छह सीटों तक सीमित भूमिका, क्या यही है अन्नामलाई की नाराज़गी की वजह?
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छह सीटों तक सीमित भूमिका, क्या यही है अन्नामलाई की नाराज़गी की वजह?

BJP नेता के. अन्नामलाई का चुनावी जिम्मेदारियों से हटना तमिलनाडु में पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े करता है। इसे असंतोष और भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।


भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता के. अन्नामलाई द्वारा चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियों से खुद को अलग करने के फैसले ने तमिलनाडु में पार्टी की रणनीति को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। अन्नामलाई ने आधिकारिक तौर पर इसकी वजह अपने पिता की खराब सेहत बताई है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब राज्य एक अहम विधानसभा चुनावी दौर की ओर बढ़ रहा है।इस कदम के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

‘यह फैसला अलग-थलग नहीं देखा जा सकता’

Talking Sense With Srini कार्यक्रम में द फेडरल के एडिटर-इन-चीफ एस. श्रीनिवासन ने कहा कि अन्नामलाई के फैसले को अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हालिया घटनाक्रम को जोड़कर देखें, तो यह साफ लगता है कि अन्नामलाई असंतुष्ट हैं।

श्रीनिवासन के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व ने पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई की भूमिका को चुनावी रणनीति में जानबूझकर सीमित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल अन्नामलाई को चुनावी अभियान का चेहरा बनाने के पक्ष में नहीं है।

क्या बात अन्नामलाई को खली?

श्रीनिवासन ने कहा, “उन्हें पूरी तरह दरकिनार नहीं किया गया है, लेकिन उनसे कहा गया है कि वे फिलहाल लो-प्रोफाइल रहें। उन्होंने पार्टी के विचारक एस. गुरुमूर्ति के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि अन्नामलाई को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा हो सकता है। संभव है कि पार्टी उन्हें 2031 के लिए तैयार कर रही हो, लेकिन सवाल यह है कि क्या अन्नामलाई में इतना धैर्य है

72 चुनाव प्रभारियों में एक बनना बना टकराव की वजह

श्रीनिवासन के अनुसार, असंतोष की एक बड़ी वजह यह रही कि अन्नामलाई को 234 विधानसभा सीटों के लिए बनाए गए 72 चुनाव प्रभारियों में से सिर्फ एक बनाया गया और उन्हें महज छह सीटों की जिम्मेदारी दी गई।उन्होंने कहा कि जो नेता खुद को राज्यस्तरीय नेता मानता हो, जिसने पूरे तमिलनाडु का दौरा किया हो, उससे कहा जाए कि वह सिर्फ छह सीटों पर ध्यान दें। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा खली।

सिंगानल्लूर सीट और गठबंधन की मजबूरी

तनाव तब और बढ़ा जब अन्नामलाई से पूछा गया कि क्या वे सिंगानल्लूर सीट से चुनाव लड़ेंगे, जो AIADMK का मजबूत गढ़ मानी जाती है। अन्नामलाई ने साफ कह दिया कि वे वहां प्रचार भी नहीं करेंगे। इस जवाब ने सहयोगियों और विरोधियों, दोनों को चौंका दिया।श्रीनिवासन का कहना है कि भाजपा इस सीट को लेकर दबाव नहीं बनाना चाहती थी, क्योंकि वह AIADMK के साथ पुराने गठबंधन तनाव को फिर से हवा नहीं देना चाहती।

उन्होंने कहा कि भाजपा जानती है कि 2024 में AIADMK के साथ गठबंधन टूटने के बाद क्या हुआ था, इसलिए वह सिंगानल्लूर को मुद्दा नहीं बनाना चाहती थी।

निजी कारण या राजनीतिक संकेत?

हालांकि अन्नामलाई ने पीछे हटने की वजह निजी बताई है, लेकिन श्रीनिवासन इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते।उन्होंने कहा कि सब जानते हैं कि उनके पिता काफी समय से बीमार हैं। ऐसे में इस फैसले का समय राजनीतिक सवाल खड़े करता है।”

नई पार्टी या विजय की TVK से गठजोड़?

अन्नामलाई के नई पार्टी बनाने या अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK से हाथ मिलाने की अटकलें भी सामने आई हैं। हालांकि श्रीनिवासन ने इन अटकलों को फिलहाल दूर की कौड़ी बताया।उन्होंने कहा कि अलग-अलग दलों के नेताओं से मुलाकात का मतलब यह नहीं होता कि राजनीतिक पुनर्संयोजन तय है। लेकिन ऐसी खबरों का तैरना ही यह दिखाता है कि अन्नामलाई को लेकर अनिश्चितता है।

युवाओं में खास लोकप्रियता

श्रीनिवासन ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि अन्नामलाई की व्यक्तिगत अपील काफी मजबूत रही है। उनकी छवि एक रॉकस्टार जैसी थी, खासकर युवाओं के बीच। उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति के पारंपरिक नियम तोड़े। वे आक्रामक थे, स्पष्ट बोलते थे और विरोधियों से टकराने से नहीं डरते थे।

वोटरों में निराशा का खतरा

श्रीनिवासन ने चेतावनी दी कि अब यही लोकप्रियता मतदाताओं की निराशा में बदल सकती है। अब यह BJP के लिए सकारात्मक वोट नहीं रह जाएगा। यह DMK के खिलाफ नकारात्मक वोट बन सकता है, या फिर समर्थक राजनीति से ही दूरी बना सकते हैं।”

‘तमिलनाडु में BJP लंबा खेल खेल रही है’

रणनीतिक तौर पर श्रीनिवासन का मानना है कि भाजपा तमिलनाडु में लॉन्ग टर्म गेम खेल रही है। उन्होंने कहा, “सारे संकेत बताते हैं कि पार्टी 2026 से ज्यादा 2031 को ध्यान में रखकर सोच रही है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा चुनाव भी अहम हैं, क्योंकि वोट शेयर बढ़ाना बेहद जरूरी है। इस लिहाज से अन्नामलाई का चुनाव प्रचार से दूर होना न सिर्फ भाजपा, बल्कि तमिलनाडु में NDA के लिए भी एक बड़ा झटका है।

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