
राम मंदिर चोरी इनसाइड स्टोरी: हिडन कैमरे में खुला एक्स्ट्रा नोटों का खेल
राम मंदिर महा-घोटाले की इनसाइड स्टोरी: हिडन कैमरे, एक्स्ट्रा नोटों का 'गड्डी खेल' और सिफारिशी चोर; जानें कैसे लूटा जा रहा था भगवान का खजाना।
Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब इस पूरे महा-घोटाले की ऐसी सनसनीखेज 'इनसाइड स्टोरी' सामने आई है, जिसे सुनकर देश का हर राम भक्त सन्न है। विशेष जांच दल (SIT) और ट्रस्ट के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह चोरी कोई साधारण जेबकतरी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसने बकायदा 'लूपहोल्स' (खामियों) का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये पार किए।
इस बीच ये सूचना भी मिल रही है कि जांच टीम ने 70 लाख रूपये से अधिक नकदी बरामद की है, जिसकी गिनती जारी है।
चोरी की शुरुआत कब हुई, शक कैसे गहराया और कैसे 'तीसरी आंख' (हिडन कैमरों) ने इस पूरे पाप का भंडाफोड़ किया आइए इस पूरी साजिश की परत-दर-परत पड़ताल करते हैं।
₹6 लाख की पेटी में ₹500 की गड्डियां गायब; ऐसे गहराया पहला शक
इस महा-घोटाले का खुलासा मई 2026 के आखिरी सप्ताह में हुआ। जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही रकम और रोजाना खाली होने वाली दान पेटियों (हुंडियों) के आंकड़ों का मिलान (ब्योरा) देखा, तो उनके होश उड़ गए:
गड्डियों में रहस्यमयी कमी: अमूमन मंदिर की एक बड़ी दान पेटी से एक बार में लगभग 6 से 7 लाख रुपये कैश निकलता था। लेकिन कुछ हफ्तों से लगातार देखा जा रहा था कि दान पेटी तो पूरी भर रही थी, लेकिन जब कैश गिना जाता तो उसमें ₹500 के नोटों की गड्डियां गायब या बेहद कम मिलती थीं।
कमरे में लगे गुप्त कैमरे: शक गहराने पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बिना किसी को भनक लगे, नोट गिनने वाले अति-संवेदनशील कमरे (Cash Counting Room) में कुछ हिडन कैमरे (Hidden Cameras) इंस्टॉल करवा दिए। सिर्फ एक हफ्ते की हिडन कैमरे की फुटेज ने वो सच उगल दिया जिसने पूरे मंदिर प्रशासन को हिलाकर रख दिया।
सीसीटीवी के आगे 'मानव ढाल' और कपड़ों में कैश: हिडन कैमरे में खुला राज
हिडन कैमरे की फुटेज से साफ हुआ कि नोट गिनने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारी कोई नौसिखिए नहीं थे, वे बकायदा प्लानिंग के तहत चोरी कर रहे थे:
सीसीटीवी को चकमा: कमरे में जो मुख्य सीसीटीवी कैमरा लगा था, उसे चकमा देने के लिए एक कर्मचारी जानबूझकर उस कैमरे के ठीक सामने आकर खड़ा हो जाता था (ताकि कैमरे का व्यू ब्लॉक हो जाए)।
कपड़ों में छिपाते थे नोट: जैसे ही मुख्य कैमरे का व्यू ब्लॉक होता, उसका दूसरा साथी नोटों की बनाई जा रही गड्डियों में से ₹500 की पूरी की पूरी थड्डियां (गड्डियां) चोरी कर अपने कपड़ों के भीतर छुपा लेता था। वे यह भूल गए कि कमरे में गुप्त कैमरे भी उनकी इस हरकत को रिकॉर्ड कर रहे हैं।
'एक्स्ट्रा नोट' और वाउचर का वो 'मास्टरमाइंड खेल' जिसने बैंक को भी ठगा
इस सिंडिकेट ने चोरी का एक ऐसा अचूक तरीका निकाला था जिससे बैंक में पैसे जमा कराते समय भी कोई पकड़ न पाए। इस खेल का मास्टरमाइंड था अनुकल्प मिश्रा, जो चढ़ावे के वाउचर बनाने की पूरी प्रक्रिया को संभालता था। वह अपने बहनोई लवकुश मिश्रा के साथ मिलकर इस खेल को अंजाम दे रहा था:
गड्डी में अतिरिक्त नोट का खेल: नोट गिनते समय ये कर्मचारी हर 100 नोटों की प्रामाणिक गड्डी में कुछ 'एक्स्ट्रा नोट' (अतिरिक्त नगद) डाल देते थे।
बैंक की लापरवाही का फायदा: जब यह रकम बैंक के पास जमा होने जाती, तो बैंक के कर्मचारी समय बचाने के लिए हर गड्डी के एक-एक नोट को गिनने के बजाय सिर्फ 'गड्डियों की संख्या' गिनते थे और उसी के आधार पर वाउचर साइन हो जाता था।
रास्ते में माल साफ: मंदिर से बैंक तक रकम ले जाने के दौरान, अनुकल्प और लवकुश की शह पर गड्डियों में लगाए गए वे एक्स्ट्रा नोट चुपचाप निकाल लिए जाते थे। इसका नतीजा यह होता था कि बैंक के वाउचर से कुल रकम का मिलान भी 100% सही बैठता था और बीच से लाखों रुपये साफ भी हो जाते थे।
लवकुश के घर से ₹10 लाख बरामद: इस भंडाफोड़ के बाद जब पुलिस ने लवकुश मिश्रा के घर पर छापेमारी की, तो वहां से चोरी के 10 लाख रुपये नगद बरामद किए गए।
'सिफारिशी चोरों' का सिंडिकेट और सुरक्षा की घोर लापरवाही
जांच में यह बेहद गंभीर तथ्य सामने आया है कि नोट गिनने के इस पवित्र और गोपनीय काम में लगे सभी 8 कर्मचारी किसी न किसी रसूखदार की सिफारिश या जान-पहचान के दम पर वहां घुसे थे:
चंपत राय के ड्राइवर का चचेरा भाई: ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव मंदिर में व्यवस्थापक का काम देख रहा था। टिन्नू यादव लगातार उस कमरे में आता-जाता था जहां दान पेटियां खुलती थीं। इसी का फायदा उठाकर उसने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की ड्यूटी पर लगवा दिया।
जीजा-साले की जोड़ी: सालों से ट्रस्ट में काम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने सगे बहनोई लवकुश मिश्रा की एंट्री इसी विंग में करा दी थी। इसके अलावा सुभाष चंद्र भी इस कमरे का नियमित चक्कर काटता था।
बिना तलाशी की छूट: सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि ड्यूटी खत्म करके वापस जाते समय किसी भी कर्मचारी की फारीरिक या मेटल डिटेक्टर से तलाशी (Physical Frisking) नहीं ली जाती थी। इसी खुली छूट का फायदा उठाकर ये लोग रोज जेबें भरकर भगवान का पैसा घर ले जा रहे थे।
रामलला के कंगन, पैजनिया और नथ पर भी साफ किया हाथ; अविनाश के बैंक खाते में मिला हिस्सा
यह सिंडिकेट सिर्फ कैश तक सीमित नहीं था। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु रामलला के बाल रूप के लिए जो सोने-चांदी के जेवरात दानपात्र में डालते थे, यह गैंग उस पर भी डाका डाल रहा था:
जेवरों की डकैती: दान पेटी से निकलने वाली सोने-चांदी की बालियां, झुमकी, नथ, और बाल रूप रामलला के कंगन व पैजनिया (पायल) जैसे बहुमूल्य जेवरात भी ये लोग गायब कर देते थे।
पहले चोरी, एंट्री बाद में: इनका नियम था 'चोरी पहले, लिखा-पढ़ी बाद में'। दानपेटी खुलते ही ये कीमती सामान और कैश पहले अलग कर लेते थे, उसके बाद बची हुई राशि का हिसाब-किताब और जेवरों की एंट्री रजिस्टर में की जाती थी, ताकि चोरी का कभी पता ही न चले।
अविनाश शुक्ला के खाते में जमा हो रहा था पाप का पैसा: पकड़े गए आरोपी अविनाश शुक्ला (पांडे) का जब सीसीटीवी फुटेज से मिलान किया गया, तो चौंकाने वाला सच आया। जिस-जिस तारीख को अविनाश कैमरे में चोरी करते दिखा, ठीक उन्हीं तारीखों में उसने अपने पर्सनल बैंक अकाउंट में भारी-भरकम कैश जमा कराया था। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैंक स्टेटमेंट से इसका शत-प्रतिशत मिलान कर इस बात की पुष्टि की है।
एसआईटी (SIT) की इस विस्तृत रिपोर्ट के बाद यह साफ है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर आस्था के नाम पर 'सिफारिशी तंत्र' ने कितना बड़ा घुन लगा दिया था। फिलहाल सभी 8 आरोपी सलाखों के पीछे हैं और उनके बैंक खातों को फ्रीज कर आगे की कूटनीतिक जांच की जा रही है।
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