
Bengal Election: अमित शाह का दार्जिलिंग कार्ड, 'बंगाल को बिना बांटे' संवैधानिक तरीके से सुलझाएंगे गोरखा मुद्दा
अमित शाह की गंगारामपुर रैली ने साफ कर दिया है कि भाजपा उत्तर बंगाल में गोरखा-लैंड और घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों को अपना मुख्य चुनाव हथियार बना रही है। 'बिना राज्य बांटे' गोरखा समस्या के समाधान का वादा भी किया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Elections 2026) के लिए प्रचार अभियान अपने चरम पर है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता अमित शाह ने मंगलवार (14 अप्रैल) को दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। शाह के भाषण के केंद्र में दार्जिलिंग की पहाड़ियों का अत्यंत संवेदनशील और पुराना गोरखा-लैंड मुद्दा (Gorkhaland Issue) रहा। शाह ने उत्तर बंगाल के मतदाताओं को साधने के लिए विकास की बड़ी योजनाओं और गोरखा समस्या के स्थायी समाधान का एक नया फार्मूला पेश किया।
गोरखा मुद्दा: बिना विभाजन संवैधानिक समाधान का वादा
दार्जिलिंग पहाड़ियों में नेपाली भाषी भारतीयों द्वारा एक अलग राज्य 'गोरखा-लैंड' की मांग दशकों से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है। इस मांग को लेकर कई बार हिंसक आंदोलन भी हुए हैं, विशेषकर 2011 में 'गोरखा-लैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन' (GTA) के गठन के बावजूद 2017 तक अशांति देखी गई। इस संवेदनशील मुद्दे पर शाह ने भाजपा का रुख साफ करते हुए गोरखा समुदाय से एक बड़ा वादा किया।
गंगारामपुर की रैली में शाह ने कहा, "मैं दार्जिलिंग के अपने गोरखा भाइयों से कहना चाहता हूं कि भाजपा एक बार सत्ता में आने के बाद, पहाड़ियों में न केवल एक 'इको-एडवेंचर हब' विकसित करेगी, बल्कि पश्चिम बंगाल राज्य का विभाजन किए बिना, संवैधानिक तरीके से गोरखा समस्या का स्थायी समाधान भी निकालेगी।" शाह का यह बयान राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा अलग राज्य के गठन का समर्थन किए बिना गोरखा समुदाय की भावनाओं और मांगों को संवैधानिक दायरे में संतुष्ट करने का प्रयास कर रही है।
उत्तर बंगाल के लिए विकास की सौगातें
शाह ने भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हवाला देते हुए उत्तर बंगाल-केंद्रित कई विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी। उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो इस क्षेत्र में एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), एक अत्याधुनिक 600 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल, अलग-अलग आईआईटी (IIT) और आईआईएम (IIM) कैंपस, और एक समर्पित खेल विश्वविद्यालय (Sports University) का निर्माण किया जाएगा।
साथ ही, उन्होंने क्षेत्र के लोगों की एक पुरानी और महत्वपूर्ण मांग को पूरा करते हुए राजबंशी भाषा (Rajbanshi Language) को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का भी वादा किया। ये वादे उत्तर बंगाल के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भाजपा की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हैं।
घुसपैठ और राजनीतिक हिंसा पर कड़ा प्रहार
शाह ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा, सिंडिकेट और 'कट-मनी' राज को पूरी तरह खत्म करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सत्ता में आते ही घुसपैठियों (Infiltrators) को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकालेगी।
उन्होंने उत्तर बंगाल के मतदाताओं से कमल के निशान पर जोर से बटन दबाने की एक अनूठी अपील की। शाह ने कहा, "कमल के निशान के पास ईवीएम (EVM) का बटन इतनी जोर से दबाएं कि उत्तर बंगाल के क्षेत्रों में बटन दबने के बाद, पूरे भारत भर के घुसपैठियों को बिजली का करंट महसूस हो।" शाह का यह बयान भाजपा के घुसपैठ-विरोधी और राष्ट्रवाद-केंद्रित चुनाव अभियान को और तेज करता है।

