टूटने की कगार पर ममता बनर्जी की TMC, राज्यसभा से सुष्मिता देव का इस्तीफा, BJP में होंगी शामिल!
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टूटने की कगार पर ममता बनर्जी की TMC, राज्यसभा से सुष्मिता देव का इस्तीफा, BJP में होंगी शामिल!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के ठीक बाद अब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी संसद की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।


पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बुधवार (10 जून) को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी की तेजतर्रार नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह चौंकाने वाला घटनाक्रम टीएमसी के एक और बेहद वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के ठीक बाद सामने आया है। लगातार दो बड़े सांसदों के बैक-टू-बैक इस्तीफों ने राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की स्थिति को बैकफुट पर ला दिया है।

सभापति को सौंपा इस्तीफा, असम के मुख्यमंत्री के साथ फोटो वायरल

सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंप दिया है। अपने संक्षिप्त पत्र में उन्होंने लिखा, "मैं एतद्द्वारा राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।" हालांकि, इस इस्तीफे से भी ज्यादा जिस बात ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचाई, वह थी उनके इस्तीफे के ठीक बाद सामने आई एक तस्वीर। सोशल मीडिया पर सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता हिमंत बिस्वा सरमा के साथ एक मुस्कुराती हुई तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि सुष्मिता देव एक बार फिर अपनी राजनीतिक जमीन बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं।

कांग्रेस से टीएमसी और अब अगला कदम?

सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वह ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं और असम के कद्दावर नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में असम की सिलचर सीट पर बीजेपी के राजदीप रॉय से हारने के बाद, उन्होंने साल 2021 में कांग्रेस पार्टी से मनमुटाव के चलते इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी उन्हें टीएमसी में लेकर आईं और उन्हें राज्यसभा भेजा। टीएमसी ने उन्हें अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बनाया था, लेकिन पांच साल के भीतर ही उनका टीएमसी से भी मोहभंग हो गया।

टीएमसी की एकजुटता पर खड़े हुए गंभीर सवाल

लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने वाली ममता बनर्जी के लिए अब अपनी पार्टी को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। टीएमसी के विधायक और सांसद इस समय कई धड़ों में बंटे हुए नजर आ रहे हैं। बगावत की पहली चिंगारी तब भड़की थी जब टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा ठोकते हुए कहा था कि उनके पास 58 विधायकों का समर्थन है।

इसके कुछ ही दिनों बाद, टीएमसी की एक और वरिष्ठ सांसद काकोली घोष ने सार्वजनिक रूप से एक अलग गुट का समर्थन कर दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ टीएमसी के 19 बागी सांसद जुड़े हुए हैं जो केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। सांसदों और विधायकों के इन दावों ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है।

सुखेंदु शेखर राय के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

सुष्मिता देव के इस्तीफे से ठीक कुछ घंटे पहले, टीएमसी के दिल्ली में सबसे प्रमुख चेहरों में से एक सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा उस वक्त आया जब दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली थी, जिसमें ममता और अभिषेक बनर्जी दोनों शामिल होने वाले थे।

सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे के पीछे जो कारण बताए, वे टीएमसी के लिए बेहद आत्मघाती हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार और पार्टी संगठन के भीतर 'अंधाधुंध और अनियंत्रित भ्रष्टाचार' व्याप्त है। राय ने चेतावनी दी कि शासन तंत्र की नाकामी और घोटालों के कारण टीएमसी सरकार के खिलाफ आम जनता का गुस्सा अब बेहद खतरनाक और डरावने स्तर पर पहुंच चुका है।

क्या विभाजन की कगार पर है पार्टी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर सांसदों का यह असंतोष और बढ़ता विद्रोह पार्टी में एक बड़ी टूट की ओर इशारा कर रहा है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, राज्य में सीआईडी (CID) की छापेमारी और अपनों की बगावत के बीच, क्या ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बिखरने से बचा पाएंगी? सुष्मिता देव का इस्तीफा महज एक सांसद का जाना नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि बंगाल के बाहर खुद को मजबूत करने का टीएमसी का प्लान अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

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