आंध्र में गंभीर हो गया ईंधन संकट: 421 पेट्रोल पंप बंद, CM नायडू ने दिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश
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आंध्र प्रदेश के अधिकारियों ने यह भी बताया कि खासकर मत्स्य पालन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर थोक खरीद स्थानीय ईंधन उपलब्धता पर भारी दबाव डाल रही है।

आंध्र में गंभीर हो गया ईंधन संकट: 421 पेट्रोल पंप बंद, CM नायडू ने दिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश

चुनाव के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ने की आशंका के बीच 421 पेट्रोल पंप सूख गए; थोक खरीद में उछाल और अंतरराज्यीय प्रतिबंधों के कारण पेट्रोल-डीजल की मांग और बढ़ी


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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम के बाद हालांकि फिलहाल जंग के बादल छंटते दिख रहे हैं, लेकिन लगभग दो महीने लंबी चली जंग के साइड इफेक्ट् भारत में भी देखे जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश मे तो अचानक और गंभीर ईंधन संकट पैदा हो गया है। नौबत ये आ गई है कि बड़ी संख्या में पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं।

इन हालातों के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने खुद हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने नायडू को बताया कि राज्य के 4,510 ईंधन आउटलेट्स में से लगभग 421 आपूर्ति में बाधा के कारण बंद हो चुके हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने शनिवार (26 अप्रैल) देर रात मुंबई से अमरावती रवाना होने से पहले मुख्य सचिव साई प्रसाद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिए स्थिति की समीक्षा की। PTI रिपोर्ट के मुताबिक, एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, “मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत ऐसे कदम लागू करें जिससे ईंधन की कमी दूर हो और आम जनता को असुविधा से बचाया जा सके।”

आंध्र प्रदेश में गहराया संकट

आंध्र प्रदेश इस समय पेट्रोल और डीजल की अचानक और गंभीर कमी से जूझ रहा है। इससे सैकड़ों पेट्रोल पंप खाली हो गए हैं और आम लोगों में व्यापक चिंता फैल गई है। इस संकट ने यात्रियों, परिवहन ऑपरेटरों और राज्य के महत्वपूर्ण कृषि एवं मत्स्य पालन क्षेत्रों के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

राजमहेंद्रवरम (राजामुंद्री), एलुरु, विजयवाड़ा, तिरुपति, गुंटूर, काकीनाडा और कुरनूल जैसे प्रमुख शहरों में अब भी चल रहे कुछ पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें आम दृश्य बन गई हैं। कई पेट्रोल पंपों ने “नो स्टॉक” के बोर्ड लगा दिए हैं, जबकि डीलरों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति बनी रही तो उन्हें पूरी तरह संचालन बंद करना पड़ सकता है।

हालांकि विशाखापट्टनम इस संकट से काफी हद तक प्रभावित नहीं है, लेकिन एलुरु जिले में हालात सबसे खराब हैं, जहां 426 में से अधिकांश रिटेल आउटलेट्स को स्टॉक की कमी के कारण संचालन रोकना पड़ा है।

घबराहट में खरीदारी

आंध्र प्रदेश के अधिकारियों के मुताबिक, इस संकट का एक बड़ा कारण लोगों द्वारा घबराहट में की जा रही खरीदारी भी है। अधिकारियों ने बताया कि सप्लाई में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद मांग अचानक बहुत बढ़ गई है, जिससे कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी जा रही है।

सामान्य दिनों में औसतन 6,330 किलोलीटर पेट्रोल और 9,048 किलोलीटर डीजल की बिक्री होती है, लेकिन कमी की आशंका के चलते खरीदारी में भारी उछाल आया है।

शनिवार को बिक्री बढ़कर 10,345 किलोलीटर पेट्रोल और 14,156 किलोलीटर डीजल तक पहुंच गई, अधिकारियों ने बताया। सप्लाई में सुधार के बावजूद, घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) के कारण कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है।

थोक खरीद से बढ़ा दबाव

अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि बड़े पैमाने पर थोक खरीद—खासकर एक्वाकल्चर (मत्स्य पालन) क्षेत्र में—स्थानीय ईंधन उपलब्धता पर भारी दबाव डाल रही है।

इस स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जिला कलेक्टरों और मत्स्य विभाग के बीच समन्वय बनाकर इन बड़े पैमाने पर ड्रम में होने वाली खरीदारी को नियंत्रित करने और सप्लाई चेन को स्थिर करने के निर्देश दिए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मांग में अचानक आई बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण आंध्र प्रदेश और पड़ोसी राज्यों—तमिलनाडु, ओडिशा और कर्नाटक—के बीच ईंधन कीमतों में अंतर भी है।

आम तौर पर बड़े खरीदार सस्ता ईंधन सीमावर्ती राज्यों से लाते थे, लेकिन हाल ही में अंतरराज्यीय बिक्री पर सख्ती के कारण उन्हें स्थानीय पेट्रोल पंपों से ही खरीदारी करनी पड़ रही है।

इस अप्रत्याशित थोक मांग ने आम लोगों के लिए रखे गए ईंधन स्टॉक पर भारी दबाव डाल दिया है।

सप्लाई में 10% बढ़ोतरी

इस बीच, राज्य के सिविल सप्लाई कमिश्नर के. कन्ना बाबू ने मीडिया से कहा कि ईंधन की कोई मूलभूत कमी नहीं है और लोगों से पैनिक बाइंग से बचने की अपील की।

उन्होंने बताया कि सरकार इंडियन ऑयल (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों के जरिए स्थिति को सक्रिय रूप से संभाल रही है।

बाजार को स्थिर करने के लिए तेल कंपनियों ने अप्रैल 2025 के स्तर के मुकाबले सप्लाई में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, जॉइंट कलेक्टर्स को जमीनी स्तर पर हालात की निगरानी और किसी भी नई सप्लाई समस्या की तुरंत रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इंडियन ऑयल की ‘घबराएं नहीं’ अपील

बढ़ती चिंता के बीच इंडियन ऑयल ने भी बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि देशभर में पेट्रोलियम सप्लाई सामान्य रूप से जारी है।

कंपनी के एक प्रवक्ता के अनुसार, 1 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 के बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री में 13 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कंपनी ने लोगों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा है कि घबराकर खरीदारी करने की कोई जरूरत नहीं है।

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