
केरल की वित्तीय हालत पर कांग्रेस-LDF आमने-सामने, बयानबाजी तेज
पूर्व वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने केरल को “भिखारी राज्य” कहे जाने पर एंटनी की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक बयान बताया।
केरल के पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता ए.के. एंटनी द्वारा केरल को “भिखारी राज्य” बताए जाने वाली टिप्पणी को तीखे शब्दों में खारिज किया है। उन्होंने इस बयान को “बेहद नकारात्मक” और तथ्यों से परे बताया। बालगोपाल ने पिछली एलडीएफ सरकार की आर्थिक नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि वित्तीय दबाव के बावजूद उनके कार्यकाल में न तो ट्रेजरी भुगतान रुके, न वेतन और न ही पेंशन वितरण में कोई व्यवधान आया।
सरकार बदलने के बाद केरल की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नई यूडीएफ सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करने की तैयारी कर रही है। इसी मुद्दे पर ‘द फेडरल’ ने के.एन. बालगोपाल से बातचीत की।
“भिखारी राज्य” कहना राजनीतिक बयानबाजी
ए.के. एंटनी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बालगोपाल ने कहा कि किसी राज्य को “भिखारी” कहना बहुत गंभीर और नकारात्मक टिप्पणी है। अगर ऐसा दावा किया जाता है तो उसके समर्थन में ठोस तथ्य होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “पिछले पांच से दस वर्षों में वित्तीय दबाव जरूर रहा, लेकिन ट्रेजरी भुगतान, वेतन या पेंशन व्यवस्था कभी ध्वस्त नहीं हुई। राज्य की आर्थिक व्यवस्था में किसी प्रकार की अस्थिरता नहीं आई।”
बालगोपाल ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संस्थाओं की रिपोर्टों में केरल को बेहतर वित्तीय प्रबंधन वाले राज्यों में गिना गया है। उन्होंने बताया कि अप्रैल महीने में राज्य का कर संग्रह देश में सबसे अधिक रहने वालों में शामिल था।
उनके मुताबिक, “केरल को भिखारी राज्य कहना तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह अधिक राजनीतिक बयान लगता है।”
चुनावी वादों का दबाव?
बालगोपाल ने आरोप लगाया कि यूडीएफ ने चुनाव के दौरान पांच बड़ी गारंटियां दी थीं और ए.के. एंटनी अपने अनुभव से जानते हैं कि उन्हें लागू करना आर्थिक रूप से आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा, “संभव है कि ‘भिखारी राज्य’ जैसी बात आगे चलकर चुनावी वादों को कम करने या पीछे हटने का आधार बनाने के लिए कही जा रही हो।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की सरकार ने पहले ही कैबिनेट में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी घोषणाएं की हैं। इससे साफ है कि सरकार खुद मानती है कि राज्य की आर्थिक स्थिति संभालने योग्य है।
श्वेत पत्र पर भरोसा
राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रस्तावित श्वेत पत्र को लेकर बालगोपाल ने कहा कि यदि इसे निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से तैयार किया गया तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
उन्होंने कहा, “राज्य पर केवल डीए और डीआर के कुछ बकाया हैं, जिनके भुगतान की चरणबद्ध योजना पहले से तय है। कई अन्य राज्यों की तरह यहां लंबित भुगतानों की लंबी सूची नहीं है।”
उन्होंने याद दिलाया कि 2001 में ए.के. एंटनी सरकार के दौरान भी ऐसा श्वेत पत्र जारी किया गया था।
“अगर आरोप लगाए गए तो जवाब देंगे”
बालगोपाल ने कहा कि यदि श्वेत पत्र तथ्यों के बजाय राजनीतिक आरोपों का दस्तावेज बनता है, तो एलडीएफ आंकड़ों के साथ जवाब देगा।
उन्होंने कहा, “सरकारी दस्तावेज निष्पक्ष और पेशेवर होने चाहिए। यह किसी पार्टी का नहीं बल्कि राज्य का दस्तावेज होता है।”
उन्होंने कांग्रेस शासित राज्यों — कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश — का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वेतन भुगतान में देरी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। संभव है कि एंटनी की सोच उन अनुभवों से प्रभावित हो, लेकिन केरल की स्थिति अलग है।
विपक्ष में रचनात्मक भूमिका निभाएगा एलडीएफ
नई यूडीएफ सरकार के प्रति एलडीएफ के रुख पर बालगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा, “पिनराई विजयन, एमवी गोविंदन और विनॉय विश्वम जैसे नेताओं का शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना हमारी सकारात्मक मंशा दिखाता है।”
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2021 में कांग्रेस ने कोविड का हवाला देकर शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था और पिछले बजट सत्र में भी कार्यवाही से दूरी बनाई थी।
बालगोपाल ने स्पष्ट किया कि एलडीएफ उस रास्ते पर नहीं चलेगा। उन्होंने कहा, “राज्य के हित में जो भी फैसला होगा, हम उसका समर्थन करेंगे। लेकिन अगर कोई कदम जनता के हित के खिलाफ होगा तो हम उसका मजबूती से विरोध करेंगे।”

