
बेंगलुरु-मैसूर सिर्फ 40 मिनट में ! बुलेट ट्रेन प्लान ने बढ़ाई उम्मीदें
दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी पकड़ रही है। मैसूर, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद को जोड़ने वाला नेटवर्क यात्रा और अर्थव्यवस्था बदल सकता है।
दक्षिण भारत के परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने वाली हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। केंद्रीय बजट 2026 में बेंगलुरु को हैदराबाद और चेन्नई से जोड़ने वाली बुलेट ट्रेन परियोजनाओं की घोषणा के बाद नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इन कॉरिडोरों के प्रारंभिक रूट मैप जारी कर दिए हैं।कर्नाटक के लिए सबसे बड़ी और सकारात्मक खबर यह है कि इस परियोजना का विस्तार मैसूर तक भी किया जा सकता है। इसके लिए प्रारंभिक रूट एलाइनमेंट भी तैयार कर लिया गया है।
मैसूर-बेंगलुरु रूट भी शामिल
केंद्रीय बजट की शुरुआती घोषणा में मैसूर-बेंगलुरु खंड को शामिल नहीं किया गया था, जिससे क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों में निराशा थी। लेकिन अब जारी किए गए नए एलाइनमेंट मैप में मैसूर को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने का स्पष्ट संकेत मिला है।अगर यह परियोजना लागू होती है तो बेंगलुरु और मैसूर के बीच यात्रा पूरी तरह बदल सकती है। दोनों शहरों के बीच सफर महज 30 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
पांच प्रमुख स्टेशन होंगे
करीब 157.34 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मैसूर-बेंगलुरु कॉरिडोर पर पांच बड़े स्टेशन चिन्हित किए गए हैं।मैसूर से शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन मंड्या, रामनगर, बेंगलुरु के केंगेरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास हुस्कुर से होकर गुजरेगी।दिलचस्प बात यह है कि पहले के प्रस्तावों में रामनगर स्टेशन शामिल नहीं था, लेकिन नए रूट में इसे भी जगह दी गई है।यह लाइन होसकोटे के पास कोडिहल्ली में जाकर मुख्य बेंगलुरु-चेन्नई और बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर से जुड़ जाएगी।
मैसूर को जोड़ने के पीछे मजबूत वजह
मैसूर-कोडागु से सांसद Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar लगातार इस रूट को शामिल करने की मांग कर रहे थे।इसके अलावा जर्मन विशेषज्ञ समिति की व्यवहार्यता रिपोर्ट में भी कहा गया कि मैसूर-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन परियोजना आर्थिक और परिचालन दोनों दृष्टि से सफल हो सकती है।हालांकि 10-लेन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा समय कम हुआ है, लेकिन दोनों शहरों के बीच ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है।
आईटी उद्योग भी तेजी से मैसूर की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अगर कर्मचारी 30-40 मिनट में मैसूर से बेंगलुरु या इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी पहुंच सकेंगे, तो इससे बेंगलुरु पर दबाव काफी कम हो सकता है।इसके साथ ही मैसूर, मंड्या और रामनगर में पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
बेंगलुरु-चेन्नई सफर सिर्फ 73 मिनट
फिलहाल बेंगलुरु और चेन्नई के बीच ट्रेन से यात्रा करने में 5 से 6 घंटे और सड़क मार्ग से 6 से 7 घंटे तक लग जाते हैं।लेकिन प्रस्तावित 306 किलोमीटर लंबा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर इस यात्रा समय को घटाकर सिर्फ 1 घंटा 13 मिनट कर सकता है।यह रूट बेंगलुरु के बैयप्पनहल्ली से शुरू होकर व्हाइटफील्ड, होसकोटे के पास कोडिहल्ली और कोलार से गुजरते हुए तमिलनाडु में प्रवेश करेगा।कोडिहल्ली को ऐसा जंक्शन माना जा रहा है, जहां तीनों हाई-स्पीड रेल रूट आपस में जुड़ सकते हैं।
बेंगलुरु-हैदराबाद सिर्फ 2 घंटे दूर
बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच व्यावसायिक और आईटी कनेक्टिविटी पहले से ही बेहद मजबूत मानी जाती है।करीब 607 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर सिर्फ 2 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।विशेषज्ञों का कहना है कि बुलेट ट्रेन से यात्रा करना मौजूदा हवाई यात्रा से भी तेज साबित हो सकता है, क्योंकि एयरपोर्ट पहुंचने, सुरक्षा जांच और शहर के भीतर आने-जाने में काफी समय लगता है।
दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा
मैसूर, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद को जोड़ने वाला यह विशाल हाई-स्पीड रेल नेटवर्क दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार इससे आईटी, उद्योग, पर्यटन, रियल एस्टेट और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा और दक्षिण भारत में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का नया युग शुरू हो सकता है।
(यह लेख मूल रूप से 'द फेडरल कर्नाटक' में प्रकाशित हुआ था।)

