राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बड़ा बवाल, 1600 CCTV कैमरों के बाद भी कैसे हुई लूट? FIR में क्यों लगे 18 दिन?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रयागराज से तीन बुकलेट जारी कर 2027 चुनाव का बिगुल फूंक दिया है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक और राम मंदिर चंदा चोरी को मुख्य मुद्दा बनाकर '7 सूत्रीय न्याय गारंटी' का ऐलान किया है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अभी से सत्ता पक्ष की घेराबंदी शुरू कर दी है। संगम नगरी प्रयागराज से अखिलेश यादव ने एक ऐसा राजनीतिक दांव चला है, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। अखिलेश यादव ने एक साथ तीन बुकलेट जारी की हैं। पहली बुकलेट उत्तर प्रदेश के युवाओं से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दे 'पेपर लीक' पर है, जबकि दूसरी बुकलेट करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े 'राम मंदिर चंदा चोरी' के मामले पर है।
अखिलेश यादव ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए अब 'नेशन फर्स्ट' का नारा सिर्फ कहने की बात रह गया है, असल में उनके लिए अब 'डोनेशन फर्स्ट' ही सबसे बड़ा धंधा बन चुका है। सपा का मानना है कि जहां एक तरफ लगातार हो रहे पेपर लीक ने नौजवानों के भविष्य को 'अंधेरे कुएं में धकेल' दिया है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर के चंदे में हुई हेराफेरी ने रामभक्तों के भरोसे का 'दीवाला निकाल' दिया है।
युवाओं को अपने पाले में लाने के लिए अखिलेश यादव ने '7 सूत्रीय न्याय गारंटी' का भी कार्ड खेला है। इस गारंटी के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा में विशेष छूट, पारदर्शी और कड़ा परीक्षा कैलेंडर लागू करना, और छात्रों को लंबी दूरी से बचाने के लिए उनके गृह जनपद या नजदीकी जिले में ही परीक्षा केंद्र सुनिश्चित करने का वादा किया गया है।
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: 1600 कैमरों के बाद भी कैसे हुई लूट?
अखिलेश यादव जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, उसकी गंभीरता अयोध्या से आ रही खबरों से भी साफ होती है। राम मंदिर का चढ़ावा सिर्फ रुपये-पैसे नहीं, करोड़ों भक्तों की आस्था का प्रतीक है। लेकिन अब इस चढ़ावे में हेरफेर के आरोपों ने सबको चौंका दिया है। इस मामले में घटनाक्रम पर गौर करें तो बड़े सवाल खड़े होते हैं। 7 जून को कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया। 13 जून को सरकार ने एसआईटी (SIT) बना दी। 23 जून को जांच रिपोर्ट भी आ गई, लेकिन एफआईआर 25 जून को यानी पूरे 18 दिन बाद दर्ज हुई।
जनता पूछ रही है कि जब परिसर में 1600 सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे, तो यह कथित चोरी कैसे हो गई और पुलिस को मुकदमा दर्ज करने में इतने दिन क्यों लगे? इस मामले की गूंज अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तक पहुंच गई है और संघ प्रमुख मोहन भागवत के निर्देश पर क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार संतों से लगातार संवाद कर रहे हैं। चर्चा है कि पीएम मोदी के विदेश दौरे से लौटते ही ट्रस्ट के पुनर्गठन पर बड़ा फैसला हो सकता है। वहीं फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी न करने का फैसला लेते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
नोएडा अग्निकांड: 21वीं मंजिल पर आग और आधे रास्ते में थमा पानी
प्रशासनिक लापरवाही का एक और खौफनाक नजारा सोमवार सुबह नोएडा के सेक्टर-119 स्थित अरण्य सोसाइटी में देखने को मिला। यहाँ 24 मंजिला इमारत के 21वें फ्लोर पर एक फ्लैट में अचानक 'एसी ब्लास्ट' हो गया। देखते ही देखते फ्लैट 'धूं-धूं कर जलने' लगा। लोग जान बचाने के लिए नीचे भागे। पूरा फ्लोर काले धुएं से भर चुका था।
लेकिन असली तमाशा तब शुरू हुआ जब दमकल की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग 21वें फ्लोर पर लगी थी, लेकिन दमकल का पानी सिर्फ 13वीं मंजिल तक ही पहुंच पा रहा था। इसे कहते हैं—'ऊंची दुकान, फीका पकवान'। करोड़ों के फ्लैट बेचने वाले बिल्डर्स आपको 'लंदन' और 'पेरिस' जैसी लाइफस्टाइल का सपना तो बेचते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर जनता को 'राम भरोसे' छोड़ देते हैं। नोएडा में 80 मंजिला सुपरनोवा जैसी गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं, लेकिन दमकल विभाग के पास मौजूद हाइड्रोलिक मशीनें सिर्फ 10 फ्लोर तक ही आग बुझा सकती हैं। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन एक मिडिल क्लास परिवार की गाढ़ी कमाई 'पल भर में खाक' हो गई।

