
VB-G RAM G लॉन्च के लिए रेलवे कोडूर क्यों चुना? जानिए इसके राजनीतिक मायने
केंद्र सरकार 2 जुलाई को आंध्र के रेलवे कोडूर से VB-G RAM G योजना लॉन्च करेगी। इसे TDP-जन सेना गठबंधन के राजनीतिक तालमेल का बड़ा संदेश माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने जब 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) की शुरुआत के लिए आंध्र प्रदेश को चुना, तो सबसे बड़ा सवाल यह था कि लॉन्चिंग के लिए रेलवे कोडूर विधानसभा क्षेत्र को ही क्यों चुना गया।
दरअसल, इस योजना की पूर्ववर्ती महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा/MGNREGA) की शुरुआत करीब दो दशक पहले आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से हुई थी। ऐसे में माना जा रहा था कि इतिहास दोहराया जाएगा और नई योजना का शुभारंभ भी वहीं से होगा। लेकिन केंद्र सरकार ने रेलवे कोडूर को चुनकर स्पष्ट संकेत दिया कि इस फैसले के पीछे राजनीतिक समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
2 जुलाई को होगा योजना का शुभारंभ
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण गुरुवार (2 जुलाई) को तिरुपति जिले के रेलवे कोडूर विधानसभा क्षेत्र के ओबुलावरिपल्ले मंडल स्थित मुक्कावरिपल्ले पंचायत में इस योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।इस कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर भी मौजूद रहेंगे।
अनंतपुर की जगह रेलवे कोडूर क्यों?
जब केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना को नए नाम के साथ दोबारा शुरू करने का फैसला किया, तब व्यापक चर्चा थी कि इसकी शुरुआत एक बार फिर अनंतपुर से होगी।अनंतपुर जिले का बंडलापल्ले गांव इस योजना के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यहीं 2 फरवरी 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और तत्कालीन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी ने मनरेगा की शुरुआत की थी।
लेकिन इस बार एनडीए सरकार ने ऐतिहासिक प्रतीकवाद की बजाय रेलवे कोडूर को प्राथमिकता दी, जिसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।रेलवे कोडूर, नवगठित तिरुपति जिले का एक विधानसभा क्षेत्र और नगर है, जो तिरुपति शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है।
पवन कल्याण की भूमिका रही अहम
सूत्रों के अनुसार, रेलवे कोडूर को लॉन्चिंग स्थल बनाने में उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की अहम भूमिका रही। बताया जाता है कि उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ चर्चा के दौरान इस स्थान का प्रस्ताव रखा था।रेलवे कोडूर से जन सेना पार्टी के विधायक अरवा श्रीधर प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि वरिष्ठ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) नेता मुक्का रूपानंद रेड्डी यहां पार्टी प्रभारी हैं।बताया जा रहा है कि इन दोनों नेताओं ने मिलकर मुक्कावरिपल्ले को राष्ट्रीय स्तर पर योजना के शुभारंभ के लिए चयनित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
TDP और जन सेना के तालमेल का प्रदर्शन
इस कार्यक्रम के जरिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) अपने दो प्रमुख सहयोगी दलों—तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जन सेना पार्टी—के बीच बेहतर समन्वय का संदेश भी देना चाहता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दल इस कार्यक्रम के आयोजन का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे और इसे गठबंधन की मजबूती के प्रतीक के रूप में पेश करेंगे।
नाम बदलने पर विपक्ष का विरोध
इस योजना की शुरुआत ऐसे समय हो रही है, जब कांग्रेस और वामपंथी दल केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर VB-G RAM G करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।विपक्ष का आरोप है कि सरकार योजना का नाम बदलकर उसकी मूल पहचान को समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
रेलवे कोडूर के लिए भी खास अवसर
यह कार्यक्रम रेलवे कोडूर के लिए भी खास महत्व रखता है। हाल ही में प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र को पूर्व के अन्नामय्या जिले से अलग कर तिरुपति जिले में शामिल किया गया था। इसके बाद यह रेलवे कोडूर में आयोजित होने वाला पहला बड़ा सरकारी कार्यक्रम होगा।
15 से 20 हजार लोगों के जुटने की उम्मीद
जिला प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोजन में 15,000 से 20,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है।इस कार्यक्रम को केवल नई ग्रामीण रोजगार योजना की राष्ट्रीय शुरुआत ही नहीं, बल्कि एनडीए सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी प्रमुख अतिथि पहले कार्यक्रम स्थल के पास बनाए गए अस्थायी हेलिपैड पर हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगे और वहां से सार्वजनिक सभा स्थल के लिए रवाना होंगे।
(यह लेख मूल रूप से द फेडरल आंध्र प्रदेश में प्रकाशित हुआ था।)

