बेंगलुरु से मैसूरु मात्र 30 मिनट में! दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन युग
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प्रतीकात्मक चित्र।

बेंगलुरु से मैसूरु मात्र 30 मिनट में! दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन युग

शुरुआती घोषणाओं में मैसूरु-बेंगलुरु खंड को शामिल नहीं करने से क्षेत्रीय जनता और प्रतिनिधियों में निराशा थी। लेकिन नए एलाइनमेंट मैप ने इन चिंताओं को दूर किया है।


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बेंगलुरु/मैसूरु: दक्षिण भारत के बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। महत्वाकांक्षी 'हाई-स्पीड रेल' (बुलेट ट्रेन) परियोजना अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। केंद्रीय बजट 2026 में बेंगलुरु को हैदराबाद और चेन्नई से जोड़ने वाली बुलेट ट्रेन परियोजनाओं की घोषणा के बाद, नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इन गलियारों के लिए प्रारंभिक एलाइनमेंट मैप (मार्ग मानचित्र) जारी कर दिए हैं। कर्नाटक के लिए सबसे उत्साहजनक बात यह है कि इस परियोजना को अब मैसूरु तक विस्तारित करने के स्पष्ट संकेत मिले हैं।

मैसूरु-बेंगलुरु विस्तार: 157 किमी का सफर और 5 मुख्य स्टेशन

शुरुआती घोषणाओं में मैसूरु-बेंगलुरु खंड को शामिल नहीं किए जाने से क्षेत्रीय जनता और प्रतिनिधियों में निराशा थी। लेकिन नए एलाइनमेंट मैप ने इन चिंताओं को दूर कर दिया है। प्रस्तावित 157.34 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में कुल पांच प्रमुख स्टेशनों की पहचान की गई है। मैसूरु से शुरू होने वाली यह बुलेट ट्रेन मांड्या, रामनगर, बेंगलुरु के केंगेरी और हुस्कुर के पास इलेक्ट्रॉनिक सिटी से होकर गुजरेगी। खास बात यह है कि रामनगर को पहले के प्रस्तावों में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन नए मार्ग में इसे जगह दी गई है। यह लाइन होसकोट के पास कोडीहल्ली में मुख्य बेंगलुरु-चेन्नई और बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर के साथ मिल जाएगी।

समय की भारी बचत: हवाई यात्रा से भी तेज होगा सफर

इस परियोजना के लागू होने से बेंगलुरु और मैसूरु के बीच की दूरी महज 30 से 40 मिनट में सिमट जाएगी। इसके अलावा, अन्य शहरों के बीच भी यात्रा समय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा...

बेंगलुरु-चेन्नई: 306 किमी का यह सफर, जिसे तय करने में वर्तमान में 6-7 घंटे लगते हैं, बुलेट ट्रेन के जरिए मात्र 1 घंटा 13 मिनट में पूरा होगा। यह रूट बैयप्पनहल्ली से शुरू होकर व्हाइटफील्ड और कोलार जैसे आईटी हब से गुजरेगा।

बेंगलुरु-हैदराबाद: 607.03 किमी लंबे इस कॉरिडोर के पूरा होने पर यात्रा का समय घटकर मात्र 2 घंटे रह जाएगा। यह हवाई यात्रा (चेक-इन और सुरक्षा जांच मिलाकर) से भी काफी तेज साबित होगा।

मैसूरु को शामिल करने के पीछे के ठोस कारण

मैसूरु-कोडागु के सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने इस मार्ग को शामिल करने के लिए लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बनाया था। इसके अलावा, एक जर्मन विशेषज्ञ समिति द्वारा किए गए व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) ने भी पुष्टि की है कि मैसूरु-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन परियोजना आर्थिक और परिचालन रूप से बेहद सफल होगी।

अर्थव्यवस्था और विकास को मिलेगा बढ़ावा

मैसूरु और बेंगलुरु के बीच 10-लेन एक्सप्रेसवे होने के बावजूद ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। चूंकि आईटी उद्योग अब मैसूरु की ओर रुख कर रहा है, ऐसे में यह ट्रेन सेवा बेंगलुरु पर दबाव को कम करेगी। इसके साथ ही, मैसूरु, मांड्या और रामनगर में पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर को भी इससे जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह विशाल नेटवर्क दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

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