क्या आम आदमी पार्टी पलट देगी खेल? 7 में 3 सांसदों पर सस्पेंस
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

क्या आम आदमी पार्टी पलट देगी खेल? 7 में 3 सांसदों पर सस्पेंस

आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे के दावे के बीच सिर्फ 3 के BJP में जाने की पुष्टि हुई है। आप का कहना है कि वो दलबदल कानून के तहक कार्रवाई की मांग करेंगे।


आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने का दावा किया गया, लेकिन सामने आई तस्वीरों में केवल तीन सांसद—राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ही दिखाई दिए। राघव चड्ढा ने कहा कि संविधान के अनुसार, यदि किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सदस्य दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इसे वैध माना जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफे के बाद ये तीनों सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

अब बीजेपी के राघव चड्ढा

चड्ढा के अनुसार, इस संबंध में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को एक पत्र सौंपा गया है, जिसमें सभी आवश्यक दस्तावेज और हस्ताक्षर शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य चार सांसद हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी बीजेपी में शामिल हो रहे हैं और उन्होंने भी पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के खिलाफ बताया है। AAP के राज्यसभा व्हिप एन.डी. गुप्ता ने कहा कि वे राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग करेंगे। इन तीनों को सार्वजनिक रूप से बीजेपी में शामिल होते हुए देखा गया है, जबकि बाकी चार सांसदों ने अभी तक आधिकारिक रूप से बीजेपी में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।

AAP सांसद संजय सिंह ने भी घोषणा की है कि वे राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर इन तीनों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने के समान है। इसी बीच, स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने की पुष्टि करते हुए AAP पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार और अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

क्या है दल-बदल कानून

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सांसदों की राज्यसभा सदस्यता जाएगी? भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अनुसार, यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ता है तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। लेकिन इस कानून में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है—यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद किसी दूसरी पार्टी में विलय का निर्णय लेते हैं, तो वे अयोग्यता से बच सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों की इस मामले पर अलग-अलग राय है। यदि राज्यसभा में दो-तिहाई सांसद विलय का समर्थन करते हैं, तो यह वैध हो सकता है। वहीं कुछ जानकारों के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि सदन का अर्थ केवल एक सदन है या पूरी संसद। कुछ विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि बिना मूल राजनीतिक पार्टी के औपचारिक विलय के, केवल विधायी दल का विलय मान्य नहीं हो सकता। यह मुद्दा अभी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।

इस पूरे मामले में राज्यसभा के सभापति का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि वही यह तय करेंगे कि यह विलय मान्य है या नहीं। उनके फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी जा सकती है।अंततः, इन सातों सांसदों का भविष्य उनके “नंबर गेम” पर निर्भर करेगा। यदि दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा रहता है, तो वे अयोग्यता से बच सकते हैं। लेकिन अगर AAP इनमें से कुछ सांसदों को वापस लाने में सफल होती है, तो यह पूरा समीकरण बदल सकता है।राजनीतिक रूप से, यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, और आने वाले समय में इसका असर और स्पष्ट होगा।

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