
दिल्ली मेयर चुनाव, बीजेपी की जीत तय, नाम पर सस्पेंस
दिल्ली MCD मेयर चुनाव में बीजेपी की जीत तय मानी जा रही है। आम आदमी पार्टी के बाहर रहने से मुकाबला एकतरफा हो गया है।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के नए मेयर को लेकर चल रहा सस्पेंस आज खत्म होने की संभावना है। राजनीतिक समीकरणों को देखें तो यह लगभग तय माना जा रहा है कि इस बार मेयर पद पर Bharatiya Janata Party का कब्जा होगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि Aam Aadmi Party ने इस चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला नहीं किया है, जबकि Indian National Congress या अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के पास पर्याप्त संख्या नहीं है। हालांकि, बीजेपी के भीतर मेयर पद के चेहरे को लेकर अंतिम सहमति देर शाम तक नहीं बन सकी थी, जिससे अब फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर आ गया है।
आज नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन है, ऐसे में दोपहर तक स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। यदि कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरता, तो नए मेयर का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा मेयर राजा इकबाल सिंह को दोबारा मौका मिलने की संभावना कम है, लेकिन उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें निगम में कोई अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
मेयर पद की दौड़ में फिलहाल डिप्टी मेयर जयभगवान यादव और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य रहे इंद्रजीत सहरावत को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा नेता सदन प्रवेश वाही का नाम भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नेतृत्व में बनी समिति में भी जयभगवान यादव का नाम प्रमुखता से सामने आया है। वहीं, डिप्टी मेयर पद के लिए पार्टी किसी युवा चेहरे को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।
एमसीडी में कुल 250 पार्षदों में से बीजेपी के पास 123 पार्षद हैं। इनमें कई अनुभवी चेहरे शामिल हैं, तो बड़ी संख्या में ऐसे पार्षद भी हैं जो तीसरी बार जीतकर आए हैं। पार्टी इस बार अनुभव और युवा ऊर्जा के संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहती है। इसी के तहत डिप्टी मेयर के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य प्रमुख समितियों के साथ-साथ 12 जोनों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों पर भी नए और अनुभवी चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है।
हालांकि, बीजेपी के लिए असली चुनौती मेयर बनने के बाद शुरू होगी। अगले साल एमसीडी चुनाव होने हैं और केंद्र के साथ-साथ दिल्ली में भी बीजेपी की सरकार है। पिछले एक साल में एमसीडी को पर्याप्त फंड मिला है, ऐसे में विपक्ष खासकर आम आदमी पार्टी ने रणनीतिक तौर पर इस चुनाव से दूरी बनाई है। अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी परीक्षा अगले एक साल में निगम में प्रदर्शन कर दिखाने की होगी, जिससे वह आगामी चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।

