
मजदूरों की आपबीती सुन कांपे अधिकारी, मुजफ्फरनगर केस में नए खुलासे
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की एक फैक्ट्री से 12 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया। जांच में यातना, बंधक बनाकर काम कराने और एक मजदूर की मौत के गंभीर आरोप सामने आए।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक पेपर प्लेट फैक्ट्री से 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराए जाने के बाद जांच में बेहद भयावह खुलासे हुए हैं। आरोप है कि फैक्ट्री में मजदूरों को अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं और एक मजदूर की कथित तौर पर यातना के कारण मौत होने के बाद उसके शव को बैग में भरकर ठिकाने लगा दिया गया।
फैक्ट्री पर छापेमारी में हुआ खुलासा
यह मामला 22 जून को सामने आया, जब प्रशासन और पुलिस ने तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण फैक्ट्री पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे। जांच में पता चला कि इन मजदूरों को लंबे समय से बंधक बनाकर बेहद खराब परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था।
यातना के बाद मजदूर की मौत का आरोप
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार ने गुरुवार को बताया कि फैक्ट्री में काम करने वाले अर्जुन नामक मजदूर की नवंबर 2025 में कथित रूप से यातना के कारण मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, मौत के बाद उसके शव को एक बैग में भरकर कहीं फेंक दिया गया था।
इस मामले में फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया गया है। शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जांच के लिए SIT गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। टीम पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और सबूत जुटाए जा रहे हैं।मुक्त कराए गए मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनका उपचार जारी है। उनके बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए हैं। प्रशासन मजदूरों के पुनर्वास, सरकारी सहायता, बैंक खाते खुलवाने और परिवारों से मिलाने की प्रक्रिया भी चला रहा है।
नौकरी का झांसा देकर बनाया गया बंधुआ मजदूर
जांच में सामने आया है कि मजदूरों को विभिन्न राज्यों से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर फैक्ट्री में लाया गया था। लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें न तो मजदूरी दी गई और न ही बाहर जाने की अनुमति।आरोप है कि एक साल से अधिक समय तक उन्हें फैक्ट्री परिसर में ही कैद रखा गया। उन्हें केवल खाना दिया जाता था और लगातार काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। कई मजदूरों के शरीर पर चोट और यातना के निशान भी पाए गए हैं।
मजदूरों ने सुनाई हैवानियत की कहानी
मुक्त कराए गए मजदूरों ने जांचकर्ताओं को बताया कि भागने या काम से इनकार करने पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। कुछ मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोड़ों से मारा गया, भालों से गोदा गया, कुत्तों से कटवाया गया और यहां तक कि पशुओं का चारा खाने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस ने पहले ही अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम और बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि अंकित बालियान फरार है।
राहुल गांधी ने जताई नाराजगी
इस मामले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मजदूरों के साथ हुए कथित व्यवहार को मानव गरिमा पर हमला बताया।राहुल गांधी ने कहा कि मजदूरों से बिना वेतन काम करवाने के साथ-साथ उन्हें कुत्तों से कटवाया गया, भालों से घायल किया गया, कोड़े मारे गए और पशुओं का चारा खिलाया गया। उन्होंने मांग की कि पीड़ितों को न्याय और पुनर्वास मिले तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
राहुल गांधी ने इस घटना को देश की व्यापक आर्थिक चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कमजोर होती अर्थव्यवस्था का परिणाम है। उनका कहना था कि जब रोजगार के अवसर कम होते हैं, आय रुक जाती है और मनरेगा व श्रम कानूनों जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर पड़ती हैं, तब गरीब और कमजोर लोग ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। SIT की रिपोर्ट और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला बंधुआ मजदूरी, मानवाधिकार उल्लंघन और श्रमिकों के शोषण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

