
बोडो वोट बैंक साधने की चुनौती, दैमारी को लेकर भाजपा की बढ़ी चिंता
असम कैबिनेट विस्तार से पहले बिस्वजीत दैमारी को मंत्री बनाए जाने पर सस्पेंस है। समर्थकों ने जगह नहीं मिलने पर बड़े फैसले के संकेत दिए हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मंत्रिमंडल विस्तार में अब केवल दो दिन शेष हैं। ऐसे में वरिष्ठ भाजपा नेता और असम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि 5 जून को होने वाले कैबिनेट विस्तार में दैमारी को मंत्री नहीं बनाया गया, तो वे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं।
दैमारी के करीबी सूत्रों का कहना है कि हालांकि उन्होंने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन वे 6 जून तक इंतजार करेंगे और उसके बाद अपने अगले कदम पर निर्णय ले सकते हैं।
बोडो राजनीति का प्रमुख चेहरा
बिस्वजीत दैमारी बोडो राजनीति के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं। वे उन प्रमुख नेताओं में शामिल थे जिन्होंने 27 जनवरी 2020 को हुए तीसरे बोडो शांति समझौते (थर्ड बोडो पीस अकॉर्ड) को अंतिम रूप देने वाली वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 2001 में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के विधायक के रूप में की थी। इसके बाद वे 2008, 2014 और 2020 में असम से राज्यसभा सदस्य भी रहे। नवंबर 2020 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्हें असम विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया।
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में उन्होंने तमुलपुर सीट से यूपीपीएल अध्यक्ष प्रमोद बोरो को हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद से ही उनका नाम कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष रहते विवादों में घिरे
कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चाओं के बीच दैमारी अपने कार्यकाल से जुड़े कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी विवादों में हैं।यह मामला तब चर्चा में आया जब नव-निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने विधानसभा सचिव दुलाल पेगू को पद से हटा दिया। आरोप था कि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद वे पद पर बने हुए थे।
अनियमितताओं की जांच की मांग
सार्वजनिक हित संगठन असम पब्लिक वर्क्स (एपीडब्ल्यू) ने इन आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।एपीडब्ल्यू के महासचिव ध्रुव तालुकदार ने आरोप लगाया कि दैमारी के कार्यकाल के दौरान विधानसभा सचिवालय में खरीद प्रक्रियाओं, ठेकों के आवंटन और नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने दावा किया कि लैपटॉप की आपूर्ति, वेबसाइट निर्माण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े ठेके उन कंपनियों को दिए गए जो कथित रूप से पूर्व ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) सौमेन बरुआ से जुड़ी थीं।
इसके अलावा संगठन ने आरोप लगाया कि ग्रेड-3 और ग्रेड-4 के लगभग 125 पदों पर नियुक्तियां की गईं, जिनमें कई मामलों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। पूर्व विधानसभा सचिव दुलाल पेगू को सेवा विस्तार दिए जाने और एक अन्य अधिकारी को सेवानिवृत्ति आयु के बाद भी पद पर बनाए रखने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
एपीडब्ल्यू ने यह भी आरोप लगाया कि दैमारी के कार्यकाल में विदेशी दौरों की व्यवस्थाओं में भी अनियमितताएं हुईं और इन सभी व्यवस्थाओं का जिम्मा एक ही एजेंसी को सौंपा गया था।हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अब तक किसी अदालत या जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई: स्पीकर
जब इस मामले पर वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि अभी तक उनके पास कोई औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची है।उन्होंने कहा, "मुझे इन मामलों की जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मिली है। अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"
समर्थक दैमारी के बचाव में उतरे
दूसरी ओर, तमुलपुर क्षेत्र में दैमारी के समर्थक खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं।तमुलपुर के शिक्षक और लेखक क्वरमसार बसुमतारी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक व्यवस्था और मीडिया का एक वर्ग अनुभवी बोडो नेता को निशाना बना रहा है।उन्होंने कहा, "पिछले पांच वर्षों में बिस्वजीत दैमारी ने विधानसभा में बोडो भाषा और बोडो समुदाय की आवाज बुलंद की है। लेकिन कुछ लोग किसी बोडो नेता को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते।" बसुमतारी ने कहा कि समर्थक फिलहाल कैबिनेट विस्तार के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
भाजपा छोड़ सकते हैं दैमारी?
बसुमतारी का दावा है कि यदि 5 जून को होने वाले कैबिनेट विस्तार में दैमारी को जगह नहीं मिलती है, तो उनके सामने अन्य राजनीतिक विकल्प खुले हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दैमारी भाजपा छोड़कर किसी बोडो-आधारित राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं और अलग बोडोलैंड की मांग को भी मजबूती मिल सकती है।हालांकि, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इन अटकलों को खारिज करते हुए विश्वास जताया कि दैमारी पार्टी में बने रहेंगे।
मुख्यमंत्री सरमा पर टिकी निगाहें
कैबिनेट विस्तार को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरमा को पार्टी के अंदरूनी समीकरणों और बोडो समुदाय की राजनीतिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। 5 जून का कैबिनेट विस्तार न केवल सरकार की दिशा तय करेगा, बल्कि असम की क्षेत्रीय राजनीति पर भी इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

