
बंगाल में TMC का शहरी गढ़ खतरे में, KMC चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद BJP अब कोलकाता नगर निगम पर नजर लगाए है, जबकि TMC अपने सबसे मजबूत शहरी गढ़ को बचाने की चुनौती से जूझ रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अगला नंबर कोलकाता नगर निगम (KMC) का है?अब तक कोलकाता और KMC को ममता बनर्जी की पार्टी TMC का अभेद्य किला माना जाता रहा है। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों ने इस मजबूत गढ़ में दरार के संकेत दे दिए हैं। राज्य की राजधानी कोलकाता में मौजूद 11 विधानसभा सीटों में से TMC केवल पांच सीटें ही जीत सकी, जबकि बाकी सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया।
KMC क्षेत्र में BJP की बड़ी बढ़त
कोलकाता नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में तीन लोकसभा क्षेत्रों के तहत कुल 16 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें से भाजपा ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की है। बंगाली दैनिक आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, KMC के 144 वार्डों में से 101 वार्डों में भाजपा बढ़त बनाए हुए है, जबकि TMC केवल 43 वार्डों में आगे रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर में होने वाले नगर निगम चुनाव में अगर यही माहौल बना रहा, तो KMC में “कमल खिलना” केवल समय की बात हो सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार विधानसभा चुनाव में मिली भारी हार के बाद TMC के पास संगठन को दोबारा मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं है।
2021 में TMC का था दबदबा
2021 के KMC चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने 144 में से 134 वार्ड जीतकर लगभग एकतरफा जीत हासिल की थी। उस चुनाव में भाजपा को केवल तीन वार्डों में सफलता मिली थी।दिलचस्प बात यह है कि TMC ने कोलकाता नगर निगम पर उस समय भी कब्जा बनाए रखा था, जब राज्य में वामपंथी सरकार सत्ता में थी।
2011 में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद से TMC लगातार KMC पर हावी रही है। विपक्ष अक्सर आरोप लगाता रहा कि पार्टी ने पुलिस और प्रशासन की मदद से चुनावी गड़बड़ियों के जरिए निगम पर नियंत्रण बनाए रखा।लेकिन अब सत्ता हाथ से निकलने के बाद TMC के लिए वही दबदबा कायम रखना आसान नहीं माना जा रहा।हालांकि कस्बा, तिलजला, खिदिरपुर जैसे मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में TMC अभी भी मजबूत मानी जा रही है।
एंटी-इनकंबेंसी से घिरी TMC
रिपोर्ट में एक नगर निगम अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि पार्टी पार्षदों ने काफी मेहनत की, लेकिन सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) इतनी मजबूत हो चुकी है कि KMC चुनाव में TMC के लिए उसे रोकना मुश्किल हो सकता है।सिर्फ कोलकाता ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के शहरी इलाकों में भी TMC को बड़ा झटका लगा है।
हावड़ा, बिधाननगर और बाली जैसे नगर निकाय क्षेत्रों में भाजपा ने TMC को बुरी तरह पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में TMC को डर है कि आने वाले नगर निकाय चुनाव भी उसके लिए बेहद कठिन साबित हो सकते हैं।
मुंबई और तिरुवनंतपुरम जैसा हो सकता है बंगाल?
अगर भाजपा KMC पर कब्जा जमाने में सफल होती है, तो यह देश का पहला बड़ा नगर निगम नहीं होगा जहां ऐसा बदलाव देखने को मिलेगा पिछले साल महाराष्ट्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने देश के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर तीन दशक बाद कब्जा कर लिया था।यह जीत महाराष्ट्र में 2024 के चुनावों के दौरान चली “भगवा लहर” के बाद आई थी। इसी तरह केरल के तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भी पिछले दिसंबर हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने चार दशक पुराने वामपंथी शासन को समाप्त कर दिया था।
क्या KMC में भी बदल जाएगी सत्ता?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर विधानसभा चुनाव जैसा रुझान नगर निगम चुनावों में भी जारी रहता है, तो कोलकाता नगर निगम में सत्ता परिवर्तन संभव है।हालांकि भाजपा ने अभी तक KMC चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक रणनीति सार्वजनिक नहीं की है, क्योंकि फिलहाल उसका पूरा ध्यान नई राज्य सरकार के शपथ ग्रहण पर केंद्रित है।फिर भी TMC के भीतर यह चिंता गहराती जा रही है कि अगर जल्द चुनाव हुए, तो पार्टी के लिए अपना सबसे मजबूत शहरी गढ़ बचाना बेहद कठिन हो सकता है।

