
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सियासी घमासान, बीजेपी का बहुमत खतरे में
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी का बहुमत संकट में है। UDF अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, जबकि पार्षद की गिरफ्तारी से NDA का संख्या बल घट गया है।
केरल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एकमात्र नगर निगम सरकार संकट में घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी के नेतृत्व वाले प्रशासन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। नगर निगम में बीजेपी का बहुमत बेहद मामूली है और मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम ने उसकी स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
यूडीएफ संसदीय दल के नेता के.एस. सबरीनाथन ने घोषणा की कि विपक्ष 29 जून को नगर निगम कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेगा। इसके बाद बीजेपी प्रशासन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बीजेपी प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
सबरीनाथन ने आरोप लगाया कि सत्ता संभालने के पहले छह महीनों में बीजेपी प्रशासन पूरी तरह प्रशासनिक निष्क्रियता (Administrative Paralysis) का शिकार रहा है। उनके मुताबिक नगर निगम शहर में लगातार बढ़ रही कचरा प्रबंधन की समस्या, आवारा कुत्तों के आतंक और पेयजल संकट जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में विफल रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार से बड़े विकास कार्यों के वादों के बावजूद बीजेपी प्रशासन राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम के भविष्य के लिए कोई स्पष्ट विकास दृष्टि (Vision) पेश नहीं कर पाया।
बीजेपी की मुश्किलें बढ़ीं
यूडीएफ का यह हमला ऐसे समय हुआ है जब बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए राजनीतिक और संख्या बल, दोनों मोर्चों पर दबाव में है।बीजेपी पार्षद आर. सुगाथन को कथित मारपीट के एक मामले में केरल एंटी सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (KAAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है और वह फिलहाल जेल में हैं।
इसी बीच केरल हाईकोर्ट ने बीजेपी के 20 पार्षदों, जिनमें सुगाथन भी शामिल हैं, द्वारा ली गई शपथ को अमान्य घोषित कर दिया। अदालत ने कहा कि इन पार्षदों ने निर्धारित प्रारूप से हटकर विशेष देवी-देवताओं और "भारत माता" का उल्लेख किया था, जो नियमों के अनुरूप नहीं था।
बहुमत पर मंडराया खतरा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद 19 बीजेपी पार्षदों ने दोबारा शपथ ले ली, लेकिन जेल में होने के कारण आर. सुगाथन ऐसा नहीं कर सके। परिणामस्वरूप वे अब तक आधिकारिक रूप से पार्षद का कार्यभार नहीं संभाल पाए हैं।101 सदस्यीय नगर निगम परिषद में बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। सुगाथन के प्रभावी रूप से बाहर होने के बाद एनडीए की संख्या घटकर 50 रह गई है। फिलहाल उसकी सरकार निर्दलीय पार्षद पट्टूर राधाकृष्णन के समर्थन पर टिकी हुई है।
नगर निगम कार्यालय में हुआ हंगामा
सुगाथन की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ अभियान तेज कर दिया। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने उनके इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि नगर निगम नेतृत्व उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा है।पिछले कई सप्ताह से यह विवाद लगातार बढ़ता गया और आखिरकार नगर निगम की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।
25 जून की सुबह तिरुवनंतपुरम नगर निगम कार्यालय में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। एलडीएफ पार्षदों ने मेयर कार्यालय के सामने धरना देकर प्रवेश मार्ग रोक दिया। जब मेयर और डिप्टी मेयर पुलिस सुरक्षा के साथ कार्यालय पहुंचने लगे तो प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।देखते ही देखते दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान पुलिसकर्मी और मौके पर मौजूद पत्रकार भी अफरा-तफरी में फंस गए। कई लोगों को चोटें आईं, जिसके बाद स्थिति पर किसी तरह काबू पाया गया। नगर निगम मुख्यालय से सामने आई तस्वीरों ने यह दिखाया कि केरल का सबसे बड़ा नगर निगम प्रशासनिक कामकाज के बजाय राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गया है।
अविश्वास प्रस्ताव के लिए अनुकूल माहौल
यूडीएफ का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां बीजेपी को राजनीतिक रूप से घेरने और उसकी सरकार की स्थिरता की परीक्षा लेने के लिए सबसे अनुकूल हैं।सुगाथन के प्रभावी रूप से सदन से बाहर होने के बाद एनडीए की ताकत 101 सदस्यीय परिषद में घटकर 50 रह गई है, जबकि बहुमत के लिए 51 सदस्यों की जरूरत है।
क्या LDF देगा UDF का साथ?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के नेतृत्व वाला एलडीएफ यूडीएफ के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगा?नगर निगम में एलडीएफ के 29 और यूडीएफ के 20 पार्षद हैं। दोनों की संयुक्त संख्या 49 होती है, जो बहुमत से अभी भी दो कम है।हालांकि यदि मतदान के दौरान कोई सदस्य अनुपस्थित रहता है, मतदान से दूर रहता है या समर्थन का रुख बदलता है, तो यह अविश्वास प्रस्ताव राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और बीजेपी के नेतृत्व वाले प्रशासन पर दबाव और बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, तिरुवनंतपुरम नगर निगम में आने वाले दिनों में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है और यह राजनीतिक लड़ाई केवल स्थानीय निकाय तक सीमित न रहकर केरल की राज्य राजनीति पर भी असर डाल सकती है।

