लॉरेंस ऑफ पंजाब सीरीज पर मचा बवाल, पंजाब में बैन लगाने की तैयारी, हाईकोर्ट तक पहुँचा मामला
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लॉरेंस ऑफ पंजाब सीरीज पर मचा बवाल, पंजाब में बैन लगाने की तैयारी, हाईकोर्ट तक पहुँचा मामला

लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। उस पर सिधू मूसेवाला की हत्या का मुख्य आरोपी होने के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा कई हाई-प्रोफाइल मामलों में मुकदमा चलाया जा रहा है।


पंजाब में गैंगस्टर कल्चर और संगठित अपराध के महिमामंडन को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। आगामी 27 अप्रैल को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' (Lawrence of Punjab) विवादों के घेरे में आ गई है। पंजाब पुलिस ने इस सीरीज को राज्य की कानून-व्यवस्था और युवाओं की मानसिकता के लिए 'खतरनाक' बताते हुए केंद्र सरकार से इसे ब्लॉक करने की आधिकारिक मांग की है।

IT एक्ट की धारा 69A का इस्तेमाल

पंजाब पुलिस की स्पेशल डीजीपी (साइबर क्राइम) वी. नीरजा ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत सीरीज की रिलीज पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। पुलिस का तर्क है कि यह सीरीज कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके आपराधिक सफर पर आधारित है, जो समाज में गलत संदेश दे सकती है।

अपराध के महिमामंडन (Glorification) का डर

पुलिस और प्रशासन को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि इस सीरीज में असली फुटेज और नाटकीय रूपांतरण (dramatization) के जरिए संगठित अपराध को 'ग्लैमराइज' यानी आकर्षक बनाकर पेश किया जा सकता है। सीरीज में मशहूर पंजाबी गायक सिधू मूसेवाला की हत्या जैसी हाई-प्रोफाइल वारदातों का भी जिक्र है। अधिकारियों को डर है कि इस तरह का चित्रण युवाओं के मन में अपराधी बनने के प्रति आकर्षण पैदा कर सकता है, जो पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य के लिए बेहद घातक है।

पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गैंगस्टर आधारित सामग्री पंजाब की सांस्कृतिक विरासत और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। पहले भी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बिश्नोई के ऑनलाइन इंटरव्यू और सामग्री को हटाने के निर्देश दिए थे, क्योंकि कोर्ट का मानना था कि इससे चल रहे मुकदमों और गवाहों पर बुरा असर पड़ सकता है।

राजा वड़िंग ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इस मामले को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर मजबूती से उठाया है। वड़िंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस सीरीज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में तर्क दिया कि लॉरेंस बिश्नोई जैसे खतरनाक अपराधी को एक 'प्रभावशाली व्यक्ति' के रूप में पेश करना उन हजारों परिवारों के साथ अन्याय है जिन्होंने अपराध की आग में अपनों को खोया है।

वड़िंग ने पत्र में लिखा, "पंजाब गुरुओं और पीरों की धरती है, जिसकी एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। पंजाब की पहचान लॉरेंस बिश्नोई जैसे अपराधी से जोड़ना पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत का अपमान है।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सीरीज रिलीज होती है, तो इसके परिणाम 'खतरनाक और विनाशकारी' हो सकते हैं।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL)

मामला केवल पत्र तक ही सीमित नहीं रहा। राजा वड़िंग ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। उन्होंने एक जनहित याचिका दायर कर सीरीज पर स्टे लगाने की मांग की है। याचिका में राज्य के सामाजिक-आपराधिक माहौल और युवाओं पर इसके नकारात्मक प्रभाव का हवाला दिया गया है।

सीरीज के निर्माताओं का पक्ष

दूसरी ओर, सीरीज के निर्माताओं का कहना है कि यह सीरीज केवल एक अपराधी के जीवन का अध्ययन है, जिसमें यह दिखाया गया है कि कैसे छात्र राजनीति, संगीत उद्योग और मीडिया के पारिस्थितिकी तंत्र के बीच एक आपराधिक पहचान विकसित होती है। लेकिन पंजाब पुलिस ने न केवल रिलीज रोकने, बल्कि इसके ट्रेलर को भी वैश्विक स्तर पर ब्लॉक करने का आग्रह किया है।

लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। उस पर सिधू मूसेवाला की हत्या का मुख्य आरोपी होने के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा कई हाई-प्रोफाइल मामलों में मुकदमा चलाया जा रहा है। हाल ही में कनाडा में एक भारतीय मूल के व्यवसायी की हत्या और अभिनेता रणवीर सिंह व सलमान खान को दी गई धमकियों में भी बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया है।

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