
'ब्राह्मणों को गाली देना फैशन बन गया है', बीजेपी सांसद रवि किशन बोले—अपमान बर्दाश्त नहीं
यूपी के गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि ब्राह्मणों को गाली देना फैशन बन गया है। इसके साथ ही महिला आरक्षण और परिसीमन मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना की।
यूपी की सियासत में इस समय ब्राह्मणों का मुद्दा छाया हुआ है। विपक्षी दल खासतौर से समाजवादी पार्टी के नेता बार बार आरोप लगाते हैं कि बीजेपी सुनियोजित तरीके से ब्राह्मणों को अपमानित करने का काम कर रही है। समाजवादी पार्टी के नेता यह भी कहते हैं कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनंद को अपमानित किया गया। पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को इतना परेशान किया गया कि उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। इन सबके बीच गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन का एक बयान चर्चा में है। मीडिया से बातचीत में रविकिशन ने कहा- '' हां वो ब्राह्मण हैं और ब्राह्मण को गाली देना आजकल फैशन हो गया है।''
परशुराम जयंती में शामिल होने के लिए रवि किशन यूपी के बलिया जिले गए थे, वहां उन्होंने भोजपुरी में कहा- '' देखा एगो फैशन चलल बा, ब्राह्मण को गाली देवे का फैशन आ गइल बा, जेकर मन करत बा बोल देत है, आसान बा ब्राह्मण को गाली देना।''
रवि किशन ने कहा कि वो पहली भृगु महाराज की धरती पर आए है, ''जब कपारे पर सवार हो जाला तो हमसे कुछ भी बुलवा ले ला।'' रविकिशन ने कहा कि ब्राह्मण लालची नहीं होता है, वो लेने वाला नहीं देने वाला होता है, भिक्षा भी आशीर्वाद देकर या मंत्र पढ़कर लेता है, उसे बस प्यार से पैर लागो बोल दो उसी में खुश हो जाता है। भगवान परशुराम ने यूं ही फरसा नहीं उठाया था, धर्म की रक्षा के लिए फरसा उठाया था ऐसे वैसे ही संहार नहीं किया था।''
बीजेपी सांसद रवि किशन ने इस खास मौके पर महिला आरक्षण पर विपक्षी दलों के नजरिए पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- ''देश में 140 करोड़ की आबादी में 70 करोड़ महिलाएं हैं, क्या ये लोग सदन में उचित प्रतिनिधित्व की हकदार नहीं हैं।'' परिसीमन पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस के विरोध को गैर जरूरी बताया। उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र गोरखपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर परिसीमन के मुद्दे पर इन दलों ने विरोध नहीं किया होता तो सीटों की संख्या बढ़ती और आधी आबादी को देश की संसद और प्रदेश की विधानसभा में जाने का मौका मिलता। लेकिन विपक्ष के अड़ियल और संकीर्ण नजरिए की वजह से महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिर गया। ऐसी सूरत में आधी आबादी इन दलों को माफ नहीं करने वाली है।

