बंगाल में BJP की ऐतिहासिक एंट्री, संतुलित मंत्रिमंडल से दिया बड़ा संकेत
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बंगाल में BJP की ऐतिहासिक एंट्री, संतुलित मंत्रिमंडल से दिया बड़ा संकेत

पश्चिम बंगाल में BJP की पहली सरकार बनी। सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि पार्टी ने सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन साधने की कोशिश की।


पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत के बाद शनिवार को राज्य की राजनीति ने एक नया अध्याय देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे, जहां उन्होंने एक विशेष जुलूस में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य मौजूद थे।

यह केवल शपथ ग्रहण समारोह नहीं था, बल्कि भाजपा की नई राजनीतिक रणनीति और बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत करने के प्रतीक के रूप में भी देखा गया। बंगाल की पहली भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल में संगठन के पुराने चेहरों के साथ जातीय, आदिवासी और महिला प्रतिनिधित्व को शामिल करने की कोशिश साफ दिखाई दी।

बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी

भाजपा की प्रचंड जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ पांच मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, खुदीराम टुडू और पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक शामिल रहे।खुदीराम टुडू ने पारंपरिक आदिवासी पोशाक में संथाली भाषा में शपथ लेकर समारोह को विशेष सांस्कृतिक पहचान दी।

रवींद्र जयंती पर बंगाली संस्कृति के साथ भाजपा का संदेश

शपथ ग्रहण समारोह रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती यानी ‘रवींद्र जयंती’ के दिन आयोजित किया गया। कार्यक्रम स्थल पर भगवा झंडों के साथ बंगाली सांस्कृतिक प्रतीकों को भी प्रमुखता दी गई।ब्रिगेड ग्राउंड के आसपास झालमुड़ी स्टॉल, बंगाली मिठाइयों के काउंटर और पारंपरिक सजावट के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ खुद को जोड़ना चाहती है।समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

भाजपा के पुराने संगठनात्मक संघर्ष को सम्मान

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से ‘साष्टांग प्रणाम’ कर बंगाल की जनता का अभिवादन किया। उन्होंने 97 वर्षीय जनसंघ के वरिष्ठ नेता माखन लाल सरकार को सम्मानित भी किया।भाजपा नेताओं के अनुसार, माखन लाल सरकार लंबे समय तक उत्तर बंगाल में संगठन निर्माण से जुड़े रहे और उस दौर में पार्टी को मजबूत करने में योगदान दिया, जब भाजपा बंगाल में बेहद कमजोर राजनीतिक ताकत मानी जाती थी।उनकी मौजूदगी को भाजपा की पुरानी वैचारिक पीढ़ी और नई नेतृत्व टीम के बीच एक प्रतीकात्मक पुल के रूप में देखा गया।

मंत्रिमंडल में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

भाजपा के नए मंत्रिमंडल की संरचना में विभिन्न सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति साफ नजर आई।पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को संगठन में उनकी वरिष्ठता और लंबे योगदान के कारण मंत्रिमंडल में जगह दी गई। पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और वैचारिक आधार को भरोसा दिलाने के लिए उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।वहीं अग्निमित्रा पॉल को शामिल कर भाजपा ने महिला मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने का संकेत दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब केवल वैचारिक राजनीति नहीं, बल्कि महिलाओं के बीच कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

मातुआ और आदिवासी समुदाय पर खास फोकस

अशोक किर्तनिया को मातुआ समुदाय के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में प्रभाव रखने वाला मातुआ समुदाय भाजपा का बड़ा वोट बैंक बन चुका है।नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और शरणार्थी राजनीति के कारण इस समुदाय का राजनीतिक महत्व लगातार बढ़ा है। भाजपा ने किर्तनिया को शामिल कर इस समर्थन आधार को मजबूत रखने का संदेश दिया।दूसरी ओर, जंगमहल क्षेत्र से आने वाले खुदीराम टुडू को शामिल कर आदिवासी प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया गया। जंगमहल क्षेत्र में भाजपा ने चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की थी।

उत्तर बंगाल को भी मिला प्रतिनिधित्व

पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने उत्तर बंगाल को भी मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया।राजबंशी समुदाय से आने वाले प्रमाणिक की मौजूदगी भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत पार्टी उत्तर बंगाल में जातीय और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति को साधना चाहती है।

बंगाल की राजनीति में ‘भगवाकरण’ की चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति अब तेजी से पहचान आधारित राजनीति की ओर बढ़ रही है। राजनीतिक टिप्पणीकार देबाशीष चक्रवर्ती ने इसे बंगाल की राजनीति का “धीरे-धीरे भगवाकरण” बताया।हालांकि उनका कहना है कि भाजपा की असली परीक्षा अब शासन में होगी। पार्टी को यह साबित करना होगा कि वह राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ाए बिना सभी समुदायों को साथ लेकर चल सकती है।

कानून व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा पर नजर

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने राज्य में कानून व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और पक्षपातपूर्ण पुलिसिंग को बड़ा मुद्दा बनाया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने RG कर अस्पताल रेप-मर्डर केस और संदेशखाली से जुड़े मामलों की दोबारा समीक्षा की बात कही है।इसी बीच चुनाव बाद हिंसा और अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने की खबरों ने भी चिंता बढ़ा दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा सरकार बंगाल की बहुलतावादी और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखते हुए राज्य में स्थिर और समावेशी शासन दे पाएगी। यही आने वाले समय में उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी।

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