भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला आज, हाई अलर्ट जारी
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भोजशाला प्रांगण और गलियारा। फाइल फोटो।

भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला आज, हाई अलर्ट जारी

भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला आज आना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच 12 लेयर में सुरक्षा व्यवस्था को बांटा गया..


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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अपना ऐतिहासिक फैसला सुना सकती है। वर्षों से चले आ रहे इस अत्यंत संवेदनशील और कानूनी रूप से जटिल विवाद में कुल पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन (हस्तक्षेप याचिकाओं) पर लंबी सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जस्टिस की डबल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' और मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकीलों ने सभी समुदायों और आम जनता से क्षेत्र में शांति, धैर्य और आपसी सौहार्द बनाए रखने की विशेष अपील की है।

जुमे की नमाज के चलते बढ़ी संवेदनशीलता

हाईकोर्ट के संभावित फैसले के मद्देनजर धार और इंदौर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। आज शुक्रवार का दिन होने के कारण संवेदनशीलता काफी बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज के लोग भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करते हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर पुलिस की विशेष साइबर सेल लगातार निगरानी रख रही है, ताकि भड़काऊ पोस्ट या गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जा सके।

12 लेयर में अभेद्य घेराबंदी और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात

धार शहर और विवादित परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। धार पुलिस कंट्रोल रूम में जिलेभर से 1200 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। एसपी सचिन शर्मा ने व्यक्तिगत रूप से सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और पुलिस बल को कड़े निर्देश जारी किए हैं। शहर की सुरक्षा को कुल 12 लेयर (स्तरों) में विभाजित किया गया है। पुलिस ने दोनों पक्षों के प्रमुख व्यक्तियों से संवाद स्थापित कर शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी तैयार रहने के आदेश दिए गए हैं।

कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि

इस विवाद ने 2022 में तब नया मोड़ लिया जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य सदस्यों ने 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने और हिंदू समाज को वहां पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई है। याचिकाओं में प्रमुख रूप से नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, परिसर के भीतर नमाज पढ़ने पर रोक, एक विशेष ट्रस्ट का गठन करने और वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम (लंदन) में रखी मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को वापस भारत लाने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।

ASI का वैज्ञानिक सर्वे और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

वर्ष 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने भोजशाला परिसर का लगातार 98 दिनों तक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे किया था। इस सर्वे के बाद, 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को दिनभर निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना करने की अनुमति प्रदान की थी। इसके पश्चात, हाईकोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल से शुरू हुई, जो 12 मई तक निरंतर चली और अब फैसला आने की स्थिति में है।

दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क और दावे

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और ASI की सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और शिक्षा का केंद्र बताया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने राजा भोज के प्रसिद्ध ग्रंथ 'समरांगण सूत्रधार' का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि भोजशाला की वास्तुकला मंदिर निर्माण के प्राचीन मानकों पर आधारित है। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि यह परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने ASI की सर्वे रिपोर्ट और वहां उपलब्ध तस्वीरों की स्पष्टता पर भी सवाल उठाए। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि धार्मिक स्वरूप तय करने का विषय सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है और वर्तमान में वहां कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है।

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