AMCA प्रोजेक्ट पर राजनीति तेज, तमिलनाडु ने उठाए सवाल
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AMCA प्रोजेक्ट पर राजनीति तेज, तमिलनाडु ने उठाए सवाल

AMCA प्रोजेक्ट के आंध्र प्रदेश जाने की खबरों से तमिलनाडु में राजनीतिक और औद्योगिक बहस तेज हो गई है। फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।


भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में लंबे समय से पहचान रखने वाले तमिलनाडु की औद्योगिक क्षमता अब सवालों के घेरे में आ गई है। इसकी वजह है महत्वाकांक्षी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट का कथित तौर पर पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश को चला जाना।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रक्षा परियोजना को तमिलनाडु से आंध्र प्रदेश स्थानांतरित किए जाने के पीछे राजनीतिक कारणों की भूमिका रही। इस घटनाक्रम ने राज्य में राजनीतिक और औद्योगिक बहस को तेज कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब Vijay के नेतृत्व में नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो रही है।

तीन साल तक चली थी तमिलनाडु की तैयारी

बताया जा रहा है कि पूर्व डीएमके सरकार ने लगभग तीन वर्षों तक इस परियोजना को तमिलनाडु लाने के लिए लगातार प्रयास किए थे। राज्य सरकार ने होसुर में 100 एकड़ जमीन मुफ्त देने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ ही 3.5 किलोमीटर लंबा रनवे और बेंगलुरु के विकसित एयरोनॉटिकल इकोसिस्टम तक पहुंच भी इस प्रस्ताव का हिस्सा थी।इसके बावजूद रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि परियोजना को राजनीतिक कारणों से आंध्र प्रदेश भेज दिया गया।

टीआरबी राजा ने जताई नाराजगी

तमिलनाडु के पूर्व उद्योग मंत्री TRB Rajaa ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “बेहद अन्यायपूर्ण” बताते हुए सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के लिए झटका करार दिया।राजा का कहना है कि तमिलनाडु का प्रस्ताव तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत था क्योंकि राज्य के पास बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, विकसित एयरोस्पेस इकोसिस्टम और वर्षों की तैयारी थी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस बदलाव पर स्पष्टीकरण देने की मांग भी की।

आंध्र प्रदेश ने पेश किया बड़ा विजन

जहां तमिलनाडु ने अपनी मौजूदा औद्योगिक ताकत पर जोर दिया, वहीं N. Chandrababu Naidu के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश ने अधिक आक्रामक और विस्तारवादी रणनीति अपनाई।रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंध्र प्रदेश ने पुट्टपर्थी में 650 एकड़ का समर्पित डिफेंस हब देने की पेशकश की, जो तमिलनाडु के प्रस्तावित भूखंड से कई गुना बड़ा था।

इसके अलावा, चंद्रबाबू नायडू ने कथित तौर पर राज्य के “स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस” मॉडल को आगे बढ़ाते हुए तेज मंजूरी प्रक्रिया, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और कम नौकरशाही बाधाओं का भरोसा दिया।

डिफेंस कॉरिडोर ने मजबूत किया दावा

आंध्र प्रदेश का प्रस्ताव केवल जमीन तक सीमित नहीं था। राज्य ने एकीकृत रक्षा विनिर्माण कॉरिडोर (Integrated Defence Manufacturing Corridor) का भी प्रस्ताव दिया था।इसमें AMCA हब को अनकापल्ली के नेवल सिस्टम्स फैसिलिटी और मदकासिरा के गोला-बारूद संयंत्र से जोड़ने की योजना शामिल थी। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक रक्षा उत्पादन नेटवर्क ने आंध्र प्रदेश की दावेदारी को और मजबूत बनाया।

तमिलनाडु की औद्योगिक नीति पर उठे सवाल

AMCA परियोजना को लेकर पैदा हुआ विवाद अब तमिलनाडु की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर भी सवाल खड़े कर रहा है। दशकों से राज्य ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और भारी उद्योगों में निवेश आकर्षित करने वाला देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र रहा है।लेकिन इस प्रकरण के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या तमिलनाडु की मौजूदा औद्योगिक नीति तेजी से बदलती अंतरराज्यीय प्रतिस्पर्धा का सामना करने में पर्याप्त सक्षम है।

विजय सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा

यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के दौर में सामने आया है। टीवीके की चुनावी सफलता को नई राजनीतिक और प्रशासनिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा था।अब AMCA परियोजना को लेकर उठे सवालों को इस रूप में देखा जा रहा है कि क्या नई सरकार तमिलनाडु के रणनीतिक औद्योगिक हितों की रक्षा कर पाएगी।

राजनीतिक पक्षपात के आरोप तेज

इस विवाद ने राजनीतिक पक्षपात और असमान संघीय प्रतिस्पर्धा के आरोपों को भी हवा दी है।तमिलनाडु के समर्थकों का कहना है कि होसुर का एयरोस्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेंगलुरु के नजदीक होना इसे तकनीकी रूप से बेहतर विकल्प बनाता था।वहीं आलोचकों का तर्क है कि आंध्र प्रदेश ने बड़े स्तर, तेज मंजूरी और दीर्घकालिक औद्योगिक दृष्टि के दम पर तमिलनाडु को पीछे छोड़ दिया।

अब यह बहस केवल औद्योगिक नीति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय परियोजनाओं के राज्यों के बीच आवंटन को लेकर व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार और तमिलनाडु प्रशासन पर टिकी हैं कि वे राज्य की औद्योगिक रणनीति और AMCA परियोजना के भविष्य को लेकर क्या स्पष्ट रुख अपनाते हैं।

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