
अपनी मौत का नाटक रचने के लिए किया भिखारी का कत्ल, UP पुलिस का पूर्व सिपाही गिरफ्तार
जिस बुजुर्ग भिखारी की हत्या की गई, उसकी असली पहचान अभी तक उजागर नहीं हो पाई है। पुलिस के अनुसार, वह व्यक्ति साधु के वेश में रहता था और भीख मांगकर गुजारा करता था। पुलिस अब उसके परिवार या रिश्तेदारों की तलाश कर रही है ताकि बेगुनाह मृतक को इंसाफ मिल सके।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे और आम जनता को हैरान कर दिया है। यह कहानी किसी बॉलीवुड की थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है, लेकिन हकीकत में यह एक बेगुनाह की जान लेने और कानून की आंखों में धूल झोंकने की नाकाम कोशिश है। उत्तर प्रदेश पुलिस के एक बर्खास्त सिपाही ने अपनी मौत का झूठा नाटक रचने के लिए एक मासूम भिखारी को मौत के घाट उतार दिया और उसे जिंदा जला दिया।
क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 12 मार्च 2024 को हुई। उत्तर-पूर्वी रेलवे के हाथरस रोड हॉल्ट के पास एक टिन शेड के नीचे एक बुजुर्ग व्यक्ति का बुरी तरह जला हुआ शव बरामद हुआ। शव इतना जल चुका था कि उसकी पहचान करना लगभग नामुमकिन था। शुरुआती जांच में पुलिस को शव के पास से कुछ पहचान पत्र और सामान मिला, जिससे ऐसा लगा कि मरने वाला व्यक्ति मैनपुरी जिले का रहने वाला रामवीर सिंह (55) है। हाथरस सिटी की जीआरपी (G.R.P.) पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरी कहानी को पलट कर रख दिया।
साजिश का पर्दाफाश: मुर्दा 'जिंदा' हो गया
जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ कि क्या वास्तव में मरने वाला व्यक्ति रामवीर सिंह ही है? टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस उस शख्स तक पहुँच गई जिसे दुनिया 'मृत' समझ रही थी। 14 अप्रैल को जीआरपी ने मैनपुरी जिले के किशनी इलाके के रहने वाले रामवीर सिंह को जिंदा गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों के होश उड़ा दिए। रामवीर, जो कभी खुद कानून का रखवाला (सिपाही) था, वही इस जघन्य हत्याकांड का मास्टरमाइंड निकला।
खौफनाक वारदात: भिखारी को बनाया मोहरा
पूछताछ में सामने आया कि रामवीर सिंह ने अपनी मौत का ढोंग करने के लिए एक बेहद खौफनाक प्लान बनाया था। उसने रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले एक बुजुर्ग भिखारी (जो साधु के वेश में था) को अपना शिकार चुना। 12 मार्च की रात उसने भिखारी की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के साथ-साथ खुद को मृत घोषित करने के लिए शव को आग लगा दी।
इतना ही नहीं, उसने बड़ी चालाकी से अपना असली पहचान पत्र (Identity Card) और कुछ निजी सामान अधजले शव के पास छोड़ दिया, ताकि पुलिस और उसके परिजन यह मान लें कि रामवीर की मौत हो चुकी है। इस वारदात को अंजाम देते समय रामवीर खुद भी कुछ हद तक झुलस गया था।
आखिर क्यों रची यह साजिश?
जीआरपी हाथरस सिटी के थाना प्रभारी सुयश सिंह ने बताया कि रामवीर सिंह कोई साधारण अपराधी नहीं है। वह एक 'आदतन अपराधी' (Habitual Offender) है और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण उसे पुलिस सेवा से काफी समय पहले बर्खास्त किया जा चुका था।
रामवीर के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गंभीर मामले दर्ज हैं:
फिरोजाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद, हरदोई, मैनपुरी और बदायूं जैसे जिलों में उसके खिलाफ अपहरण, हत्या, लूट और धोखाधड़ी के संगीन मुकदमे चल रहे हैं। माना जा रहा है कि इन सभी मुकदमों और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उसने खुद को कागजों पर 'मुर्दा' साबित करने की कोशिश की, ताकि पुलिस उसकी तलाश बंद कर दे और वह एक नई पहचान के साथ छिपकर रह सके।
मृतक की पहचान अब भी एक पहेली
जिस बुजुर्ग भिखारी की हत्या की गई, उसकी असली पहचान अभी तक उजागर नहीं हो पाई है। पुलिस के अनुसार, वह व्यक्ति साधु के वेश में रहता था और भीख मांगकर गुजारा करता था। पुलिस अब उसके परिवार या रिश्तेदारों की तलाश कर रही है ताकि बेगुनाह मृतक को इंसाफ मिल सके।
पुलिस ने रामवीर सिंह को जेल भेज दिया है और उसके खिलाफ हत्या (धारा 302), साक्ष्य मिटाने (धारा 201) और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बर्खास्त सिपाही का यह कारनामा यूपी पुलिस के लिए भी एक सबक है कि कैसे कानून की जानकारी रखने वाला व्यक्ति ही कानून के साथ इतनी बड़ी साजिश रच सकता है।

