला कोई नहीं था।'


उद्धव ठाकरे की बैठक में पहुंचे सिर्फ तीन सांसद, बगावत की पुष्टि
गुरुवार (18 जून 2026) को दिल्ली में बुलाई गई शिवसेना (उबाठा) के संसदीय दल की बैठक ने इस बड़ी बगावत पर पूरी तरह मुहर लगा दी है। लोकसभा में उद्धव ठाकरे के कुल 9 सदस्यों में से 6 सांसद इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह नदारद रहे। बैठक में हिस्सा लेने के लिए केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही पहुंचे। इनके अलावा राज्यसभा के इकलौते सदस्य संजय राउत भी बैठक में मौजूद थे। 9 में से 6 सांसदों के न आने से यह साफ हो गया है कि संसद के भीतर शिवसेना का उद्धव गुट अब दो-तिहाई बहुमत के साथ टूट चुका है।

व्हिप उल्लंघन पर एक्शन: उद्धव गुट जारी करेगा 'कारण बताओ नोटिस'
बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे का नाम शामिल है। बैठक खत्म होने के बाद लोकसभा में उद्धव गुट के नेता अरविंद सावंत ने मीडिया से बात करते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए। सावंत ने कहा, "इन सभी 6 सांसदों को पार्टी की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। उनसे पूछा जाएगा कि पार्टी का स्पष्ट व्हिप जारी होने के बावजूद वे बैठक में क्यों नहीं आए? उन्हें जवाब देने के लिए 7 दिन का समय मिलेगा। अगर जवाब नहीं आया, तो हम लोकसभा अध्यक्ष ओम бирला से इनकी संसद सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे।"

संजय राउत की 'गालियों' से और भड़के बागी सांसद, दूरी की बड़ी वजह
सूत्रों का दावा है कि इस पूरी बगावत की स्क्रिप्ट लिखे जाने के दौरान संजय राउत की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने आग में घी डालने का काम किया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से इन 6 सांसदों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं और कथित तौर पर गालियों का इस्तेमाल किया गया। इस अभद्र भाषा के कारण इन सांसदों की नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई। सूत्रों के मुताबिक, मान-सम्मान को ठेस पहुंचना ही गुरुवार को बुलाई गई आधिकारिक बैठक से दूरी बनाए रखने और पूरी तरह नाता तोड़ने की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण वजह बन गया है।

बगावत के बाद अलर्ट: इंटेलिजेंस कमिश्नर ने बढ़ाई सभी 6 सांसदों की सुरक्षा
इस बड़े राजनीतिक ड्रामे और जमीनी स्तर पर शिवसैनिकों के संभावित गुस्से को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। महाराष्ट्र सरकार के इंटेलिजेंस कमिश्नर (खुफिया आयुक्त) के विशेष आदेश पर इन सभी छह बागी सांसदों—संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमराजे编बालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बढ़ा दिया गया है। खुफिया विभाग को अंदेशा है कि उद्धव गुट के कार्यकर्ता इन सांसदों के दफ्तरों या घरों पर विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ की कोशिश कर सकते हैं।

20 जून को शिंदे के साथ मिलकर खोलेंगे उद्धव के खिलाफ मोर्चा
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और कारण बताओ नोटिस को लेकर अभी तक बागी सांसदों की तरफ से कोई भी आधिकारिक या सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि अरविंद सावंत के नोटिस या सदस्यता रद्द करने की धमकियों का इन पर कोई कानूनी असर नहीं होगा, क्योंकि दलबदल कानून के तहत इनके पास दो-तिहाई (9 में से 6) का स्पष्ट बहुमत है। ये सभी बागी सांसद आगामी 20 जून को मुंबई में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्धव ठाकरे की कार्यशैली को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए जा सकते हैं।


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