
चढ़ावे की गिनती से करोड़ों की संपत्ति तक, राम मंदिर मामले में जांच गहराई
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में घोटाले की जांच एसआईटी कर रही है। इस बीच यह जानकारी सामने आ रही है कि 200 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की गई है।
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक यह घोटाला 200 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। जांच एजेंसियों ने अब तक कई कर्मचारियों से जुड़ी करोड़ों रुपये की नकदी, महंगी गाड़ियां और अन्य संपत्तियों का पता लगाया है।
मामले की गंभीरता देखते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों स्तरों पर जांच तेज कर दी गई है। शासन ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जबकि दिल्ली से एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी अयोध्या पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं।
कैसे होती थी चढ़ावे की गिनती?
रामलला के गर्भगृह और दर्शन पथ के पास रखे गए दानपात्रों से नकदी निकालकर मंदिर परिसर में बने एक अत्यंत गोपनीय कक्ष में पहुंचाई जाती थी। सुरक्षा कारणों से इस कमरे की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और यहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था।इस कक्ष में कुल 50 कर्मचारी चढ़ावे की गिनती और निगरानी का कार्य करते थे।
कर्मचारियों की जिम्मेदारियां
नोट गिनने वाले कर्मचारी (24)
निजी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त
नोटों की गिनती और बंडल तैयार करने का काम
अधिकांश कर्मचारियों का वेतन लगभग 14,500 रुपये प्रतिमाह
ट्रस्ट कर्मचारी (12)
गिनती करने वाले कर्मचारियों की निगरानी
पूरी प्रक्रिया की देखरेख
बैंक और ऑडिट टीम (14)
SBI के कर्मचारी
TCS की ऑडिट टीम के सदस्य
वित्तीय सत्यापन और निगरानी की जिम्मेदारी
कैसे खुला करोड़ों की हेराफेरी का मामला?
जांच की शुरुआत तब हुई जब चढ़ावे की गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारियों की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई देने लगा। सीमित आय वाले कई कर्मचारी कुछ वर्षों के भीतर करोड़ों रुपये की संपत्तियों के मालिक बन गए।
जांच के दायरे में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश, राजेश पाठक, रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव, केडी तिवारी, मनीष यादव, करुण और रितिक सिंह समेत कई नाम सामने आए हैं। कर्मचारियों के बीच इन लोगों द्वारा महंगी गाड़ियां, जमीन और मकान खरीदने की चर्चाएं फैलने लगीं। शिकायतों पर कार्रवाई न होने के बाद मामला सार्वजनिक हुआ और धीरे-धीरे राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया।
टिन्नू यादव: ऑटो चालक से कथित 50 करोड़ की संपत्ति तक
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम जांच में सबसे अधिक चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि वह कभी अयोध्या में ऑटो चलाता था और साधारण जीवन व्यतीत करता था, लेकिन वर्तमान में अयोध्या और लखनऊ में उसकी लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की बात कही जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसकी कथित संपत्तियों में एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का हॉस्टल, अयोध्या के तीन रेस्टोरेंट में साझेदारी, लखनऊ में मकान, फॉर्च्यूनर कार और नाका क्षेत्र में दो मंजिला हॉस्टल भवन शामिल हैं।टिन्नू यादव से मंदिर परिसर स्थित PCF यात्री सुविधा केंद्र में पूछताछ की गई है। उसके भतीजे मनीष यादव के पास से कथित रूप से 36 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया है। मनीष यादव भी चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में शामिल बताया जा रहा है।
केडी तिवारी पर भी उठे सवाल
केडी तिवारी मंदिर में चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी संभालते थे। जांच में उन पर करीब 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने और लगभग 5 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं।हालांकि केडी तिवारी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी जिम्मेदारी केवल गहनों का वजन कर रसीद देना था। इसके बाद गहने ट्रस्ट अधिकारियों को सौंप दिए जाते थे और आगे की प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं था। उन्होंने अपनी संपत्ति को परिवार की वैध आय का हिस्सा बताया है।
राजेश पाठक की बदली जीवनशैली जांच का आधार
अयोध्या के खाले पुरवा निवासी राजेश पाठक भी नोट गिनने वाली टीम का हिस्सा थे। जांच एजेंसियां उनके आय स्रोत, संपत्ति विवरण और पिछले पांच-छह वर्षों की आर्थिक प्रगति की जांच कर रही हैं।
अनुकल्प मिश्रा के फार्महाउस और आलीशान मकान पर नजर
अनुकल्प मिश्रा पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अयोध्या के कौशलपुरी क्षेत्र में लगभग 65 लाख रुपये का मकान खरीदा और अपने पैतृक गांव में फार्महाउस भी बनाया।इसके अलावा बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजनों, भागवत कथा और पारिवारिक कार्यक्रमों में खुले तौर पर धन खर्च किए जाने की भी जांच की जा रही है।
लवकुश: कार मैकेनिक से करोड़ों की संपत्ति तक
लवकुश पहले कार मैकेनिक के रूप में काम करता था। आरोप है कि मंदिर में नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदली। उसके द्वारा फैजाबाद में मकान निर्माण और गांव में खुले तौर पर धन खर्च किए जाने की भी जांच की जा रही है।सूत्रों के मुताबिक उसके घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जिनमें कुछ रकम अलमारी में और कुछ गोबर में दबाकर छिपाई गई थी।
अब तक क्या-क्या बरामद हुआ?
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी कार, 3 आईफोन बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि जांच अभी जारी है और आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
केंद्र सरकार भी कर रही निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को अयोध्या भेजा है। अधिकारी ट्रस्ट पदाधिकारियों से विस्तृत बातचीत कर रहे हैं और जांच की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि वे सीधे केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेज रहे हैं।
SIT का गठन, 15 दिन में रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। SIT के प्रमुख सदस्य विजय विश्वास पंत (IAS) अगुवाई कर रहे हैं। किरन एस (IPS) आईजी रेंज को आपराधिक जांच विशेषज्ञ, नीलरतन विशेष सचिव, वित्त विभाग को वित्तीय लेन-देन और ऑडिट जांच की जिम्मेदारी दी गई है। SIT को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। जांच एजेंसियां चढ़ावे की गिनती, नकदी प्रबंधन, संपत्ति खरीद, बैंक लेन-देन और पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना

