‘क्या सबूत मिटाने का मौका दिया जा रहा है?’, चंपत राय पर केजरीवाल के तीखे सवाल
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‘क्या सबूत मिटाने का मौका दिया जा रहा है?’, चंपत राय पर केजरीवाल के तीखे सवाल

राम मंदिर दान विवाद पर अरविंद केजरीवाल ने ट्रस्ट और चंपत राय पर सवाल उठाए। इस बीच एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी है।


अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके महासचिव चंपत राय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर से अरबों रुपये के दान में हेरफेर और चोरी के आरोप सामने आए हैं, जिससे देशभर के राम भक्तों में चिंता और नाराजगी है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोगों के बीच इस मामले को लेकर कई सवाल हैं। उनका आरोप है कि नकदी और आभूषणों से जुड़े गंभीर आरोपों के बावजूद चंपत राय अब भी मंदिर प्रबंधन की कमान संभाले हुए हैं। केजरीवाल ने पूछा कि जब इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताओं की बात सामने आ रही है, तो आखिर उन्हें पद से हटाया क्यों नहीं गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उन्हें सबूत मिटाने या गवाहों को प्रभावित करने का समय दिया जा रहा है और आखिर उन्हें संरक्षण कौन दे रहा है।


केजरीवाल के इस बयान के बाद राम मंदिर दान विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष लगातार मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि मंदिर ट्रस्ट की ओर से पहले भी आरोपों को खारिज किया जाता रहा है। इस बीच मामला केवल चढ़ावे की रकम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दान में मिली बहुमूल्य धातुओं के उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

विवाद बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसआईटी ने अयोध्या में छह दिनों तक रहकर जांच की, पांच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की और कई दस्तावेजों की समीक्षा की।

अब इस मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद को सीलबंद लिफाफे में दी गई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई, संभावित मुकदमे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार के अगले फैसले और एसआईटी की विस्तृत जांच पर टिकी हुई हैं।

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