
असम में ‘पसंदीदा अफसर’ पर मेहरबानी? सरकार के फैसले पर सवाल
असम सरकार ने विवादों और विरोध के बावजूद रिटायर्ड IFS अधिकारी एमके यादव का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ा दिया, जिस पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
असम सरकार ने राजनीतिक और कानूनी विरोध के बावजूद विवादों में रहे सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी एमके यादव का कार्यकाल लगातार तीसरी बार बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग में विशेष मुख्य सचिव के रूप में अगले छह महीने के लिए फिर नियुक्त किया है। इस पद के साथ उन्हें एक बार फिर पूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार भी दिए गए हैं।
13 मई को असम कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दी थी और अगले दिन इसे औपचारिक आदेश के जरिए लागू कर दिया गया। इस फैसले के बाद राज्य के पर्यावरण प्रशासन पर एमके यादव की पकड़ और मजबूत हो गई है।
एमके यादव पहले असम के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) रह चुके हैं। असम जैसे विशाल वन क्षेत्रों वाले राज्य में वन विभाग बेहद प्रभावशाली माना जाता है और यादव को फिर से इसी विभाग की पूरी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारी सौंपी गई है।
एमके यादव के कार्यकाल विस्तार की टाइमलाइन
फरवरी 2024: PCCF और HoFF पद से सेवानिवृत्त हुए। केंद्र सरकार ने सेवा विस्तार का अनुरोध खारिज किया, लेकिन असम सरकार ने उन्हें एक साल के अनुबंध पर नियुक्त कर दिया।
फरवरी 2025: पहला बड़ा संविदा विस्तार मिला।
13 मई 2026: असम कैबिनेट ने तीसरे लगातार विस्तार को मंजूरी दी।
14 मई 2026: कार्मिक सचिव सिमंता कुमार दास ने औपचारिक आदेश जारी किया।
एमके यादव को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का करीबी माना जाता है। यही वजह है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार होने के बावजूद, केंद्र की अनिच्छा के बाद भी असम सरकार लगातार उन्हें सेवा विस्तार देती रही है। सरकार के आलोचकों का आरोप है कि यह सब मुख्यमंत्री के प्रति उनकी निष्ठा के कारण हो रहा है।
शुरुआत से विवादों में नियुक्ति
एमके यादव 29 फरवरी 2024 को PCCF और HoFF पद से रिटायर हुए थे। बताया जाता है कि उनके सेवा विस्तार के अनुरोध को केंद्र की कैबिनेट अपॉइंटमेंट्स कमेटी ने मंजूरी नहीं दी थी।इसके बावजूद, रिटायरमेंट के तुरंत बाद असम सरकार ने उन्हें विशेष मुख्य सचिव के रूप में एक साल के अनुबंध पर नियुक्त कर दिया।
यह नियुक्ति शुरुआत से ही विवादों में रही, क्योंकि विशेष मुख्य सचिव का पद आमतौर पर कार्यरत वरिष्ठ IAS अधिकारियों को दिया जाता है, न कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को। हालांकि असम सरकार ने 2018 की उस अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें रिटायर्ड अधिकारियों की संविदा नियुक्ति का प्रावधान है।
नियमों के मुताबिक, अखिल भारतीय सेवा (AIS) के सेवानिवृत्त अधिकारियों को “सार्वजनिक हित” में अनुबंध के आधार पर दोबारा नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए तय शर्तों और सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होती है।
हालांकि विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने यादव की बार-बार नियुक्ति का कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि एक रिटायर्ड AIS अधिकारी को इतने बड़े प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार देना स्थापित प्रशासनिक मानकों का उल्लंघन है।
चुनाव के दौरान बढ़ा विवाद
मार्च 2026 में विधानसभा चुनावों से पहले आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू होने के बाद यह विवाद और गहरा गया। आलोचकों ने सवाल उठाया कि चुनावी अवधि में एक सेवानिवृत्त अधिकारी को इतने अधिकारों के साथ पद पर बनाए रखना कितना उचित है।सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि रिटायर्ड अधिकारी “नॉन-कैडर” माने जाते हैं और उन्हें कार्यरत AIS अधिकारियों के लिए निर्धारित पदों पर नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान कोई सेवानिवृत्त अधिकारी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है।
एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाया कि चुनाव के दौरान एक रिटायर्ड अधिकारी इतने महत्वपूर्ण विभाग का प्रमुख कैसे बना रह सकता है।विपक्ष के नेता देबव्रत सैकिया ने भी मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी। उनका आरोप था कि लगातार सेवा विस्तार कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों को कमजोर करता है।
पुराने विवाद भी रहे साथ
PCCF और HoFF रहते हुए भी एमके यादव कई विवादों में घिरे रहे। उन पर वन भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण को लेकर सवाल उठे थे।केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कथित तौर पर असम वन विभाग को आरक्षित वन क्षेत्रों में बिना केंद्रीय मंजूरी के भूमि उपयोग परिवर्तन के मामलों में कार्रवाई करने को कहा था। इनमें हैलाकांडी जिले का दामछेरा इनरलाइन रिजर्व फॉरेस्ट और असम-नागालैंड सीमा के पास गेलेकी रिजर्व फॉरेस्ट शामिल थे।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी इन मामलों पर सुनवाई की थी। 2 अप्रैल को NGT ने चुनावी ड्यूटी के लिए 1600 असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स कर्मियों की तैनाती संबंधी यादव के आदेश पर रोक लगा दी थी।
EVM विवाद से भी जुड़ा नाम
एमके यादव का नाम 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान भी विवादों में आया था। उस समय वे AEDCL-AMTRON के प्रबंध निदेशक थे, जो EVM प्रबंधन से जुड़ा राज्य उपक्रम था।तब विपक्षी दल असम गण परिषद (AGP) ने EVM में संभावित छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, हालांकि कोई आरोप साबित नहीं हुआ। 2024 में वन विभाग में उनकी पुनर्नियुक्ति के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया।
सरकार पर पक्षपात के आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार ने एमके यादव के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें इनाम किया है। उनका कहना है कि इससे असम में वन और वन्यजीवों को और नुकसान होगा तथा अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

