
'बंगाल का अंधकार मोदी सरकार की देन,' चुनाव के बाद झड़पों पर ममता बनर्जी का हमला
ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि चुनावी हार के बाद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को डराया और धमकाया जा रहा है। टीएमसी के कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 177 सीटों पर वोटों की गिनती में बड़े पैमाने पर धांधली (Rigging) की है, और इसी हेरफेर के दम पर हाल ही में संपन्न हुए राज्य के चुनावों में जीत हासिल की है।
कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय धरने के दौरान ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि चुनावी हार के बाद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को डराया और धमकाया जा रहा है। भ्रष्टाचार और जबरन वसूली (Corruption and Extortion) के आरोपों के तहत टीएमसी के कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें जेल में डाला जा रहा है। इसके साथ ही, जमीन पर काम करने वाले छोटे कार्यकर्ताओं पर लगातार हिंसक हमले हो रहे हैं। इस संकट की घड़ी में ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि पूरी पार्टी उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी है और वे इस दमनकारी नीति के सामने कभी नहीं झुकेंगी।
विपक्ष एकजुट: दिल्ली में बनेगी 'INDIA गठबंधन' की रणनीति
कोलकाता के मध्य में स्थित 'एसप्लेनेड वाई-चैनल' पर टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हो रही चुनाव बाद की हिंसा के विरोध में एक विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने एक राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। उन्होंने एलान किया कि देश के सभी प्रमुख विपक्षी दल बहुत जल्द भाजपा की तानाशाही नीतियों के खिलाफ एक साझा और एकजुट राष्ट्रीय कार्ययोजना (Unified National Action Plan) लेकर सामने आएंगे।
उन्होंने पुष्टि की कि 'INDIA गठबंधन' के शीर्ष नेता अगले कुछ दिनों के भीतर दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। अगले हफ्ते होने वाली गठबंधन की औपचारिक बैठक से पहले इस रणनीतिक बैठक का उद्देश्य पूरे देश में एक समन्वित और मजबूत आंदोलन खड़ा करना है। आपको बता दें कि ममता बनर्जी को इस धरने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। टीएमसी ने पहले पास ही में स्थित 'रानी रासमणि रोड' पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन कोलकाता पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद ममता बनर्जी को एसप्लेनेड वाई-चैनल पर धरने पर बैठना पड़ा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के माध्यम से ममता बनर्जी ने इस धरने के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह "चुनाव के बाद कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचारों, बिना किसी पुनर्वास (Rehabilitation) के गरीब फेरीवालों को जबरन हटाए जाने, नीट (NEET) परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं और धोखाधड़ी, तथा भाजपा सरकार की प्रतिशोध से भरी हुई कार्रवाई" के खिलाफ जनता की आवाज है।
पुलिस प्रशासन के रवैये पर भड़कीं ममता बनर्जी
धरने की जगह को लेकर हुए विवाद पर ममता बनर्जी ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने हाथ में मेगाफोन (लाउडस्पीकर) लेकर उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए कहा,
"हमें उस जगह पर कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं दी गई जहां हमने अनुरोध किया था। और इस वैकल्पिक जगह पर भी, पुलिस ने हमें न तो मंच बनाने दिया और न ही माइक्रोफोन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी। हम इस तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल को उसी जगह पर कार्यक्रम करने की अनुमति दी जाती है जहां हमें रोका गया, या उन्हें माइक्रोफोन का उपयोग करने दिया जाता है, तो हम इस भेदभाव के खिलाफ सीधे अदालत (Court) का दरवाजा खटखटाएंगे। कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए, इसे किसी चुनिंदा राजनीतिक फायदे के लिए भेदभावपूर्ण तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।"
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी हंगामा और अफरा-तफरी का माहौल भी देखने को मिला। जब पूर्व मुख्यमंत्री अपना भाषण दे रही थीं, तब टीएमसी कार्यकर्ता लगातार भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी कर रहे थे। ममता बनर्जी ने पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा, "जो लोग पुलिस की धमकियों और डराने-धमकाने की परवाह किए बिना आज यहां पहुंचे हैं, उन्हें यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि वर्दी में मौजूद इन अधिकारियों का इस्तेमाल भाजपा सरकार अपने उन राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए कर रही है, जो उनके कानूनी कार्यक्षेत्र का हिस्सा ही नहीं हैं। टीएमसी के गरीब कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना पुलिस की नौकरी का हिस्सा नहीं है।"
इस धरने के मंच पर एक और बात ध्यान देने योग्य थी। टीएमसी सुप्रीमो के साथ मंच पर पार्टी के पुराने और भरोसेमंद चेहरे ही नजर आए—जिनमें फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, कल्याण बनर्जी, शोभनदेब चट्टॉपाध्याय, चंद्रिमा भट्टाचार्य और डोला सेन शामिल थे। हालिया चुनावों में टीएमसी के टिकट पर जीतने वाले कई नए और युवा चेहरे इस धरने से पूरी तरह गायब दिखे, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह धरना उनके भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को हुए हमले, चुनाव बाद की हिंसा और फेरीवालों की समस्याओं के खिलाफ है, और यह तय कार्यक्रम के अनुसार शाम तक जारी रहेगा।
'मोदी ने बंगाल को असामाजिक तत्वों के हवाले कर दिया'
ममता बनर्जी ने सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हालिया हमले को एक बेहद सोची-समझी और गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया, "भाजपा ने बाहर से अपने गुंडों और असामाजिक तत्वों को पहले ही बंगाल में घुसा दिया था। उन्हें बकायदा खाना खिलाया गया और यह सिखाया-पढ़ाया गया कि उन्हें किस तरह हमला करना है और क्या बोलना है। उस दिन अगर टीएमसी के एक वफादार कार्यकर्ता ने ऐन वक्त पर अभिषेक को हेलमेट नहीं दिया होता, तो उन पर फेंका गया भारी पत्थर उनके सिर पर लगता और यह हमला जानलेवा साबित हो सकता था।"
उन्होंने आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमले के बाद घायल अभिषेक बनर्जी को जिन निजी अस्पतालों में ले जाया गया, उन पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले भाजपा तंत्र द्वारा "भारी दबाव" बनाया गया ताकि वे घायल नेता को अपने अस्पताल में भर्ती न करें और उनका इलाज न हो सके। ममता ने कड़े शब्दों में कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे पश्चिम बंगाल को असामाजिक तत्वों और बुलडोजर संस्कृति को बढ़ावा देने वाले राजनेताओं के हाथों में छोड़ दिया है, जिससे हमारा यह प्रगतिशील राज्य पूरी तरह से अंधकार की ओर धकेला जा रहा है।"
इसके साथ ही, टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर खड़े हुए नए विवाद पर भी ममता बनर्जी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। दरअसल, विवाद इस बात को लेकर है कि टीएमसी विधायकों ने शोभनदेब चट्टॉपाध्याय को विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) बनाने के पक्ष में हस्ताक्षर किए थे या नहीं। इस पर ममता ने कहा कि सभी विधायकों ने पार्टी की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार ही अटेंडेंस बुक (उपस्थिति पुस्तिका) पर अपने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने कहा, "अगर विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) को उन हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता या सत्यता पर कोई भी संदेह या भ्रम था, तो उन्हें उन हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच (Forensic Test) करानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा करने के बजाय, भाजपा केवल एक गंदी और ओछी राजनीतिक चाल चल रही है ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके।"
नीतिगत संप्रभुता और भविष्य का संघर्ष
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो जाता है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक और टकराव से भरी होने वाली है। एक तरफ जहाँ भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपनी 'नीतिगत संप्रभुता' और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट करने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली 'INDIA गठबंधन' की बैठक यह तय करेगी कि क्या विपक्ष मिलकर केंद्र की नीतियों और राज्य स्तर पर हो रही इस सियासी लड़ाई का कोई ठोस मुकाबला कर पाता है या नहीं।

