
पंजाब में आप को बड़ा झटका, सीएम मान को अकाल तख्त ने माना 'गुरुद्रोही'
अकाल तख्त ने वीडियो फॉरेंसिक जांच में सही पाए जाने पर सीएम भगवंत मान को गुरुद्रोही घोषित किया, सिखों से किया बहिष्कार का आह्वान, विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा असर।
Punjab Politics: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। अकाल तख्त, जो सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है, ने सीएम मान को "गुरुद्रोही" (एंटी-गुरु) घोषित कर दिया है। यह विवाद उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें एक व्यक्ति, जो दिखने में भगवंत मान जैसा लग रहा है, कथित तौर पर सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में गुरु की गोलक (दानपात्र) के बारे में भी कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने घोषणा की कि अब सिख समुदाय को सीएम मान का सामाजिक बहिष्कार (शुन) करना चाहिए।
फॉरेंसिक जांच में खुला झूठ?
एआई-जनरेटेड होने का दावा हुआ खारिज
अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने बताया कि इस साल 15 जनवरी को जब सीएम मान को तलब किया गया था, तब उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। मान ने सफाई दी थी कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और यह वीडियो पूरी तरह से एआई (AI) जनरेटेड है। जत्थेदार के अनुसार, उन्होंने छह महीने तक सीएम से सबूत मांगे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अकाल तख्त ने वीडियो को दो सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट में साफ हुआ है कि वीडियो न तो फर्जी है और न ही एआई से बनाया गया है।
'खालसा पंथ विरोधी' घोषित
पांच सिंह साहिबों की बैठक में लिया गया फैसला
पांच सिंह साहिबों (उच्च पुजारियों) की एक आपातकालीन बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भगवंत मान ने अकाल तख्त से झूठ बोला है। उन्हें "गुरुद्रोही" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित करते हुए जत्थेदार ने कहा कि अब सिखों को उनसे कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। अकाल तख्त के इस सख्त रुख से राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।
आप का बचाव और चुनाव पर असर
आम आदमी पार्टी ने उठाए जांच पर सवाल
अकाल तख्त के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपना बचाव किया है। पार्टी का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट्स से यह साबित नहीं होता कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वास्तव में भगवंत मान ही है। पार्टी का तर्क है कि राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले महीने हुए पंजाब निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया यह विवाद उनके लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
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