यूपी की हारी सीटों पर बीजेपी का फोकस बढ़ा, बंगाल मॉडल पर भरोसा
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यूपी की हारी सीटों पर बीजेपी का फोकस बढ़ा, बंगाल मॉडल पर भरोसा

बीजेपी ने 2027 यूपी चुनाव के लिए बूथ स्तर पर तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने बंगाल मॉडल और संगठन की ताकत से समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले की काट तलाश रही है।


पश्चिम बंगाल में प्रचंड जीत के बाद बीजेपी के हौसले बुलंद हैं और अब नजर देश के सबसे बड़े सूबे में से एक उत्तर प्रदेश पर है। साल 2027 में बीजेपी के पास हैट्रिक लगाने का अवसर है। बंगाल में बूथ स्तर पर बेहतरीन काम के बाद बीजेपी ने 1.76 लाख बूथ पालक बनाने जा रही है। लेकिन खास बात यह है कि बीजेपी उन 61 सीटों पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी जो 2022 के चुनाव में हार गई थी।कैबिनेट विस्तार के बाद बीजेपी ने राज्य स्तरीय संगठन को और मजबूत करने का फैसला किया है।

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में हुई संगठनात्मक बैठक कैबिनेट विस्तार के दो दिन बाद आयोजित की गई। बैठक में साफ तौर पर यह लक्ष्य तय किया गया कि लोकसभा चुनाव 2024 में हुई कमियों को दूर कर 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ी जीत दिलानी है।

61 सीटों पर खास नजर

बूथ पालक रणनीति के तहत उन 61 विधानसभा सीटों पर खास फोकस करने का फैसला लिया गया, जिन्हें बीजेपी ने 2017 में जीता था लेकिन 2022 के चुनाव में हार गई। इन सीटों को दोबारा जीतने के लिए जिलाध्यक्षों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। हार के कारणों की बूथ स्तर तक समीक्षा करने और कमजोर कड़ियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए।

पार्टी ने खास तौर पर उन बूथों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है, जहां पिछले चुनाव में प्रदर्शन कमजोर रहा था। बूथ समितियों में बदलाव, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

इसके साथ ही पन्ना प्रमुख, शक्ति केंद्र और लाभार्थी संपर्क अभियान जैसे कार्यक्रमों की जमीनी स्थिति का आकलन करने के निर्देश भी जिलाध्यक्षों को दिए गए, ताकि यह पता चल सके कि संगठन वास्तव में कितनी मजबूती से काम कर रहा है।

यूपी में बंगाल वाला माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल

अगले एक महीने के भीतर प्रदेश के 1918 मंडलों, 27,633 शक्ति केंद्रों और सभी 1,62,459 विधानसभा बूथों का विस्तृत आकलन करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया गया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में अपनाए गए माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल को उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जाए। इसके तहत बूथ स्तर तक संगठन की पकड़ मजबूत करने और हर वोटर तक पहुंच बनाने पर जोर रहेगा।

इसके अलावा विपक्षी दलों की ताकत, कमजोरियों और उनकी चुनावी रणनीति को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।SIR प्रक्रिया के बाद यूपी में बने करीब 14 हजार नए बूथों पर बूथ कमेटी, बूथ अध्यक्ष और बूथ पालकों की नियुक्ति जल्द करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

क्या था बंगाल मॉडल

पन्ना प्रमुख मॉडल

बीजेपी ने वोटर लिस्ट के हर पन्ने पर मौजूद करीब 30 से 35 मतदाताओं की जिम्मेदारी एक “पन्ना प्रमुख” को दी। उसका काम सिर्फ संपर्क बनाए रखना नहीं था, बल्कि लोगों की समस्याएं सुनना, भाजपा समर्थक वोटरों की पहचान करना और मतदान के दिन उन्हें घर से बूथ तक पहुंचाना भी उसकी जिम्मेदारी में शामिल था।

शक्ति केंद्र रणनीति

5 से 7 बूथों को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया गया था जिसे शक्ति केंद्र के नाम से जाना गया। हर शक्ति केंद्र को ऐसे 15 से 20 वोटरों को बीजेपी के पक्ष में लाने का लक्ष्य दिया गया, जो पहले किसी दूसरी पार्टी को वोट देते थे। शक्ति केंद्र प्रभारी अलग-अलग बूथ कमेटियों के बीच तालमेल बनाकर काम करते थे।

बूथों की तीन श्रेणियां

पार्टी ने सभी बूथों को तीन हिस्सों मजबूत, टक्कर वाले और कमजोर बूथ में बांटा। जिन बूथों पर बीजेपी कमजोर थी या मुकाबला कड़ा था, वहां अतिरिक्त कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई और लगातार निगरानी रखी गई।

हाइपर-लोकल कैंपेन मॉडल

बीजेपी ने हर बूथ पर कार्यकर्ताओं और कमेटियों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया था। स्थानीय मुद्दों के आधार पर अलग-अलग इलाकों में खास चुनावी अभियान चलाए गए। चुनाव के दिन इन सभी बूथों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई। इसके अलावा मंडल प्रवास, सत्यापन अभियान और विपक्ष की रणनीतियों पर नजर रखने का काम भी इसी मॉडल का हिस्सा था। विपक्ष की हर चाल की रिपोर्ट तैयार कर उसकी जवाबी रणनीति बनाना भी संगठन की जिम्मेदारी में शामिल था।

2024 नतीजों के बाद मंथन

2024 के लोकसभा चुनाव को अगर अलग रख दें, तो बीजेपी ने 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में लगभग हर चुनाव संगठन की ताकत के दम पर जीता है। यही वजह है कि पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज कर दी हैं। चुनाव में अभी करीब आठ महीने बाकी हैं, लेकिन बंगाल और असम में मिली बड़ी जीत से उत्साहित बीजेपी यूपी में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगाने की तैयारी में जुट गई है।

पार्टी जल्द ही प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति करेगी। आमतौर पर विधानसभा प्रभारी दूसरे जिलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं को बनाया जाता है, ताकि स्थानीय गुटबाजी का असर कम रहे। इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों से नाम मांगे गए हैं।संगठन को लगातार सक्रिय बनाए रखने के लिए जिलाध्यक्षों को हर महीने जिला कोर कमेटी की बैठक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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