एसआईटी और फायर एनओसी पर अखिलेश का हमला: यूपी में चरम पर भ्रष्टाचार
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एसआईटी और फायर एनओसी पर अखिलेश का हमला: 'यूपी में चरम पर भ्रष्टाचार'

अखिलेश यादव ने एसआईटी गठन पर उठाए सवाल। कहा- फायर एनओसी के नाम पर भरी जा रही जेबें, नियमों और सुरक्षा मानकों पर हावी हुआ भ्रष्टाचार।


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Lucknow Fire Incident: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य में होने वाली आपराधिक और प्रशासनिक दुर्घटनाओं के बाद सरकार द्वारा विशेष जांच दल (SIT) के गठन की नीति पर कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार (23 जून 2026) को मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पिछले 10 सालों से उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा है और जब भी कोई बड़ी घटना होती है, तो सरकार केवल एसआईटी बनाने का दिखावा करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ चुका है कि वह सभी सरकारी मानकों पर हावी हो गया है, जिसके चलते आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।



"लगता है 10 साल से कोई सरकार ही नहीं थी" एसआईटी पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने हालिया प्रशासनिक विफलताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि जांच कमेटियों का गठन केवल मामलों को दबाने का एक जरिया बन चुका है:

"हमने और आपने पिछले 10 सालों से देखा है कि हर घटना के बाद एसआईटी (SIT) बनाने का काम शुरू हो जाता है। वास्तविकता यह है कि एसआईटी के गठन से कुछ नहीं बदलता। ऐसा देखकर तो यह महसूस होता है कि राज्य में कोई सरकार ही अस्तित्व में नहीं है। और अगर वाकई में कोई सरकार है, तो वह अपने ही बनाए नियमों और कानूनों का सख्ती से पालन क्यों नहीं कराती है?"

फायर एनओसी और अवैध नक्शों में 'जेब भरने' का लगाया गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर विकास प्राधिकरणों और अग्निशमन विभाग (Fire Department) में चल रहे कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया:

मानकों के साथ खिलवाड़: उन्होंने कहा कि किसी भी व्यावसायिक या आवासीय इमारत का नक्शा तभी पास हो सकता है, जब उसे नियमानुसार फायर एनओसी (Fire NOC) और अन्य अनापत्ति प्रमाण पत्र मिले हों।

खजाने तक पहुंचती है रिश्वत: सपा प्रमुख ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर वे कौन लोग थे जो फायर एनओसी जारी करने के नाम पर अपनी जेबें भर रहे थे? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस रिश्वत और भ्रष्टाचार का खजाना नीचे से लेकर ऊपर तक कहाँ तक जाता था, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

'भ्रष्टाचार से बनी सरकार भ्रष्टाचार ही करेगी'
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को आड़े हाथों लेते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए:

मानकों पर भ्रष्टाचार हावी: पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, जब देश या प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार सभी सुरक्षा मानकों और नियमों पर हावी हो जाता है, तो परिणाम ऐसे ही विनाशकारी होते हैं। आज यूपी में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है।

चुनावी और राजनैतिक घेराबंदी: सरकार के गठन पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो सरकार खुद भ्रष्टाचार के सिद्धांतों और अनैतिकता से बनी हो, उससे किसी पारदर्शिता की उम्मीद नहीं की जा सकती; वह आगे भी केवल भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा देगी।

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार इस बात पर अड़ा है कि कागजी जांच समितियों के बजाय दोषियों पर ऑन-स्पॉट सख्त कार्रवाई की जाए।


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