Assam Congress Politics : असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए विपक्षी खेमे से बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के पिछले एक दशक के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए कांग्रेस ने अपना मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर चल रही लंबी खींचतान को लगभग समाप्त कर दिया है। इस पूरे गठबंधन में सबसे कड़ा मोलभाव विधायक और फायरब्रांड नेता अखिल गोगोई की पार्टी 'राइजोर दल' के साथ देखने को मिला है। कांग्रेस के लिए यह गठबंधन जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। ऊपरी असम और निचले असम के कई क्षेत्रों में राइजोर दल का मजबूत आधार कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस अब बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि गठबंधन में शामिल छोटे दलों को भी साथ लेकर चला जा सके।
राइजोर दल के साथ सावधानी भरा समझौता
कांग्रेस के भीतर खाने से आ रही खबरों के मुताबिक राइजोर दल के साथ गठबंधन तय हो चुका है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने रणनीतिक कारणों से अभी इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया है। कांग्रेस नहीं चाहती कि सीटों के ऐलान से स्थानीय कार्यकर्ताओं का मनोबल कम हो। ऊपरी असम की तीन से चार और निचले असम की दो महत्वपूर्ण सीटें अखिल गोगोई की पार्टी को दी गई हैं। ये ऐसी सीटें हैं जहां कांग्रेस और राइजोर दल दोनों ही जीत की स्थिति में नजर आ रहे थे।
बीजेपी को चकमा देने की रणनीति
कांग्रेस इस बार अपनी चालों को गुप्त रखकर बीजेपी को हैरान करना चाहती है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर सीटों का खुलासा जल्दी हो गया तो सत्ताधारी दल को जवाबी रणनीति बनाने का मौका मिल जाएगा। इसीलिए गौरव गोगोई ने इस मुद्दे पर 'धीरे चलो' की नीति अपनाई है। कांग्रेस ने राइजोर दल की उन मांगों को भी स्वीकार किया है जो पहले काफी कठिन लग रही थीं।
सीटों के संख्या बल पर रस्साकशी सीटों के बंटवारे का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआत में अखिल गोगोई की पार्टी ने 40 सीटों की भारी-भरकम मांग रखी थी। मैराथन बैठकों के बाद इसे घटाकर पहले 20-25 और फिर 14 सीटों पर लाया गया। फिलहाल कांग्रेस चाहती है कि राइजोर दल केवल 11 सीटों पर चुनाव लड़े। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अगर अखिल गोगोई 11 पर राजी नहीं हुए तो कांग्रेस 14 सीटें देने में भी संकोच नहीं करेगी।
पंचायत चुनाव 2025 का रहा बड़ा असर कांग्रेस के इस लचीले रुख के पीछे 2025 के पंचायत चुनावों के नतीजे हैं। इस चुनाव में राइजोर दल ने सबको चौंकाते हुए चौथा स्थान हासिल किया था। वह बीजेपी गठबंधन, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बाद राज्य की चौथी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। अखिल गोगोई की धर्मनिरपेक्ष छवि और किसानों-मजदूरों के बीच उनकी लोकप्रियता कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा प्लस पॉइंट है।
पुराने सहयोगियों से दूरी और नई चुनौतियां
इस बार असम का चुनावी मैदान काफी बदला हुआ है। कांग्रेस ने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ से अपना पुराना नाता तोड़ लिया है। वहीं बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) अब बीजेपी के पाले में जा चुका है। ऐसे में कांग्रेस को मजबूत क्षेत्रीय साथियों की दरकार थी। असम जातीय परिषद (AJP) भी इस गठबंधन का हिस्सा है। लुरीनज्योति गोगोई की अगुवाई वाली एजेपी ने 20 सीटों की मांग की थी, लेकिन उन्हें 5 से 7 सीटों के बीच सीमित रखा जा सकता है।
वामपंथी दलों और क्षेत्रीय ताकतों का समन्वय
कांग्रेस ने इस बार एक व्यापक मोर्चे का गठन किया है। इसमें सीपीआई (एम), सीपीआई और सीपीआई (एमएल) जैसे वामपंथी दल शामिल हैं। इन दलों ने 5 सीटों की मांग की थी लेकिन कांग्रेस उन्हें 3 सीटें देने पर सहमत हुई है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाली 'ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस' को भी दो सीटें दी जा रही हैं। कांग्रेस हर छोटे वोट बैंक को जोड़कर बीजेपी के विजय रथ को रोकने की कोशिश में है।
प्रियंका गांधी का अहम दौरा और स्क्रीनिंग
पार्टी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोराह को गठबंधन की बारीकियों को संभालने की जिम्मेदारी दी है। वहीं दूसरी ओर प्रियंका गांधी वाड्रा 18 फरवरी से असम के दो दिवसीय दौरे पर आ रही हैं। वह कैंडिडेट स्क्रीनिंग कमेटी की चेयरमैन के रूप में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाएंगी। प्रियंका गांधी का यह दौरा असम में कांग्रेस के चुनावी अभियान को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा।